{"_id":"67ec40985002a374de0ab760","slug":"worship-of-mother-chandraghanta-and-kirtan-was-done-kaithal-news-c-18-1-knl1004-615181-2025-04-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: चंद्रघंटा मां की पूजा, किया कीर्तन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: चंद्रघंटा मां की पूजा, किया कीर्तन
Wed, 02 Apr 2025 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 02 Apr 2025 01:08 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/सीवन। नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की। प्रमुख देवी मंदिरों में दर्शनों के लिए भक्तों की भारी भीड़ लगी रही। शहर के कोठी देवी मंदिर, बड़ी देवी मंदिर का फूलों से शृंगार किया। इसके साथ ही पुजारी विनायक भारद्वाज ने माता रानी का कीर्तन किया। श्रद्धालु भी माता रानी के भजनों पर जमकर झूमे।
वहीं, घरों में माता रानी के उपासकों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। वीरवार की सुबह घरों में सभी ने विधिवत तरीके से मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना कर घर में सुख-समृद्धि व आरोग्य की कामना की।
हनुमान वाटिका के पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि मां के तीसरे स्वरूप की मान्यता है कि चंद्र घंटा के घंटे की ध्वनि से राक्षस, दैत्य, दानव आदि भय खाते हैं। मां दुर्गा का यह स्वरूप बेहद कल्याणकारी और शांति प्रदान करने वाला व भक्तों के दुखों को हरने वाला है। इसीलिए इनके हाथों में तलवार, त्रिशूल, गदा और धनुष है। धर्म की रक्षा करने और संसार से अंधकार का नाश करने के लिए ही इनकी उत्पत्ति हुई।
विज्ञापन
उधर, सीवन में भी सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी व श्रद्धालुओं ने मां के जयकारे लगाए। महंत धीरज पुरी ने श्रद्धालुओं को मां चंद्रघंटा के बारे में बताया कि देवी का यह रूप साहस और शौर्य का प्रतीक है। इनकी कृपा से साधक को अलौकिक सिद्धियां प्राप्त होती हैं और उसके जीवन से समस्त दुखों और कष्टों का नाश होता है। देवी की उपासना करने से भक्तों को अद्भुत शक्ति प्राप्त होती है और उनके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रों में मां की पूजा के साथ ध्यान और साधना का विशेष महत्व है, जिससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
विज्ञापन
कैथल/सीवन। नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की। प्रमुख देवी मंदिरों में दर्शनों के लिए भक्तों की भारी भीड़ लगी रही। शहर के कोठी देवी मंदिर, बड़ी देवी मंदिर का फूलों से शृंगार किया। इसके साथ ही पुजारी विनायक भारद्वाज ने माता रानी का कीर्तन किया। श्रद्धालु भी माता रानी के भजनों पर जमकर झूमे।
वहीं, घरों में माता रानी के उपासकों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। वीरवार की सुबह घरों में सभी ने विधिवत तरीके से मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना कर घर में सुख-समृद्धि व आरोग्य की कामना की।
विज्ञापन
हनुमान वाटिका के पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि मां के तीसरे स्वरूप की मान्यता है कि चंद्र घंटा के घंटे की ध्वनि से राक्षस, दैत्य, दानव आदि भय खाते हैं। मां दुर्गा का यह स्वरूप बेहद कल्याणकारी और शांति प्रदान करने वाला व भक्तों के दुखों को हरने वाला है। इसीलिए इनके हाथों में तलवार, त्रिशूल, गदा और धनुष है। धर्म की रक्षा करने और संसार से अंधकार का नाश करने के लिए ही इनकी उत्पत्ति हुई।
विज्ञापन
उधर, सीवन में भी सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी व श्रद्धालुओं ने मां के जयकारे लगाए। महंत धीरज पुरी ने श्रद्धालुओं को मां चंद्रघंटा के बारे में बताया कि देवी का यह रूप साहस और शौर्य का प्रतीक है। इनकी कृपा से साधक को अलौकिक सिद्धियां प्राप्त होती हैं और उसके जीवन से समस्त दुखों और कष्टों का नाश होता है। देवी की उपासना करने से भक्तों को अद्भुत शक्ति प्राप्त होती है और उनके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रों में मां की पूजा के साथ ध्यान और साधना का विशेष महत्व है, जिससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।