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कबड्डी विश्व कप की बेस्ट रेडर रोजगार के लिए मोहताज
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल
Updated Sun, 20 Jul 2014 11:46 PM IST
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कैथल। पंजाब में साल 2013 में खेले गए महिला कबड्डी विश्व में बेस्ट रेडर का खिताब जीतने वाली भारतीय टीम की खिलाड़ी रामभतेरी आज रोजगार की मोहताज हैं।
प्रदेश सरकार द्वारा खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के दावों की लंबी लिस्ट में इस होनहार के नाम के लिए शायद जगह नहीं है। रविवार को अंबाला रोड पर एचसीटीएम में आयोजित बॉक्सिंग प्रतियोगिता में शिरकत करने पहुंची रामभतेरी ने ‘अमर उजाला’ के साथ अपने विचार सांझा किए। इस दौरान रोजगार न मिलने की टीस उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी।
फतेहाबाद जिले के समैण गांव में जन्मी रामभतेरी ने बताया कि वह एक साधारण परिवार से है। उसके पिता रघुबीर सिंह और माता प्रकाशो देवी खेतीबाड़ी करते हैं। लेकिन बडे़ भाई राजबीर गिल कबड्डी के अच्छे खिलाड़ी हैं। उन्हें देखकर उसे कबड्डी खेलने की प्रेरणा मिली।
साल 2008 से खेलना शुरू किया था
रामभतेरी ने बताया कि साल 2008 में उसने कबड्डी खेलना शुरू किया था। अपने भाई राजबीर गिल से उसने कबड्डी के गुरु सीखे और आज वही उसके कोच हैं। खेलो के प्रति माता पिता का भी पूरा सहयोग मिल। इसी कारण कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिला। कुछ साल पहले पंजाब सरकार द्वारा आयोजित कबड्डी वर्ल्ड कप में उसका चयन हुआ तथा पूरे वर्ल्ड कप में उसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए बेस्ट रेडर का खिताब जीता। परिणामस्वरूप वर्ल्ड में उसे ईनाम के रूप में ऑल्टो कार भेंट की गई।
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‘सफलता के साथ रोजगार भी चाहिए’
रामभतेरी ने बताया कि उसके गांव समैण में 150 से ज्यादा लड़कियां इस उम्मीद के साथ कबड्डी की प्रेक्टिस करती हैं कि आगे जाकर वह भी उसी की तरह ही बड़ी खिलाड़ी बनेंगी। लेकिन रामभतेरी ने कहा कि खिलाड़ियों को सफलता मिलने के बाद रोजगार मिलना चाहिए, ताकि वे अपने खेल को आगे बढ़ा सकें।
ओलंपिक में कबड्डी न होने से निराश
इस समय पटियाला में शिक्षा ग्रहण कर रही रामभतेरी ने बताया कि वह प्रतिदिन सुबह शाम तीन-तीन घंटे अभ्यास करती है। प्रतियोगिता के समय प्रतिदिन तीन बार अभ्यास किया जाता है। लेकिन मेहनत से कभी दिल नहीं चुराती है, क्योंकि मेहनत करने वालों को ही मंजिल मिलती है।
रामभतेरी का मानना है कि लड़कियों को किसी न किसी खेल में अवश्य भाग लेना चाहिए। रामभतेरी ने बताया कि उनका सपना ओलंपिक में कबड्डी खेलते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक लाने का है। लेकिन इस बात से निराशा होती है कि कबड्डी को ओलंपिक खेलो में शामिल नहीं किया गया है। इसलिए सरकारकबड्डी को ओलंपिक में शामिल करवाने का प्रयास करे।
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प्रदेश सरकार द्वारा खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के दावों की लंबी लिस्ट में इस होनहार के नाम के लिए शायद जगह नहीं है। रविवार को अंबाला रोड पर एचसीटीएम में आयोजित बॉक्सिंग प्रतियोगिता में शिरकत करने पहुंची रामभतेरी ने ‘अमर उजाला’ के साथ अपने विचार सांझा किए। इस दौरान रोजगार न मिलने की टीस उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी।
फतेहाबाद जिले के समैण गांव में जन्मी रामभतेरी ने बताया कि वह एक साधारण परिवार से है। उसके पिता रघुबीर सिंह और माता प्रकाशो देवी खेतीबाड़ी करते हैं। लेकिन बडे़ भाई राजबीर गिल कबड्डी के अच्छे खिलाड़ी हैं। उन्हें देखकर उसे कबड्डी खेलने की प्रेरणा मिली।
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साल 2008 से खेलना शुरू किया था
रामभतेरी ने बताया कि साल 2008 में उसने कबड्डी खेलना शुरू किया था। अपने भाई राजबीर गिल से उसने कबड्डी के गुरु सीखे और आज वही उसके कोच हैं। खेलो के प्रति माता पिता का भी पूरा सहयोग मिल। इसी कारण कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिला। कुछ साल पहले पंजाब सरकार द्वारा आयोजित कबड्डी वर्ल्ड कप में उसका चयन हुआ तथा पूरे वर्ल्ड कप में उसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए बेस्ट रेडर का खिताब जीता। परिणामस्वरूप वर्ल्ड में उसे ईनाम के रूप में ऑल्टो कार भेंट की गई।
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‘सफलता के साथ रोजगार भी चाहिए’
रामभतेरी ने बताया कि उसके गांव समैण में 150 से ज्यादा लड़कियां इस उम्मीद के साथ कबड्डी की प्रेक्टिस करती हैं कि आगे जाकर वह भी उसी की तरह ही बड़ी खिलाड़ी बनेंगी। लेकिन रामभतेरी ने कहा कि खिलाड़ियों को सफलता मिलने के बाद रोजगार मिलना चाहिए, ताकि वे अपने खेल को आगे बढ़ा सकें।
ओलंपिक में कबड्डी न होने से निराश
इस समय पटियाला में शिक्षा ग्रहण कर रही रामभतेरी ने बताया कि वह प्रतिदिन सुबह शाम तीन-तीन घंटे अभ्यास करती है। प्रतियोगिता के समय प्रतिदिन तीन बार अभ्यास किया जाता है। लेकिन मेहनत से कभी दिल नहीं चुराती है, क्योंकि मेहनत करने वालों को ही मंजिल मिलती है।
रामभतेरी का मानना है कि लड़कियों को किसी न किसी खेल में अवश्य भाग लेना चाहिए। रामभतेरी ने बताया कि उनका सपना ओलंपिक में कबड्डी खेलते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक लाने का है। लेकिन इस बात से निराशा होती है कि कबड्डी को ओलंपिक खेलो में शामिल नहीं किया गया है। इसलिए सरकारकबड्डी को ओलंपिक में शामिल करवाने का प्रयास करे।