{"_id":"62deea50a4cba61e6e1f9af2","slug":"worship-on-shivratri-today-in-auspicious-yoga-named-shiv-gauri-kaithal-news-knl115790073","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिवरात्रि पर आज शिव-गौरी नामक शुभ योग में करें पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिवरात्रि पर आज शिव-गौरी नामक शुभ योग में करें पूजा
विज्ञापन
कलायत। मंगलवार को सावन की शिवरात्रि मनाई जाएगी। अबकी शिव गौरी का संयोग बनने से यह दिन खास बन गया है। इस शुभ संयोग से भगवान शिव की पूजा करने से भगवान शिव और मां गौरी की विशेष कृपा प्राप्त होती हैं। इस दिन मंगला गौरी व्रत भी रखा जाएगा। मंगला गौरी व्रत में मां पार्वती की पूजा का विधान है।
पंडित विशाल शांडिल्य ने इस संबंध में बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन को भोलेनाथ का बेहद प्रिय महीना माना गया है। साथ ही सावन में पड़ने वाली शिवरात्रि पर भोलेनाथ और मां पार्वती की पूजा बहुत खास मानी जाती है। पंचांग के अनुसार, इस बार सावन की शिवरात्रि पर शिव-गौरी नामक शुभ योग बनने से यह दिन और भी मंगलकारी माना जा रहा है। दरअसल, शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत दोनों के एक ही दिन पड़ने से इसकी महत्ता बढ़ गई है।
उन्होंने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल सावन शिवरात्रि की तिथि का प्रारंभ 26 जुलाई को शाम 6:45 बजे से होकर इसका समापन 27 जुलाई को रात्रि 9:10 बजे होगा। मान्यता है कि शिवरात्रि में चारों पहर की पूजा करने से पुरुषार्थ, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ज्योतिष अनुसार 26 जुलाई 2022 को शाम 6:00 बजे से लेकर 7:30 बजे तक पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जा रहा है।
विज्ञापन
पूजा विधि
शांडिल्य ने बताया कि सावन की शिवरात्रि के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करके वहां भोलेनाथ, मां पार्वती, गणेश जी, भगवान कार्तिकेय तथा नंदी की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद शिव परिवार को पंचामृत से स्नान कराकर बेलपत्र, फूल, फल, मिष्ठान, इत्र आदि अर्पित करें। सावन की शिवरात्रि का व्रत करने वाले लोगों को शिव पुराण और शिवाष्टक का पाठ जरूर करना चाहिए। पूजा के बाद शिव आरती गाएं।
विज्ञापन
पंडित विशाल शांडिल्य ने इस संबंध में बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन को भोलेनाथ का बेहद प्रिय महीना माना गया है। साथ ही सावन में पड़ने वाली शिवरात्रि पर भोलेनाथ और मां पार्वती की पूजा बहुत खास मानी जाती है। पंचांग के अनुसार, इस बार सावन की शिवरात्रि पर शिव-गौरी नामक शुभ योग बनने से यह दिन और भी मंगलकारी माना जा रहा है। दरअसल, शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत दोनों के एक ही दिन पड़ने से इसकी महत्ता बढ़ गई है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल सावन शिवरात्रि की तिथि का प्रारंभ 26 जुलाई को शाम 6:45 बजे से होकर इसका समापन 27 जुलाई को रात्रि 9:10 बजे होगा। मान्यता है कि शिवरात्रि में चारों पहर की पूजा करने से पुरुषार्थ, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ज्योतिष अनुसार 26 जुलाई 2022 को शाम 6:00 बजे से लेकर 7:30 बजे तक पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जा रहा है।
विज्ञापन
पूजा विधि
शांडिल्य ने बताया कि सावन की शिवरात्रि के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करके वहां भोलेनाथ, मां पार्वती, गणेश जी, भगवान कार्तिकेय तथा नंदी की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद शिव परिवार को पंचामृत से स्नान कराकर बेलपत्र, फूल, फल, मिष्ठान, इत्र आदि अर्पित करें। सावन की शिवरात्रि का व्रत करने वाले लोगों को शिव पुराण और शिवाष्टक का पाठ जरूर करना चाहिए। पूजा के बाद शिव आरती गाएं।