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Kaithal News: ग्रामीणों ने पिता-पुत्र पर लगाया गड़बड़ी करने का आरोप
Sun, 14 Sep 2025 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 14 Sep 2025 12:55 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। पावर ग्रिड योजना के नाम पर ई-भूमि पोर्टल पर किसानों की जमीन बेचने के लिए फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे लगाने का मामला अब उजागर हुआ है। शनिवार को आयोजित किसानों की बैठक में सुभाष नामक ग्रामीण ने आरोप लगाते हुए कहा कि घर-घर जाकर कागजी कार्रवाई करने की बजाय एक पिता-पुत्र ने पोर्टल पर फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने बताया कि इसमें बनावटी हस्ताक्षर किए गए और एक ही हाथ की अलग-अलग अंगुलियों से अंगूठों के नकली निशान बनाकर रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई।
किसानों ने इसे बड़ी धोखाधड़ी करार देते हुए प्रदेश मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से कार्रवाई की मांग करने का निर्णय लिया। राम सिंह राणा, क्रिकेटर राहुल राणा, राजेश राणा, प्रदीप कुमार, जसबीर सिंह, विनोद कुमार, प्रवेश, तरसेम सिंह और रामदिया पुरी सहित अन्य किसानों ने शनिवार को आयोजित बैठक में यह रणनीति बनाई।
किसानों ने कहा कि उनकी जमीन उनकी निजी संपत्ति है। सरकार ने इस प्रकार की संपत्ति को सुरक्षा देने और डिजिटल रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने के लिए ई-भूमि पोर्टल जैसी व्यवस्था की है, ताकि खरीद-फरोख्त के बहाने होने वाली गड़बड़झालों को रोका जा सके। लेकिन कुछ लोग निजी लाभ के लिए इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं और किसानों की जमीनों को बिना उनकी अनुमति पोर्टल पर बेचने के लिए पेश कर रहे हैं। किसानों के हाथ अब ऐसे साक्ष्य लग गए हैं, जिससे फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे लगाने वालों के चेहरे सामने आए हैं। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ तुरंत मामला दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए मुख्यमंत्री से मिलने का फैसला किया है। साथ ही न्यायालय में जमीन की पैरवी भी की जाएगी।
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नाराज किसानों ने बताया कि जब उन्होंने अपने जमीन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की तो हैरानी हुई कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना पोर्टल पर उनके हस्ताक्षर और अंगूठे अपलोड किए गए। कई किसानों ने आरोप लगाया कि जिन जमीनों पर वे वर्षों से खेती कर रहे हैं, उन्हें पावर ग्रिड प्रोजेक्ट के नाम पर ट्रांसफर करने की साजिश रची गई, जबकि उन्होंने ऐसा कोई दस्तावेज़ कभी साइन नहीं किया।
किसानों ने यह भी कहा कि यह केवल कुछ लोगों की नहीं, बल्कि पूरे इलाके की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे और तहसील, जिला मुख्यालय से लेकर चंडीगढ़ तक अपनी आवाज बुलंद करेंगे। इस पूरे प्रकरण ने प्रशासन की कार्यशैली और भूमि पोर्टल की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूर्व राज्य मंत्री ने किसानों को दिया आश्वासन
किसानों का प्रतिनिधिमंडल कलायत में पूर्व राज्य मंत्री कमलेश ढांडा से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपा। किसानों ने कहा कि उनके पास इस घोटाले के ठोस सबूत हैं। पूर्व राज्य मंत्री ने किसानों को उनके हकों की पैरवी करने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
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कलायत। पावर ग्रिड योजना के नाम पर ई-भूमि पोर्टल पर किसानों की जमीन बेचने के लिए फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे लगाने का मामला अब उजागर हुआ है। शनिवार को आयोजित किसानों की बैठक में सुभाष नामक ग्रामीण ने आरोप लगाते हुए कहा कि घर-घर जाकर कागजी कार्रवाई करने की बजाय एक पिता-पुत्र ने पोर्टल पर फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने बताया कि इसमें बनावटी हस्ताक्षर किए गए और एक ही हाथ की अलग-अलग अंगुलियों से अंगूठों के नकली निशान बनाकर रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई।
किसानों ने इसे बड़ी धोखाधड़ी करार देते हुए प्रदेश मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से कार्रवाई की मांग करने का निर्णय लिया। राम सिंह राणा, क्रिकेटर राहुल राणा, राजेश राणा, प्रदीप कुमार, जसबीर सिंह, विनोद कुमार, प्रवेश, तरसेम सिंह और रामदिया पुरी सहित अन्य किसानों ने शनिवार को आयोजित बैठक में यह रणनीति बनाई।
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किसानों ने कहा कि उनकी जमीन उनकी निजी संपत्ति है। सरकार ने इस प्रकार की संपत्ति को सुरक्षा देने और डिजिटल रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने के लिए ई-भूमि पोर्टल जैसी व्यवस्था की है, ताकि खरीद-फरोख्त के बहाने होने वाली गड़बड़झालों को रोका जा सके। लेकिन कुछ लोग निजी लाभ के लिए इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं और किसानों की जमीनों को बिना उनकी अनुमति पोर्टल पर बेचने के लिए पेश कर रहे हैं। किसानों के हाथ अब ऐसे साक्ष्य लग गए हैं, जिससे फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे लगाने वालों के चेहरे सामने आए हैं। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ तुरंत मामला दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए मुख्यमंत्री से मिलने का फैसला किया है। साथ ही न्यायालय में जमीन की पैरवी भी की जाएगी।
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नाराज किसानों ने बताया कि जब उन्होंने अपने जमीन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की तो हैरानी हुई कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना पोर्टल पर उनके हस्ताक्षर और अंगूठे अपलोड किए गए। कई किसानों ने आरोप लगाया कि जिन जमीनों पर वे वर्षों से खेती कर रहे हैं, उन्हें पावर ग्रिड प्रोजेक्ट के नाम पर ट्रांसफर करने की साजिश रची गई, जबकि उन्होंने ऐसा कोई दस्तावेज़ कभी साइन नहीं किया।
किसानों ने यह भी कहा कि यह केवल कुछ लोगों की नहीं, बल्कि पूरे इलाके की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे और तहसील, जिला मुख्यालय से लेकर चंडीगढ़ तक अपनी आवाज बुलंद करेंगे। इस पूरे प्रकरण ने प्रशासन की कार्यशैली और भूमि पोर्टल की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूर्व राज्य मंत्री ने किसानों को दिया आश्वासन
किसानों का प्रतिनिधिमंडल कलायत में पूर्व राज्य मंत्री कमलेश ढांडा से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपा। किसानों ने कहा कि उनके पास इस घोटाले के ठोस सबूत हैं। पूर्व राज्य मंत्री ने किसानों को उनके हकों की पैरवी करने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया।