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Kaithal News: मोक्ष के लिए मां कात्यायनी की पूजा
Thu, 10 Oct 2024 03:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 10 Oct 2024 03:41 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल, राजौंद, सीवन। पावन नवरात्र के सातवें दिन भी जिलेभर के दुर्गा मंदिरों में श्रद्धाुलओं की भारी भीड़ जुटी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने धर्म, अर्थ काम मोक्ष की प्राप्ति के लिए हुई मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की। नवरात्र पर प्राचीन बड़ी देवी, कोठी देवी स्थित छोटी देवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगने के साथ जयकारे लग रहे हैं।
राजौंद में वैसे तो श्रद्धालु प्रथम नवरात्र से ही मंदिरों में सुबह व सांय पूजा अर्चना के लिए भारी संख्या में पहुंच रहे हैं, लेकिन ज्यों ज्यों दुर्गा अष्टमी नजदीक आ रही है उसके साथ साथ मंदिरों में भगतों की चहल पहल भी बढ़ रही है। आचार्य ने बताया कि नवरात्रों के दौरान नौ देवियों की पूजा करनी चाहिए और घर में अखंड जोत जागृत करनी चाहिए। मां आदि शक्ति के ये नौ रूप सारे ब्रह्मांड को शक्ति देते है। बताया कि प्रत्येक नवरात्र पर कन्या का पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
आचार्य ने बताया कि नवरात्र उपवास रखने वाले श्रद्धालु अष्टमी को कंजक पूजन के साथ अपना उपवास खोलते हैं। जबकि कई श्रद्धालु नवमी को उपवास खोलते हैं। इस बार दुर्गाष्टमी का पर्व दो दिन तक मनाया जाएगा। वहीं, सीवन के संत छवि राम दास ने बताया कि नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है, जो देवी दुर्गा के छह प्रमुख रूपों में से एक हैं। इनका नाम ऋषि कात्यायन के नाम पर पड़ा, जिन्होंने देवी को पुत्री के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था।
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मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत भव्य और शक्तिशाली है। वे सिंह पर सवार होती हैं और उनके चार हाथ होते हैं, जिनमें तलवार, कमल और आशीर्वाद की मुद्रा होती है। उन्होंने कहा कि मां कात्यायनी को महिषासुर मर्दिनी के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि उन्होंने महिषासुर राक्षस का वध किया था। इस दिन उनकी पूजा से भक्तों को साहस, शक्ति और रोगों से मुक्ति मिलती है।
साथ ही, आध्यात्मिक उन्नति के लिए मां कात्यायनी की आराधना महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि उनकी कृपा से आज्ञा चक्र जागृत होता है, जिससे साधक को आध्यात्मिक जागरूकता प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि इस दिन मां को शहद का भोग लगाया जाता है, जो उनकी प्रिय वस्तु मानी जाती है। मां की कृपा से जीवन में समृद्धि, उन्नति और खुशहाली आती है। उनकी पूजा से मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है, जो जीवन के हर क्षेत्र में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है।
इस अवसर पर सुभाष गर्ग, सुरेंद्र, विजय, अशोक, शालिनी, उषा, शकुंतला, रानी, वीना व अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कैथल, राजौंद, सीवन। पावन नवरात्र के सातवें दिन भी जिलेभर के दुर्गा मंदिरों में श्रद्धाुलओं की भारी भीड़ जुटी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने धर्म, अर्थ काम मोक्ष की प्राप्ति के लिए हुई मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की। नवरात्र पर प्राचीन बड़ी देवी, कोठी देवी स्थित छोटी देवी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगने के साथ जयकारे लग रहे हैं।
राजौंद में वैसे तो श्रद्धालु प्रथम नवरात्र से ही मंदिरों में सुबह व सांय पूजा अर्चना के लिए भारी संख्या में पहुंच रहे हैं, लेकिन ज्यों ज्यों दुर्गा अष्टमी नजदीक आ रही है उसके साथ साथ मंदिरों में भगतों की चहल पहल भी बढ़ रही है। आचार्य ने बताया कि नवरात्रों के दौरान नौ देवियों की पूजा करनी चाहिए और घर में अखंड जोत जागृत करनी चाहिए। मां आदि शक्ति के ये नौ रूप सारे ब्रह्मांड को शक्ति देते है। बताया कि प्रत्येक नवरात्र पर कन्या का पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
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आचार्य ने बताया कि नवरात्र उपवास रखने वाले श्रद्धालु अष्टमी को कंजक पूजन के साथ अपना उपवास खोलते हैं। जबकि कई श्रद्धालु नवमी को उपवास खोलते हैं। इस बार दुर्गाष्टमी का पर्व दो दिन तक मनाया जाएगा। वहीं, सीवन के संत छवि राम दास ने बताया कि नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है, जो देवी दुर्गा के छह प्रमुख रूपों में से एक हैं। इनका नाम ऋषि कात्यायन के नाम पर पड़ा, जिन्होंने देवी को पुत्री के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था।
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मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत भव्य और शक्तिशाली है। वे सिंह पर सवार होती हैं और उनके चार हाथ होते हैं, जिनमें तलवार, कमल और आशीर्वाद की मुद्रा होती है। उन्होंने कहा कि मां कात्यायनी को महिषासुर मर्दिनी के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि उन्होंने महिषासुर राक्षस का वध किया था। इस दिन उनकी पूजा से भक्तों को साहस, शक्ति और रोगों से मुक्ति मिलती है।
साथ ही, आध्यात्मिक उन्नति के लिए मां कात्यायनी की आराधना महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि उनकी कृपा से आज्ञा चक्र जागृत होता है, जिससे साधक को आध्यात्मिक जागरूकता प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि इस दिन मां को शहद का भोग लगाया जाता है, जो उनकी प्रिय वस्तु मानी जाती है। मां की कृपा से जीवन में समृद्धि, उन्नति और खुशहाली आती है। उनकी पूजा से मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है, जो जीवन के हर क्षेत्र में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है।
इस अवसर पर सुभाष गर्ग, सुरेंद्र, विजय, अशोक, शालिनी, उषा, शकुंतला, रानी, वीना व अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।