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गांव मूंदड़ी में ही बनेगा विश्वविद्यालय
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गांव मूंदड़ी में बनने वाले महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए गांव जटहेड़ी में जमीन मिलने के बाद विवाद को लेकर विधायक लीला राम ने रविवार को गांव के लोगों की वीसी के साथ बैठक करवाई। जिसमें स्पष्ट किया गया कि विश्वविद्यालय का मूल गांव मूंदड़ी रहेगा और विश्वविद्यालय गांव में ही बनेगा। गांव मूंदड़ी के लोग विश्वविद्यालय के लिए और जमीन देने को तैयार हैं।
गांव वासी महेंद्र सिंह व अन्य ने बताया कि उन्होंने विधायक से मांग की थी कि गांव जटहेड़ी में विश्वविद्यालय के लिए 53 एकड़ जमीन जिस रेट पर खरीदी जा रही है। उसी अनुसार मूंदड़ी में ही गांव के लोग जमीन देने को तैयार हैं। लेकिन परिसर किसी दूसरे गांव में शिफ्ट नहीं होना चाहिए। उनकी मांग पर विधायक ने लोक निर्माण विभाग विश्रामगृह में बैठक बुलाई। जिसमें वीसी डा. श्रेयांश द्विवेदी भी शामिल हुए। इस बैठक में वीसी ने कहा है कि विश्वविद्यालय मूंदड़ी में ही बनेगा। जमीन चाहे जितनी मिल जाए। लेकिन मुख्य परिसर व कक्षाएं लगाए जाने का काम गांव में ही होगा। विधायक ने खुद वीसी को आश्वासत किया कि यदि जमीन चाहिए तो गांव मूंदड़ी में और दिलवाई जाएगी। लेकिन पूरा परिसर गांव में ही बनना चाहिए। बैठक में दयौरा से सरपंच, बरोट सरपंच नर सिंह, खेड़ी सांपली से गुरमेल, क्योड़क सूरज गुर्जर भी पहुंचे।
विधायक लीला राम ने कहा कि विश्वविद्यालय गांव मूंदड़ी में ही बनेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री से बात हुई है। वे पूरी तरह से गांव के लोगों के साथ हैं। गांव मूंदड़ी जमीन देने को तैयार हैं। इसीलिए बाहर परिसर बनाए जाने का सवाल ही नहीं उठता।
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वीसी श्रेयांश द्विवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय मूंदड़ी में बनना ही है। विश्वविद्यालय के लिए 20 एकड़ कम है। अब गांव जटहेड़ी में 53 एकड़ मिल गई है। फिर आगे और ले लेंगे। गांव वासी महेंद्र व एक-दो व्यक्ति आए थे, उन्हें कह दिया गया है कि विश्वविद्यालय मूंदड़ी में ही बनेगी। सरकार से 53 एकड़ जमीन मिली है। इसका प्रयोग कृषि के लिए हो या किसी अन्य कार्य के लिए, यह बाद में तय किया जाएगा। मूलत: विश्वविद्यालय तो मूंदड़ी में ही बनेगी।
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गांव वासी महेंद्र सिंह व अन्य ने बताया कि उन्होंने विधायक से मांग की थी कि गांव जटहेड़ी में विश्वविद्यालय के लिए 53 एकड़ जमीन जिस रेट पर खरीदी जा रही है। उसी अनुसार मूंदड़ी में ही गांव के लोग जमीन देने को तैयार हैं। लेकिन परिसर किसी दूसरे गांव में शिफ्ट नहीं होना चाहिए। उनकी मांग पर विधायक ने लोक निर्माण विभाग विश्रामगृह में बैठक बुलाई। जिसमें वीसी डा. श्रेयांश द्विवेदी भी शामिल हुए। इस बैठक में वीसी ने कहा है कि विश्वविद्यालय मूंदड़ी में ही बनेगा। जमीन चाहे जितनी मिल जाए। लेकिन मुख्य परिसर व कक्षाएं लगाए जाने का काम गांव में ही होगा। विधायक ने खुद वीसी को आश्वासत किया कि यदि जमीन चाहिए तो गांव मूंदड़ी में और दिलवाई जाएगी। लेकिन पूरा परिसर गांव में ही बनना चाहिए। बैठक में दयौरा से सरपंच, बरोट सरपंच नर सिंह, खेड़ी सांपली से गुरमेल, क्योड़क सूरज गुर्जर भी पहुंचे।
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विधायक लीला राम ने कहा कि विश्वविद्यालय गांव मूंदड़ी में ही बनेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री से बात हुई है। वे पूरी तरह से गांव के लोगों के साथ हैं। गांव मूंदड़ी जमीन देने को तैयार हैं। इसीलिए बाहर परिसर बनाए जाने का सवाल ही नहीं उठता।
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वीसी श्रेयांश द्विवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय मूंदड़ी में बनना ही है। विश्वविद्यालय के लिए 20 एकड़ कम है। अब गांव जटहेड़ी में 53 एकड़ मिल गई है। फिर आगे और ले लेंगे। गांव वासी महेंद्र व एक-दो व्यक्ति आए थे, उन्हें कह दिया गया है कि विश्वविद्यालय मूंदड़ी में ही बनेगी। सरकार से 53 एकड़ जमीन मिली है। इसका प्रयोग कृषि के लिए हो या किसी अन्य कार्य के लिए, यह बाद में तय किया जाएगा। मूलत: विश्वविद्यालय तो मूंदड़ी में ही बनेगी।