कैथल में वक्फ बोर्ड की जमीन विवाद: ग्रामीणों ने दी चेतावनी, पंचायत का फैसला- कब्रिस्तान निर्माण पर रोक
कैथल में वक्फ बोर्ड की को लेकर विवाद छीड़ा हुआ है। दो एकड़ जमीन पर कब्रिस्तान है, जिसमें चार दीवारी का निर्माण हो रहा है। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध जताया ।
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हरियाणा के कैथल के खंड सीवन के गांव मलिकपुर में वक्फ बोर्ड की दो एकड़ जमीन को लेकर बुधवार को तनाव की स्थिति बन गई। गांव मलिकपुर में खुराना रोड पर खेल स्टेडियम के पास स्थित इस जमीन पर मुस्लिम समाज के लोगों ने अपना कब्रिस्तान बनाया हुआ है। अब इस कब्रिस्तान की चारदीवारी निकालने का कार्य शुरू किया जाना था, जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह विवादित जमीन 1984 से पहले ग्राम पंचायत के नाम थी, लेकिन बाद में यह वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज हो गई। यह जमीन किस प्रक्रिया के तहत वक्फ बोर्ड के पास चली गई, इसकी जानकारी आज तक किसी को नहीं मिल पाई है। इस मुद्दे को लेकर गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में रखा, क्योंकि यह मामला कोर्ट में है तो सभी की नजरें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो इस विवादित जमीन के भविष्य का फैसला करेगा। विवाद की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।
गुहला डीएसपी कुलदीप सिंह और सीवन एसएचओ कुलदीप देशवाल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का मुआयना किया और ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके अलावा, जिला प्रशासन की ओर से गुहला एसडीएम कैप्टन प्रमेश सिंह और सीवन बीडीपीओ नेहा शर्मा भी मौके पर मौजूद रहीं।
कोर्ट में है मामला
इस समय यह मामला अदालत में मामला विचाराधीन है। ग्रामीणों ने इस जमीन को दोबारा ग्राम पंचायत में लाने के लिए अंबाला वक्फ बोर्ड टर्मिनल कोर्ट में केस भी दायर किया हुआ है, जो अभी विचाराधीन है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता, तब तक इस जमीन पर कोई निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि वे कोर्ट के फैसले का सम्मान करेंगे, लेकिन जब तक मामला अदालत में विचाराधीन है, तब तक इस जमीन पर कोई गतिविधि नहीं होने दी जाएगी। गांव की सरपंच परमजीत कौर के पति तरसेम सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर जिला प्रशासन को ग्राम पंचायत का लिखित प्रस्ताव भी दिया हुआ है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता, तब तक कब्रिस्तान की चारदीवारी न निकाली जाए। उन्होंने कहा कि यदि चारदीवारी निकाली जाती है, तो इससे गांव में सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो सकता है।
पंचायत में लिया फैसला कोई निर्माण नहीं होने दिया जाएगा
ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर पंचायत बुलाई, जिसमें सैंकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। पंचायत में गांव के पूर्व सरपंच मेजर सिंह, साहब सिंह, बच राम, संजू ठेकेदार, वकील सिंह, राजेश कुमार, रामकुमार, भरत सिंह, बलवीर सिंह, मनोज कुमार, सतीश सिंह, मलकिंदर, ईश्वर सिंह, जैसा, राजेश और राजेन्द्र शर्मा सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। पंचायत में सभी ने एकमत होकर फैसला किया कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता, तब तक कब्रिस्तान में कोई निर्माण नहीं होने दिया जाएगा।
प्रशासन ने दिया आश्वासन, कोर्ट के फैसले तक नहीं होगा निर्माण
पंचायत के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जब तक कोर्ट से इस मामले में कोई फैसला नहीं आता। तब तक कब्रिस्तान की चारदीवारी का कार्य नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने ग्रमीणों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए ही कोई निर्णय लिया जाएगा।