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महिलाओं ने उठाई थी हक की आवाज : मधुल
Fri, 08 Mar 2024 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 08 Mar 2024 01:16 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। वरिष्ठ कवयित्री मधु गोयल मधुल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जैसे ही आठ मार्च का दिन नजदीक आता है, सभी के जेहन में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की यादें ताजा हो जाती हैं। इस दिन महिलाओं ने हक की आवाज उठाई थी।
उन्होंने कहा कि हममें से अधिकांश को यह भी नहीं पता कि आठ मार्च को ही महिला दिवस क्यों मनाया जाता है। इसके पीछे क्या कारण रहे होंगे।
मधुल ने बताया कि लगभग 15 हजार मजदूर महिलाओं ने 1908 में न्यूयॉर्क में नौकरी में कम समय और बेहतर वेतन, साथ ही मतदान को लेकर अपनी मांग उठाई थी। एक वर्ष के पश्चात यह आइडिया भी एक औरत का ही था।
कहा, इस दिवस को आधिकारिक मान्यता सन 1975 में उस वक्त मिली जब संयुक्त राष्ट्र ने इसे वार्षिक तौर पर एक थीम के साथ मनाना शुरू किया। इसलिए इस दिन को निश्चित कर लिया।
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डीएवी काॅलेज में कार्यक्रम
पूंडरी। डीएवी कॉलेज में महिला प्रकोष्ठ की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर व्याख्यान का आयोजन करवाया गया।
संयोजिका प्रो.परमिन्द्र कौर ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। प्राध्यापकों ने अनुभव साझा करते हुए जीवन में अपनाई जाने वाली छोटी-छोटी बातों के बारे में बताया। इस अवसर पर डॉ सिमरजीत कौर, डाॅ. रितु रानी, नेहा शर्मा, कविता, जाहनवी,पूजा रानी व सीमा मौजूद रहीं। संवाद
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कैथल। वरिष्ठ कवयित्री मधु गोयल मधुल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जैसे ही आठ मार्च का दिन नजदीक आता है, सभी के जेहन में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की यादें ताजा हो जाती हैं। इस दिन महिलाओं ने हक की आवाज उठाई थी।
उन्होंने कहा कि हममें से अधिकांश को यह भी नहीं पता कि आठ मार्च को ही महिला दिवस क्यों मनाया जाता है। इसके पीछे क्या कारण रहे होंगे।
मधुल ने बताया कि लगभग 15 हजार मजदूर महिलाओं ने 1908 में न्यूयॉर्क में नौकरी में कम समय और बेहतर वेतन, साथ ही मतदान को लेकर अपनी मांग उठाई थी। एक वर्ष के पश्चात यह आइडिया भी एक औरत का ही था।
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कहा, इस दिवस को आधिकारिक मान्यता सन 1975 में उस वक्त मिली जब संयुक्त राष्ट्र ने इसे वार्षिक तौर पर एक थीम के साथ मनाना शुरू किया। इसलिए इस दिन को निश्चित कर लिया।
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डीएवी काॅलेज में कार्यक्रम
पूंडरी। डीएवी कॉलेज में महिला प्रकोष्ठ की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर व्याख्यान का आयोजन करवाया गया।
संयोजिका प्रो.परमिन्द्र कौर ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। प्राध्यापकों ने अनुभव साझा करते हुए जीवन में अपनाई जाने वाली छोटी-छोटी बातों के बारे में बताया। इस अवसर पर डॉ सिमरजीत कौर, डाॅ. रितु रानी, नेहा शर्मा, कविता, जाहनवी,पूजा रानी व सीमा मौजूद रहीं। संवाद