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प्रशासनिक सेवा का था सपना, दृढ़ संकल्प से पाया मुकाम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jun 2022 01:48 AM IST
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Was the dream of administrative service, achieved the position with determination
कैथल। एनआईटी कुरुक्षेत्र से बीटेक करने के बाद हैदराबाद में दो साल तक नौकरी की, लेकिन मन में प्रशासनिक सेवा का सपना था। यही कारण है कि नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी करने का निश्चय किया। इसके लिए पापा को फोन किया तो उन्होंने तुरंत नौकरी छोड़कर आने पर सहमति जताई। अगले ही दिन हैदराबाद से दिल्ली पहुंच गई, जहां पापा भी पहुंचे थे। एक कोचिंग में दाखिला लिया और एक साल तक वहां रहकर तैयारी की। फिर कोरोना काल में घर पर ही सेल्फ स्टडी की, जिसके बाद सफलता मिली। यह कहना है कैथल के सेक्टर-19 निवासी संध्या प्रताप गोयल का, जिसने बीते रोज आए यूपीएससी के परीक्षा परिणाम में 142वीं रैंक हासिल की है।
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अमर उजाला से बातचीत में संध्या ने बताया कि बचपन से ही उसका आईएएस बनने का सपना था। माता-पिता अध्यापक थे तो मार्गदर्शन मिलता रहा। कुरुक्षेत्र एनआईटी से बीटेक करने के बाद हैदराबाद में एक अच्छी कंपनी में जॉब लग गई, जहां ज्वाइन करने के बाद दो साल तक कार्य किया। इस दौरान आईएएस बनने के सपने को कमजोर नहीं होने दिया और तैयारी जारी रखी। लेकिन जॉब के साथ पुख्ता तैयारी संभव नहीं लग रही थी, इसलिए एक दिन पापा को फोन कर नौकरी छोड़ यूपीएससी की तैयारी करने की इच्छा जताई और अनुमति मिलने के बाद तैयारी के लिए अगले ही दिन दिल्ली पहुंच गई। विदित हो कि संध्या के पिता रामप्रताप गोयल मिडिल स्कूल में मुख्य अध्यापक हैं। वहीं मां लवलीन कौर सीवन के कन्या स्कूल में पढ़ाती हैं। उसका एक भाई वैदिक है, जिसने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग पास की है।
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मां ने घर के काम से दूर रखा और पिता ने हौसला बढ़ाया
संध्या की मां लवलीन कौर का कहना है कि संध्या बचपन से ही प्रतिभावान है। यही कारण है कि उसे रसोई और अन्य घर के कामों से दूर रखा। वहीं संध्या के पापा भी कहते थे कि इसे रसोई नहीं प्रशासन संभालना है।
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संध्या के पिता रामप्रताप ने कहा कि अभिभावक के तौर पर उनका हमेशा यही संदेश रहा है कि यदि असफलता मिले तो अगली बार यह सोच कर प्रयास करो कि पहला ही प्रयास है। उन्होंने आईएएस दीपशिखा के पिता भीम से मिलकर भी बेटी का हौसला बढ़ाया।

सिर्फ स्टडी मैटेरियल के लिए फोन का किया इस्तेमाल
यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल करने वाली संध्या का कहना है कि तैयारी के दौरान वह सोशल मीडिया से दूर रही, सिर्फ स्टडी मैटेरियल के लिए फोन का इस्तेमाल किया। उसने बताया कि कठिन परिश्रम के बाद तीसरे प्रयास में उसे सफलता मिली है। इसमें उसके माता-पिता के अलावा अध्यापिका सीता व कॉलेज के प्रोफेसर वर्ग का मार्गदर्शन अहम रहा है।
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