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Kaithal News: शिव जी की आराधना कर पितरों को पूजा
Tue, 31 Dec 2024 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 31 Dec 2024 12:40 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर देशभर में श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में स्नान कर भगवान शिव और पितरों की आराधना की। इसी कड़ी में सुबह से ही नगर के मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही जहां शिवलिंग
पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाए गए। विशेष रूप से शिवालयों में दीपदान किया गया और भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना की गई।
इसी कड़ी में सोमवार को गोशालाओं में विशेष सेवा का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने गायों को हरा चारा, गुड़, और अनाज खिलाया। भक्तों का मानना है कि गो सेवा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जीवन में शुभ फल प्रदान करते हैं। अनेक धार्मिक स्थलों पर भंडारे और अनुष्ठानों का आयोजन हुआ।
महंत बंसी पुरी ने सोमवती अमावस के बारे में बताते हुए कहा कि वैसे तो हर माह अमावस्या आती है परंतु सोमवार के दिन आने वाली अमावस्या का विशेष महत्व होता है। आज के दिन पीपल वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व है। पीपल के वृक्ष की परिक्रमा कर दीप प्रज्वलित करने से पितरों के लिए तर्पण होता है।
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उन्होंने कहा कि सोमवती अमावस्या पर अपने सामर्थ अनुसार हमें गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, और धन आदि दान करना चाहिए।
इस पावन दिन पर की गई सेवा और पूजा को जीवन में शांति और सकारात्मक
ऊर्जा का आधार माना गया है। इस अवसर पर पाली सैनी, कृष्ण वधवा व अन्य श्रद्धालुओं ने गोशाला में गायों को गुड़ खिलाया।
नई शुरुआत के लिए जगा रहा नया साल ः पंडित रवि दत्त
पूंडरी। पंडित व ज्योतिषाचार्य रवि दत्त शास्त्री ने बताया कि वर्ष 2024 को पूरा कर हम सब नए अंग्रेजी वर्ष 2025 में प्रवेश कर रहे हैं। प्राचीन काल से भारतवर्ष के ऋषि मुनियों की यही कामना रही है कि यदि मानव अध्यात्म ज्ञान के मार्ग पर चलेगा तो उसका निश्चय ही कल्याण होगा। कई बार लोग पूछते हैं कि नया साल किस तरह से मनाया जाए। वे कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं इसके बारे में निर्णय लेना चाहिए। नए साल पर खुशियां मनाएं लेकिन वह सात्विक होनी चाहिए।इस बार नववर्ष पर हम पृथ्वी के लिए शांति व संपन्नता के संकल्प के साथ सभी को शुभकामना दें। समाज के लिए कुछ अच्छा करने का संकल्प लें। संवाद
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सीवन। सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर देशभर में श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में स्नान कर भगवान शिव और पितरों की आराधना की। इसी कड़ी में सुबह से ही नगर के मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही जहां शिवलिंग
पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाए गए। विशेष रूप से शिवालयों में दीपदान किया गया और भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना की गई।
इसी कड़ी में सोमवार को गोशालाओं में विशेष सेवा का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने गायों को हरा चारा, गुड़, और अनाज खिलाया। भक्तों का मानना है कि गो सेवा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जीवन में शुभ फल प्रदान करते हैं। अनेक धार्मिक स्थलों पर भंडारे और अनुष्ठानों का आयोजन हुआ।
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महंत बंसी पुरी ने सोमवती अमावस के बारे में बताते हुए कहा कि वैसे तो हर माह अमावस्या आती है परंतु सोमवार के दिन आने वाली अमावस्या का विशेष महत्व होता है। आज के दिन पीपल वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व है। पीपल के वृक्ष की परिक्रमा कर दीप प्रज्वलित करने से पितरों के लिए तर्पण होता है।
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उन्होंने कहा कि सोमवती अमावस्या पर अपने सामर्थ अनुसार हमें गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, और धन आदि दान करना चाहिए।
इस पावन दिन पर की गई सेवा और पूजा को जीवन में शांति और सकारात्मक
ऊर्जा का आधार माना गया है। इस अवसर पर पाली सैनी, कृष्ण वधवा व अन्य श्रद्धालुओं ने गोशाला में गायों को गुड़ खिलाया।
नई शुरुआत के लिए जगा रहा नया साल ः पंडित रवि दत्त
पूंडरी। पंडित व ज्योतिषाचार्य रवि दत्त शास्त्री ने बताया कि वर्ष 2024 को पूरा कर हम सब नए अंग्रेजी वर्ष 2025 में प्रवेश कर रहे हैं। प्राचीन काल से भारतवर्ष के ऋषि मुनियों की यही कामना रही है कि यदि मानव अध्यात्म ज्ञान के मार्ग पर चलेगा तो उसका निश्चय ही कल्याण होगा। कई बार लोग पूछते हैं कि नया साल किस तरह से मनाया जाए। वे कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं इसके बारे में निर्णय लेना चाहिए। नए साल पर खुशियां मनाएं लेकिन वह सात्विक होनी चाहिए।इस बार नववर्ष पर हम पृथ्वी के लिए शांति व संपन्नता के संकल्प के साथ सभी को शुभकामना दें। समाज के लिए कुछ अच्छा करने का संकल्प लें। संवाद