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Kaithal News: राइस मिल के प्रदूषण विवाद में दो विभाग आमने-सामने
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। गुहला क्षेत्र में राइस मिलों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण और जमीनी पानी को जहरीला बनाने के मामले में अब सरकार के दो विभाग आमने-सामने आ गए हैं। जिला नगर एवं ग्राम आयोजना अधिकारी प्रवीण कुमार ने स्पष्ट कहा कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने नियमों को दरकिनार कर राइस मिलों को संचालन की अनुमति (कंसेंट टू ऑपरेट) दे दी, जबकि उनके विभाग ने ऐसी इकाइयों को भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की स्वीकृति नहीं दी।
नगर आयोजन अधिकारी ने कहा कि जिन इकाइयों को प्रदूषण विभाग ने संचालन की अनुमति दी है, उन पर उनके विभाग ने कानून के तहत कार्रवाई भी की है। उन्होंने कहा कि सीएलयू के बिना कोई औद्योगिक गतिविधि पूरी तरह गैरकानूनी है। इसके बावजूद अनुमति दी जाना गंभीर प्रशासनिक त्रुटि है।
प्रवीण कुमार के इस बयान ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी उठता है कि बिना जांच किए एनओसी जारी करना लापरवाही थी या इसके पीछे कोई और कारण था।
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दूसरी ओर पर्यावरण विशेषज्ञों का इस मामले में कहना है कि यदि एक विभाग किसी इकाई को अवैध मानते हुए उसे तोड़ रहा है और दूसरा विभाग उसी इकाई को संचालन की अनुमति दे रहा है, तो ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
कुछ राइस मिल ऐसे है जो कई दशक पहले लगाए गए थे। ऐसे राइस मिलों को तब सीएलयू लेने की आवश्यकता नहीं थी। उस समय लगे यूनिट तब टाउन कंट्री प्लानिंग में था या ग्राम पंचायत में था इसकी जानकारी नहीं है। जिन्हें भी परमिशन दी गई है वह नियमों के तहत ही जारी की गई है। -सतीश कुमार, एसडीओ प्रदूषण विभाग कैथल।
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गुहला-चीका। गुहला क्षेत्र में राइस मिलों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण और जमीनी पानी को जहरीला बनाने के मामले में अब सरकार के दो विभाग आमने-सामने आ गए हैं। जिला नगर एवं ग्राम आयोजना अधिकारी प्रवीण कुमार ने स्पष्ट कहा कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने नियमों को दरकिनार कर राइस मिलों को संचालन की अनुमति (कंसेंट टू ऑपरेट) दे दी, जबकि उनके विभाग ने ऐसी इकाइयों को भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की स्वीकृति नहीं दी।
नगर आयोजन अधिकारी ने कहा कि जिन इकाइयों को प्रदूषण विभाग ने संचालन की अनुमति दी है, उन पर उनके विभाग ने कानून के तहत कार्रवाई भी की है। उन्होंने कहा कि सीएलयू के बिना कोई औद्योगिक गतिविधि पूरी तरह गैरकानूनी है। इसके बावजूद अनुमति दी जाना गंभीर प्रशासनिक त्रुटि है।
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प्रवीण कुमार के इस बयान ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी उठता है कि बिना जांच किए एनओसी जारी करना लापरवाही थी या इसके पीछे कोई और कारण था।
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दूसरी ओर पर्यावरण विशेषज्ञों का इस मामले में कहना है कि यदि एक विभाग किसी इकाई को अवैध मानते हुए उसे तोड़ रहा है और दूसरा विभाग उसी इकाई को संचालन की अनुमति दे रहा है, तो ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
कुछ राइस मिल ऐसे है जो कई दशक पहले लगाए गए थे। ऐसे राइस मिलों को तब सीएलयू लेने की आवश्यकता नहीं थी। उस समय लगे यूनिट तब टाउन कंट्री प्लानिंग में था या ग्राम पंचायत में था इसकी जानकारी नहीं है। जिन्हें भी परमिशन दी गई है वह नियमों के तहत ही जारी की गई है। -सतीश कुमार, एसडीओ प्रदूषण विभाग कैथल।