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Kaithal News: खुराना रोड डंपिंग यार्ड हटाने की मांग पर ग्रामीणों का धरना 17वें दिन भी जारी
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कैथल। खुराना रोड स्थित प्रस्तावित डंपिंग यार्ड को हटाने की मांग के लिए ग्रामीणों का धरना शनिवार को 17वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर प्रशासन कोई ठोस निर्णय नहीं लेता, तब तक धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। ग्रामीण सोमवार को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर डंपिंग यार्ड को दूसरी जगह ले जाने की मांग करेंगे।
धरने का नेतृत्व कर रहे दयाल मलिक खुराना ने बताया कि 12 जून से कालू वाली गामड़ी, डेरा गदला, सेक्टर-21, वार्ड-5, खुराना, कुलतारण, पट्टी अफगान, जगदीशपुरा और डोहर सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण लगातार धरने पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि इतने दिनों के आंदोलन के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई जिससे लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि डंपिंग यार्ड गलत तरीके से संचालित किया जा रहा है जिससे क्षेत्र में प्रदूषण फैलने की आशंका है। इसके कारण आसपास के गांवों के लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि प्रशासन उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रहा।
ग्रामीणों ने कहा कि डंपिग यार्ड संचालकों के पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल विभाग और संबंधित ग्राम पंचायतों की आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद डंपिंग यार्ड संचालित करने की कोशिश की जा रही है, जो नियमों और पर्यावरणीय मानकों के विपरीत है। धरने पर बैठे ग्रामीणों और किसानों ने मांग की है कि डंपिंग यार्ड को ऐसी जगह स्थानांतरित किया जाए, जहां सभी कानूनी औपचारिकताओं और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित हो। उनका कहना है कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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धरने का नेतृत्व कर रहे दयाल मलिक खुराना ने बताया कि 12 जून से कालू वाली गामड़ी, डेरा गदला, सेक्टर-21, वार्ड-5, खुराना, कुलतारण, पट्टी अफगान, जगदीशपुरा और डोहर सहित आसपास के गांवों के ग्रामीण लगातार धरने पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि इतने दिनों के आंदोलन के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई जिससे लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि डंपिंग यार्ड गलत तरीके से संचालित किया जा रहा है जिससे क्षेत्र में प्रदूषण फैलने की आशंका है। इसके कारण आसपास के गांवों के लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि प्रशासन उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रहा।
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ग्रामीणों ने कहा कि डंपिग यार्ड संचालकों के पास प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल विभाग और संबंधित ग्राम पंचायतों की आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद डंपिंग यार्ड संचालित करने की कोशिश की जा रही है, जो नियमों और पर्यावरणीय मानकों के विपरीत है। धरने पर बैठे ग्रामीणों और किसानों ने मांग की है कि डंपिंग यार्ड को ऐसी जगह स्थानांतरित किया जाए, जहां सभी कानूनी औपचारिकताओं और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित हो। उनका कहना है कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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