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गेहूं सीजन में कटौती, दो माह ही चलेगा
कैथल
Updated Tue, 18 Mar 2014 11:45 PM IST
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इस बार गेहूं का सीजन दो महीने तक ही चलेगा। सरकार ने गेहूं के सीजन की अवधि तीन माह से घटाकर दो महीने कर दी है। जिसके तहत गेहूं की खरीद एक अप्रैल से शुरू होकर 31 मई तक होगी।
इस संबंध में सभी खरीद एजेंसियों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इन आदेशों के चलते इस बार गेहूं के सीजन में घटौतरी की समस्या कम रहेगी। क्योंकि खरीद के बाद 30 जून तक विभिन्न खरीद एजेंसियों द्वारा खरीदे गए गेहूं का उठान न होने के कारण और नमी सूख जाने के चलते इसमें घटौतरी की समस्या रहती थी। जिसके लिए बाद में आढ़तियों तक को भी नोटिस जारी होते हैं।
गेहूं का समर्थन मूल्य चौदह सौ रुपये क्विंटल
इससे पहले, गेहूं सीजन में एक अप्रैल से 30 जून तक पिछले वर्ष तक सरकारी खरीद की जाती थी। लेकिन अब यह एक महीने घटा दिया गया है। हालांकि अधितर गेहूं की आवक अप्रैल एवं मई माह में हो जाती है। लेकिन इसके बावजूद 30 जून तक सरकारी खरीद जारी रहती थी।
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जिस कारण एजेंसियों को भी गेहूं का रखरखाव स्वयं करना पड़ता था। लेकिन खरीद एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, अब सीजन 31 मई तक चलेगा। जिससे उन्हें राहत मिलेगी। अब एक माह की अवधि कम होने से एजेंसियों का खर्च भी कम होगा। वहीं, किसानों को भी अपना गेहूं दो माह में ही बेचना पड़ेगा।
इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। जबकि पिछले साल 1350 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके अलावा जौ 1100 रुपये, चने 3100 रुपये, मसूर 2950 रुपये, सूरजमुखी तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम मूल्य निर्धारित किया गया है।
हो सकती है गेहूं की प्राइवेट खरीद
सरकारी गोदामों से लगातार हो रहे उठान के चलते व्यापारी भी इस बार गेहूं की खरीद कर सकता है। मंडी में सीजन के समय में भी न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक मूल्य चुका कर गेहूं की खरीद कर सकता है। इस सीजन में प्राइवेट खरीद होने की संभावनाएं हैं।
इस समय एफसीआई द्वारा लगभग 1500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से व्यापारियों को गेहूं बेचा जा रहा है। वहीं, गेहूं के पिछले साल के स्टॉक की समाप्ति के चलते व्यापारियों को मुनाफे की उम्मीद है।
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इस संबंध में सभी खरीद एजेंसियों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इन आदेशों के चलते इस बार गेहूं के सीजन में घटौतरी की समस्या कम रहेगी। क्योंकि खरीद के बाद 30 जून तक विभिन्न खरीद एजेंसियों द्वारा खरीदे गए गेहूं का उठान न होने के कारण और नमी सूख जाने के चलते इसमें घटौतरी की समस्या रहती थी। जिसके लिए बाद में आढ़तियों तक को भी नोटिस जारी होते हैं।
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गेहूं का समर्थन मूल्य चौदह सौ रुपये क्विंटल
इससे पहले, गेहूं सीजन में एक अप्रैल से 30 जून तक पिछले वर्ष तक सरकारी खरीद की जाती थी। लेकिन अब यह एक महीने घटा दिया गया है। हालांकि अधितर गेहूं की आवक अप्रैल एवं मई माह में हो जाती है। लेकिन इसके बावजूद 30 जून तक सरकारी खरीद जारी रहती थी।
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जिस कारण एजेंसियों को भी गेहूं का रखरखाव स्वयं करना पड़ता था। लेकिन खरीद एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, अब सीजन 31 मई तक चलेगा। जिससे उन्हें राहत मिलेगी। अब एक माह की अवधि कम होने से एजेंसियों का खर्च भी कम होगा। वहीं, किसानों को भी अपना गेहूं दो माह में ही बेचना पड़ेगा।
इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। जबकि पिछले साल 1350 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके अलावा जौ 1100 रुपये, चने 3100 रुपये, मसूर 2950 रुपये, सूरजमुखी तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम मूल्य निर्धारित किया गया है।
हो सकती है गेहूं की प्राइवेट खरीद
सरकारी गोदामों से लगातार हो रहे उठान के चलते व्यापारी भी इस बार गेहूं की खरीद कर सकता है। मंडी में सीजन के समय में भी न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक मूल्य चुका कर गेहूं की खरीद कर सकता है। इस सीजन में प्राइवेट खरीद होने की संभावनाएं हैं।
इस समय एफसीआई द्वारा लगभग 1500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से व्यापारियों को गेहूं बेचा जा रहा है। वहीं, गेहूं के पिछले साल के स्टॉक की समाप्ति के चलते व्यापारियों को मुनाफे की उम्मीद है।