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Kaithal News: मतदान है लोकतंत्र की रीढ़, इसलिए रहें जागरूक
Thu, 25 Jan 2024 04:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 25 Jan 2024 04:02 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। 25 जनवरी वीरवार को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाएगा। इस दिवस को मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने और 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवक व युवतियों को नए मत बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। हमारे देश का लोकतंत्र के महत्व को पूरी दुनिया में सराहा जाता है।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर कुछ बुजुर्गाें से बातचीत की गई। इसमें बुजुर्गाें का कहना है कि मतदान लोकतंत्र के लिए रीढ़ है इसलिए हमें हमेशा मतदान के लिए जागरूक रहना चाहिए। मतदान से से ही हम अपने देश में जनप्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। इसमें नौ बार मतदान कर चुके 75 वर्षीय सुरेश व 71 वर्षीय राजकुमार वधवा ने मतदान को लेकर अपने अनुभव साझा किए।
1977 में पहला मतदान ः सीवन निवासी 75 वर्षीय सुरेश मेहता ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में वर्ष 1977 में पहली मतदान किया था। उस समय उनके हल्का गुहला-चीका क्षेत्र में पहली बाद विधानसभा का चुनाव हुआ था। क्योंकि इसी वर्ष गुहला-चीका को कैथल विधानसभा क्षेत्र से अलग कर आरक्षित विधानसभा क्षेत्र बनाया गया था।
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मेहता ने बताया कि उस समय लोग मतदान को लेकर लोगों में इतनी अधिक जागरूकता नहीं थी, लेकिन अब लोग लगातार जागरूक हुए हैं। अब मतदान को लेकर लोगों में काफी रुचि भी रहती है, लेकिन वर्ष 2000 से पहले मतदान करने के लिए चुनाव के समय ही जागरूकता कार्यक्रम चलते थे। बताया कि उन्होंने देश में आपातकालीन स्थिति के बाद हुए चुनाव में मतदान किया, हालांकि उस समय लोगों में बेहद जागरूकता मतदान को लेकर आई थी।
बैलेट पेपर पर चुनाव होने से झगड़े की बनती थी स्थिति ः 71 वर्षीय राजकुमार वधवा ने बताया कि वह भी अपने जीवन में नौ बार मतदान कर चुके हैं। वधवा ने कहा कि पहले बैलेट पेपर में चुनाव होता था तो चुनाव के समय झगड़ा और विवाद होने की काफी स्थिति बनती थी। परंतु अब ईवीएम से मतदान होने के बाद लोगों में जागरूकता बढ़ी है। वधवा ने बताया कि उन्होंने वे समय देखा है कि जब बैलेट पेपर के समय में अधिक फर्जी मतदान होता था। अब ऐसा नहीं है। फर्जी मतदान होने की कोई संभावना इस समय नहीं है। यह काफी सराहनीय है।
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कैथल। 25 जनवरी वीरवार को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाएगा। इस दिवस को मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने और 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवक व युवतियों को नए मत बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। हमारे देश का लोकतंत्र के महत्व को पूरी दुनिया में सराहा जाता है।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर कुछ बुजुर्गाें से बातचीत की गई। इसमें बुजुर्गाें का कहना है कि मतदान लोकतंत्र के लिए रीढ़ है इसलिए हमें हमेशा मतदान के लिए जागरूक रहना चाहिए। मतदान से से ही हम अपने देश में जनप्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। इसमें नौ बार मतदान कर चुके 75 वर्षीय सुरेश व 71 वर्षीय राजकुमार वधवा ने मतदान को लेकर अपने अनुभव साझा किए।
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1977 में पहला मतदान ः सीवन निवासी 75 वर्षीय सुरेश मेहता ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में वर्ष 1977 में पहली मतदान किया था। उस समय उनके हल्का गुहला-चीका क्षेत्र में पहली बाद विधानसभा का चुनाव हुआ था। क्योंकि इसी वर्ष गुहला-चीका को कैथल विधानसभा क्षेत्र से अलग कर आरक्षित विधानसभा क्षेत्र बनाया गया था।
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मेहता ने बताया कि उस समय लोग मतदान को लेकर लोगों में इतनी अधिक जागरूकता नहीं थी, लेकिन अब लोग लगातार जागरूक हुए हैं। अब मतदान को लेकर लोगों में काफी रुचि भी रहती है, लेकिन वर्ष 2000 से पहले मतदान करने के लिए चुनाव के समय ही जागरूकता कार्यक्रम चलते थे। बताया कि उन्होंने देश में आपातकालीन स्थिति के बाद हुए चुनाव में मतदान किया, हालांकि उस समय लोगों में बेहद जागरूकता मतदान को लेकर आई थी।
बैलेट पेपर पर चुनाव होने से झगड़े की बनती थी स्थिति ः 71 वर्षीय राजकुमार वधवा ने बताया कि वह भी अपने जीवन में नौ बार मतदान कर चुके हैं। वधवा ने कहा कि पहले बैलेट पेपर में चुनाव होता था तो चुनाव के समय झगड़ा और विवाद होने की काफी स्थिति बनती थी। परंतु अब ईवीएम से मतदान होने के बाद लोगों में जागरूकता बढ़ी है। वधवा ने बताया कि उन्होंने वे समय देखा है कि जब बैलेट पेपर के समय में अधिक फर्जी मतदान होता था। अब ऐसा नहीं है। फर्जी मतदान होने की कोई संभावना इस समय नहीं है। यह काफी सराहनीय है।