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श्रीराम का वन गमन देख भावुक हुए दर्शक
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09-सीवन। जय मां बाहरवाली ड्रामाटिक क्लब द्वारा आयोजित रामलीला में राम वनवास में पंचवटी का दृश्य।
- फोटो : Kaithal
सीवन। बाहर वाली माता मंदिर परिसर में मां बाहर वाली ड्रामाटिक रंगमंच क्लब के रामलीला मंचन में राम वनगमन का मंचन किया गया। राम वन को गए तो विलाप में भरत को व्याकुल दिखाया गया। इस बीच पुत्र श्रीराम के मोह में राजा दशरथ ने प्राण त्याग दिए। वन भ्रमण के दौरान लक्ष्मण पर शूर्पणखा मोहित हो विवाह के लिए प्रस्ताव रखने पर उसकी नाक काटने का मंचन कलाकारों ने किया। इससे पूर्व आरती के साथ मंचन की शुरुआत की गई।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि कृष्णा देवी, परमजीत कौर व केलो देवी ने रिबन काटकर मंचन की शुरुआत की। मंच संचालन बंटी सैनी ने किया। मंचन के क्रम में राम के वनवास के वियोग में राजा दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। यह सूचना भेजकर भरत और शत्रुघ्न को ननिहाल से बुलाया जाता है। भरत अयोध्या आते हैं और जब उन्हें राम के वन जाने और पिताजी के देहावसान की जानकारी मिलती है तो वह द्रवित हो जाते हैं।
नाराज होकर माता कैकई को अभिशाप देते हैं कि भविष्य में इस पृथ्वी पर कोई भी माता अपनी पुत्री का नाम कैकई नहीं रखेगा। दासी मंथरा को लात से मारकर महल से बाहर निकाल लेते हैं। वे अपने नगर वासियों को लेकर राम को मनाने जंगल की ओर चल पड़ते हैं। जैसे ही राम और भरत का मिलाप होता है दोनों भाई गले लिपट कर विलाप करते हैं और वे व्याकुल हो उठते हैं। यह देखकर दर्शकों की आंखें भी नम गई।
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तब भगवान राम ने भारत को अपना खड़ाऊ देकर अयोध्या का शासन चलाने का आदेश दिया। उधर, अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ पंचवटी में निवास करते हैं। वहां शूर्पणखा पहुंचकर दोनों भाइयों से शादी का प्रस्ताव रखती है। जब दोनों भाई मना कर देते हैं तो वह अपने विकराल रूप को धारण कर दौड़ पड़ती है। यह देखकर लक्ष्मण उसकी नाक और कान काट देते हैं। इसके बाद रामलीला का मंचन समाप्त होता है।
सुनील सैनी ने राम, सुनील ने लक्ष्मण, काटो सैनी ने सीता, बिट्टू सैनी ने भरत, अमन सैनी ने शत्रुघन, राहुल सैनी ने शूर्पणखा का किरदार निभाया। इस मौके पर देशराज सैनी, फुल, आजाद सुरेश सैनी, संजीव, विनोद बहल, राजीव, वीरभान, अमित सैनी, सुरेश सैनी, सुनील, शिवलाल, रामप्रकाश, भान, नरेश, अमन सैनी, बिट्टू सैनी, सुमित भारती, मुकेश वाल्मीकि, सन्नी, पवन, पाला, रवि, ऋषि व सतीश मौजूद रहे।
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कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि कृष्णा देवी, परमजीत कौर व केलो देवी ने रिबन काटकर मंचन की शुरुआत की। मंच संचालन बंटी सैनी ने किया। मंचन के क्रम में राम के वनवास के वियोग में राजा दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। यह सूचना भेजकर भरत और शत्रुघ्न को ननिहाल से बुलाया जाता है। भरत अयोध्या आते हैं और जब उन्हें राम के वन जाने और पिताजी के देहावसान की जानकारी मिलती है तो वह द्रवित हो जाते हैं।
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नाराज होकर माता कैकई को अभिशाप देते हैं कि भविष्य में इस पृथ्वी पर कोई भी माता अपनी पुत्री का नाम कैकई नहीं रखेगा। दासी मंथरा को लात से मारकर महल से बाहर निकाल लेते हैं। वे अपने नगर वासियों को लेकर राम को मनाने जंगल की ओर चल पड़ते हैं। जैसे ही राम और भरत का मिलाप होता है दोनों भाई गले लिपट कर विलाप करते हैं और वे व्याकुल हो उठते हैं। यह देखकर दर्शकों की आंखें भी नम गई।
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तब भगवान राम ने भारत को अपना खड़ाऊ देकर अयोध्या का शासन चलाने का आदेश दिया। उधर, अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ पंचवटी में निवास करते हैं। वहां शूर्पणखा पहुंचकर दोनों भाइयों से शादी का प्रस्ताव रखती है। जब दोनों भाई मना कर देते हैं तो वह अपने विकराल रूप को धारण कर दौड़ पड़ती है। यह देखकर लक्ष्मण उसकी नाक और कान काट देते हैं। इसके बाद रामलीला का मंचन समाप्त होता है।
सुनील सैनी ने राम, सुनील ने लक्ष्मण, काटो सैनी ने सीता, बिट्टू सैनी ने भरत, अमन सैनी ने शत्रुघन, राहुल सैनी ने शूर्पणखा का किरदार निभाया। इस मौके पर देशराज सैनी, फुल, आजाद सुरेश सैनी, संजीव, विनोद बहल, राजीव, वीरभान, अमित सैनी, सुरेश सैनी, सुनील, शिवलाल, रामप्रकाश, भान, नरेश, अमन सैनी, बिट्टू सैनी, सुमित भारती, मुकेश वाल्मीकि, सन्नी, पवन, पाला, रवि, ऋषि व सतीश मौजूद रहे।