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Kaithal News: वर्करों को मिलेगा खाना बनाने का विशेष प्रशिक्षण
Wed, 29 Apr 2026 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 29 Apr 2026 12:34 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील को और अधिक गुणवत्ता पूर्ण व सुरक्षित बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है। अब मिड डे मील वर्करों और हेल्परों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें स्वच्छता, पोषण और भोजन तैयार करने के बेहतर तरीकों की जानकारी दी जाएगी। इस संबंध में मौलिक शिक्षा, हरियाणा की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक में करीब पांच मास्टर ट्रेनर नियुक्त किए जाएंगे, जो टीजीटी गृह विज्ञान शिक्षकों में से चुने जाएंगे। ये मास्टर ट्रेनर स्कूलों में जाकर मिड डे मील से जुड़े वर्करों और हेल्परों को प्रशिक्षण देंगे, ताकि बच्चों को बेहतर, स्वच्छ और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
जिले में वर्तमान में लगभग 1300 मिड डे मील वर्कर और हेल्पर कार्यरत हैं, जो प्रतिदिन हजारों बच्चों के लिए भोजन तैयार करते हैं। नियमों के अनुसार 50 बच्चों पर एक हेल्पर या वर्कर की नियुक्ति की गई है। जिले के 443 सरकारी स्कूलों में यह योजना संचालित हो रही है, जहां पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मिड डे मील दिया जाता है। पिछले वर्ष से निर्धारित शेड्यूल के अनुसार हर माह अलग-अलग मेन्यू के तहत भोजन तैयार किया जा रहा है, जिसकी जानकारी भी प्रशिक्षण के दौरान दी जाएगी।
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जिला शिक्षा अधिकारी सुभाष कुमार ने बताया कि मिड डे मील वर्करों और हेल्परों को प्रशिक्षण देने से भोजन की गुणवत्ता में और सुधार आएगा। कहा कि वर्तमान में भी स्कूल स्टाफ द्वारा भोजन की जांच के बाद ही बच्चों को परोसा जाता है, और नई व्यवस्था से इसे और बेहतर बनाया जाएगा।
जिले में कक्षा आठवीं तक के 70 हजार से अधिक बच्चों को मिलता है लाभ
जिले में कक्षा आठवीं तक के 70 हजार से अधिक विद्यार्थी इस योजना के तहत प्रतिदिन दोपहर का भोजन प्राप्त करते हैं। मौलिक शिक्षा विभाग के अनुसार यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर मिड डे मील वर्करों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में उन्हें साफ-सफाई, पोषण संतुलन, भोजन की गुणवत्ता और रसोई प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। इसके लिए सभी जिलों के मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर मास्टर ट्रेनरों का विवरण मांगा गया है। जल्द ही इन्हें प्रशिक्षण देकर संबंधित ब्लॉकों में भेजा जाएगा, जहां ये स्कूल स्तर पर वर्करों और हेल्परों को प्रशिक्षित करेंगे।
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कैथल। जिले के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील को और अधिक गुणवत्ता पूर्ण व सुरक्षित बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है। अब मिड डे मील वर्करों और हेल्परों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें स्वच्छता, पोषण और भोजन तैयार करने के बेहतर तरीकों की जानकारी दी जाएगी। इस संबंध में मौलिक शिक्षा, हरियाणा की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक में करीब पांच मास्टर ट्रेनर नियुक्त किए जाएंगे, जो टीजीटी गृह विज्ञान शिक्षकों में से चुने जाएंगे। ये मास्टर ट्रेनर स्कूलों में जाकर मिड डे मील से जुड़े वर्करों और हेल्परों को प्रशिक्षण देंगे, ताकि बच्चों को बेहतर, स्वच्छ और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
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जिले में वर्तमान में लगभग 1300 मिड डे मील वर्कर और हेल्पर कार्यरत हैं, जो प्रतिदिन हजारों बच्चों के लिए भोजन तैयार करते हैं। नियमों के अनुसार 50 बच्चों पर एक हेल्पर या वर्कर की नियुक्ति की गई है। जिले के 443 सरकारी स्कूलों में यह योजना संचालित हो रही है, जहां पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मिड डे मील दिया जाता है। पिछले वर्ष से निर्धारित शेड्यूल के अनुसार हर माह अलग-अलग मेन्यू के तहत भोजन तैयार किया जा रहा है, जिसकी जानकारी भी प्रशिक्षण के दौरान दी जाएगी।
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जिला शिक्षा अधिकारी सुभाष कुमार ने बताया कि मिड डे मील वर्करों और हेल्परों को प्रशिक्षण देने से भोजन की गुणवत्ता में और सुधार आएगा। कहा कि वर्तमान में भी स्कूल स्टाफ द्वारा भोजन की जांच के बाद ही बच्चों को परोसा जाता है, और नई व्यवस्था से इसे और बेहतर बनाया जाएगा।
जिले में कक्षा आठवीं तक के 70 हजार से अधिक बच्चों को मिलता है लाभ
जिले में कक्षा आठवीं तक के 70 हजार से अधिक विद्यार्थी इस योजना के तहत प्रतिदिन दोपहर का भोजन प्राप्त करते हैं। मौलिक शिक्षा विभाग के अनुसार यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर मिड डे मील वर्करों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में उन्हें साफ-सफाई, पोषण संतुलन, भोजन की गुणवत्ता और रसोई प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। इसके लिए सभी जिलों के मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर मास्टर ट्रेनरों का विवरण मांगा गया है। जल्द ही इन्हें प्रशिक्षण देकर संबंधित ब्लॉकों में भेजा जाएगा, जहां ये स्कूल स्तर पर वर्करों और हेल्परों को प्रशिक्षित करेंगे।