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Kaithal News: कैथल के इतिहास पर पुस्तक का विमोचन
Sun, 08 Jun 2025 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 08 Jun 2025 12:39 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कैथल के वरिष्ठ इतिहासकार, लेखक और संगीतविद् श्याम सुंदर गौड़ की पुस्तक “कैथल का इतिहास” का विमोचन शनिवार को उपायुक्त प्रीति ने अपने कार्यालय में किया। इस अवसर पर जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी नसीब सैनी भी उपस्थित रहे।
श्याम सुंदर गौड़ ने अपनी पुस्तक को डीसी और जनसंपर्क अधिकारी को भेंट किया। श्याम सुंदर गौड़ ने इस पुस्तक में कैथल की ऐतिहासिक विरासत को पद्य शैली में संजोया है। उन्होंने बताया कि महाभारत काल से लेकर आधुनिक काल तक की ऐतिहासिक घटनाओं, स्थलों और सांस्कृतिक पहचान को कविताओं और गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि श्रीकृष्ण द्वारा स्थापित 11 रुद्र आज भी श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में देखे जा सकते हैं। कैथल को ‘’छोटी काशी’’ कहा जाता है। शहर में रजिया सुल्तान का मकबरा, प्राचीन आठ दरवाजे, लकड़ी मंडी, प्रसिद्ध अनाज मंडी, फाउंड्री बाजार और अंग्रेजी शासनकाल में बना रेलवे स्टेशन जैसी धरोहरें मौजूद हैं। गौड़ ने यह भी बताया कि कभी कैथल में नवग्रह कुंड होते थे, जिनमें से अब केवल सूर्यकुंड के अवशेष बचे हैं।
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श्याम सुंदर गौड़ इससे पहले 24 पुस्तकें प्रकाशित कर चुके हैं। संगीत विषय में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है—उनकी लिखी संगीत पुस्तकें आज भी 11वीं और 12वीं कक्षा में पढ़ाई जाती हैं। वे आकाशवाणी कुरुक्षेत्र और रोहतक से वर्षों तक जुड़े रहे, और उनके गीत व भजन आज भी श्रोताओं द्वारा सराहे जाते हैं।
पुस्तक में कैथल के भूले-बिसरे कलाकारों को भी विशेष स्थान दिया गया है। इनमें तबला वादक उस्ताद गुलाम, सितार वादक नजीर, ढोल वादक रमजानी, कपूर ब्रदर्स, गायक रणधीर सिंह फौजी, पंडित राधेश्याम भट्ट, महेन्द्र सिंह ग्रंथी सहित कई संगीतज्ञों का उल्लेख है।
लेखक श्याम सुंदर गौड़ का कहना है, “कैथल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा और प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी प्रशासन और समाज दोनों की है। यह जरूरी है कि युवा पीढ़ी अपने शहर के इतिहास से परिचित हो और इसे गर्व के साथ आगे बढ़ाए।”
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कैथल। कैथल के वरिष्ठ इतिहासकार, लेखक और संगीतविद् श्याम सुंदर गौड़ की पुस्तक “कैथल का इतिहास” का विमोचन शनिवार को उपायुक्त प्रीति ने अपने कार्यालय में किया। इस अवसर पर जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी नसीब सैनी भी उपस्थित रहे।
श्याम सुंदर गौड़ ने अपनी पुस्तक को डीसी और जनसंपर्क अधिकारी को भेंट किया। श्याम सुंदर गौड़ ने इस पुस्तक में कैथल की ऐतिहासिक विरासत को पद्य शैली में संजोया है। उन्होंने बताया कि महाभारत काल से लेकर आधुनिक काल तक की ऐतिहासिक घटनाओं, स्थलों और सांस्कृतिक पहचान को कविताओं और गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
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पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि श्रीकृष्ण द्वारा स्थापित 11 रुद्र आज भी श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में देखे जा सकते हैं। कैथल को ‘’छोटी काशी’’ कहा जाता है। शहर में रजिया सुल्तान का मकबरा, प्राचीन आठ दरवाजे, लकड़ी मंडी, प्रसिद्ध अनाज मंडी, फाउंड्री बाजार और अंग्रेजी शासनकाल में बना रेलवे स्टेशन जैसी धरोहरें मौजूद हैं। गौड़ ने यह भी बताया कि कभी कैथल में नवग्रह कुंड होते थे, जिनमें से अब केवल सूर्यकुंड के अवशेष बचे हैं।
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श्याम सुंदर गौड़ इससे पहले 24 पुस्तकें प्रकाशित कर चुके हैं। संगीत विषय में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है—उनकी लिखी संगीत पुस्तकें आज भी 11वीं और 12वीं कक्षा में पढ़ाई जाती हैं। वे आकाशवाणी कुरुक्षेत्र और रोहतक से वर्षों तक जुड़े रहे, और उनके गीत व भजन आज भी श्रोताओं द्वारा सराहे जाते हैं।
पुस्तक में कैथल के भूले-बिसरे कलाकारों को भी विशेष स्थान दिया गया है। इनमें तबला वादक उस्ताद गुलाम, सितार वादक नजीर, ढोल वादक रमजानी, कपूर ब्रदर्स, गायक रणधीर सिंह फौजी, पंडित राधेश्याम भट्ट, महेन्द्र सिंह ग्रंथी सहित कई संगीतज्ञों का उल्लेख है।
लेखक श्याम सुंदर गौड़ का कहना है, “कैथल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा और प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी प्रशासन और समाज दोनों की है। यह जरूरी है कि युवा पीढ़ी अपने शहर के इतिहास से परिचित हो और इसे गर्व के साथ आगे बढ़ाए।”