{"_id":"688bbe53e8e10dd0e9049f5c","slug":"v-kaithal-news-c-18-1-knl1004-705285-2025-08-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: समय के साथ बदल रहे हैं रक्षाबंधन के मायने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: समय के साथ बदल रहे हैं रक्षाबंधन के मायने
Fri, 01 Aug 2025 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 01 Aug 2025 12:34 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
कैथल। रक्षाबंधन, जिसे भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के प्रतीक पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस बार रक्षाबंधन नौ अगस्त को मनाया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य श्याम सुंदर गौड़ के अनुसार, यह पर्व केवल एक धागा बांधने का कर्मकांड नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की आत्मिक गहराई और परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह परंपरा केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राचीन कथाओं में भी उल्लेख मिलता है। महाभारत काल में जब श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लगी थी, तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। इस ‘’रक्षा सूत्र’’ के बदले श्रीकृष्ण ने चीरहरण के समय द्रौपदी की लाज बचाई थी। संवाद
ज्योतिषाचार्य श्याम सुंदर गौड़ के अनुसार, यह पर्व केवल एक धागा बांधने का कर्मकांड नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की आत्मिक गहराई और परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह परंपरा केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राचीन कथाओं में भी उल्लेख मिलता है। महाभारत काल में जब श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लगी थी, तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। इस ‘’रक्षा सूत्र’’ के बदले श्रीकृष्ण ने चीरहरण के समय द्रौपदी की लाज बचाई थी। संवाद