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कैलरम के ग्रामीणों ने किया बायो गैस प्लांट लगाने का विरोध
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Villagers of Calram protest against setting up of biogas plant
- फोटो : Kaithal
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गांव कैलरम में गांव की 15 एकड़ जमीन पर लगने वाले बायोगैस प्लांट का ग्रामीणों और किसानों ने विरोध शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने इसे किसी भी सूरत में गांव में नहीं लगने देने की बात कही है। प्लांट लगाने के विरोध में वीरवार को ग्रामीणों ने लघु सचिवालय में प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। भारी संख्या में ग्रामीण और किसान भाकियू के जिला प्रधान होशियार सिंह गिल की अध्यक्षता में लघु सचिवालय में पहुंचे और प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों ने प्रदर्शन के बाद डीसी को सरकार के नाम ज्ञापन देने की योजना बनाई थी। कष्ट निवारण समिति की बैठक होने के कारण डीसी उनके कार्यालय में नहीं मिले तो किसान समिति की बैठक में पहुंचे और अधिकारियों को अपनी मांगों बारे अवगत करवाया। साथ ही मौके पर मौजूद बिजली निगम के एसई से नया बिजली कनेक्शन लेने के लिए फव्वारा व्यवस्था की अनिवार्यता को समाप्त करवाने की मांग भी की। ग्रामीणों की मांग सरकार तक पहुंचाने के आश्वासन कि बाद किसान बाहर आ गए। उन्होंने एसडीएम कैथल को भी अपना मांगपत्र सौंपा।
ग्रामीण राजू, सतबीर, दिलबाग, सुरेश, जगदीश, बीरबल बलिंद्र, बलवंत, राममेहर व जोगीराम ने कहा कि गांव में करीब 83 करोड़ रुपये की लागत से बायोगैस प्लांट लगाया जाना है। इस संबंध में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी ने गांव के लोगों से जमीन को लेकर बैठक भी की थी। उस समय भी ग्रामीणों ने प्लांट का विरोध किया था। विरोध का कारण यह था कि प्लांट किसी निजी कंपनी द्वारा लगाया जाना है। इसे ग्रामीण किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे। साथ ही ग्रामीणों ने यह भी कहा था कि गांव के लोगों को प्लांट के फायदे और नुकसान बताने जरूरी थे और उनसे सहमति भी लेना चाहिए थी। ग्रामीणों के विरोध के बावजूद अधिकारियों द्वारा राजनीतिक दबाव के चलते ऐसा किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि निजी कंपनी का प्लांट लगाकर सरकार उनकी जमीन का निजीकरण करने के प्रयास में है, जो ग्रामीणों को कतई बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि किसी निजी कंपनी का प्लांट गांव में न लगाया जाए।
एसडीएम कैथल संजय कुमार ने ग्रामीणों की मांग को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसान व ग्रामीण प्रदर्शन समाप्त कर वापस लौट गए।
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ग्रामीणों ने प्रदर्शन के बाद डीसी को सरकार के नाम ज्ञापन देने की योजना बनाई थी। कष्ट निवारण समिति की बैठक होने के कारण डीसी उनके कार्यालय में नहीं मिले तो किसान समिति की बैठक में पहुंचे और अधिकारियों को अपनी मांगों बारे अवगत करवाया। साथ ही मौके पर मौजूद बिजली निगम के एसई से नया बिजली कनेक्शन लेने के लिए फव्वारा व्यवस्था की अनिवार्यता को समाप्त करवाने की मांग भी की। ग्रामीणों की मांग सरकार तक पहुंचाने के आश्वासन कि बाद किसान बाहर आ गए। उन्होंने एसडीएम कैथल को भी अपना मांगपत्र सौंपा।
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ग्रामीण राजू, सतबीर, दिलबाग, सुरेश, जगदीश, बीरबल बलिंद्र, बलवंत, राममेहर व जोगीराम ने कहा कि गांव में करीब 83 करोड़ रुपये की लागत से बायोगैस प्लांट लगाया जाना है। इस संबंध में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी ने गांव के लोगों से जमीन को लेकर बैठक भी की थी। उस समय भी ग्रामीणों ने प्लांट का विरोध किया था। विरोध का कारण यह था कि प्लांट किसी निजी कंपनी द्वारा लगाया जाना है। इसे ग्रामीण किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे। साथ ही ग्रामीणों ने यह भी कहा था कि गांव के लोगों को प्लांट के फायदे और नुकसान बताने जरूरी थे और उनसे सहमति भी लेना चाहिए थी। ग्रामीणों के विरोध के बावजूद अधिकारियों द्वारा राजनीतिक दबाव के चलते ऐसा किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि निजी कंपनी का प्लांट लगाकर सरकार उनकी जमीन का निजीकरण करने के प्रयास में है, जो ग्रामीणों को कतई बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि किसी निजी कंपनी का प्लांट गांव में न लगाया जाए।
एसडीएम कैथल संजय कुमार ने ग्रामीणों की मांग को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसान व ग्रामीण प्रदर्शन समाप्त कर वापस लौट गए।