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Kaithal News: ट्रंप की धमकी रहेगी बेअसर नहीं पड़ेगा प्रभाव ः छाबड़ा
Thu, 11 Dec 2025 02:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 11 Dec 2025 02:15 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। भारतीय चावल, विशेषकर बासमती पर टैरिफ़ बढ़ाने की कथित अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी को निर्यात उद्योग ने महत्वहीन करार दिया है। हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष व प्रमुख चावल निर्यातक अमरजीत छाबड़ा ने स्पष्ट कहा कि इस कदम का भारतीय चावल निर्यात पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय बासमती की वैश्विक पहचान और स्थिर मांग आने वाले समय में भी बरकरार रहेगी। छाबड़ा ने बताया कि भारत हर वर्ष लगभग 60 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल निर्यात करता है। इसमें से करीब 45 लाख मीट्रिक टन मध्य-पूर्व और खाड़ी देशों को भेजा जाता है, जबकि लगभग 15 लाख मीट्रिक टन यूरोप, अफ्रीका और अन्य देशों में जाता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका को सिर्फ 1.5 लाख मीट्रिक टन चावल ही भेजा जाता है, जो कुल निर्यात का मात्र 3 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि इतनी कम मात्रा पर टैरिफ़ वृद्धि भारतीय बाज़ार को प्रभावित नहीं करेगी, बल्कि इसका प्रत्यक्ष भार अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, क्योंकि चावल दैनिक उपभोग का उत्पाद है—विलासिता का नहीं। छाबड़ा ने कहा कि यदि सीधा आयात महंगा होता है तो अमेरिकी बाज़ार में भारतीय बासमती कनाडा या अन्य देशों के माध्यम से पहुँच जाएगा। उन्होंने बताया कि भारतीय बासमती की गुणवत्ता, सुगंध और उसकी वैश्विक ब्रांड वैल्यू ऐसी है कि इसके विकल्प सीमित हैं। इसलिए टैरिफ़ में बढ़ोतरी से नुकसान की संभावना नगण्य है।भारत पर नहीं होगा असर अमेरिका खुद भरेगा कीमत
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अमरजीत छाबड़ा ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की धमकियों से भारतीय चावल निर्यात प्रभावित होने वाला नहीं है। उल्टा, अमेरिका को ही ऐसे ‘टैरिफ़ के तुगलकी फरमान’ का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
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कैथल। भारतीय चावल, विशेषकर बासमती पर टैरिफ़ बढ़ाने की कथित अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी को निर्यात उद्योग ने महत्वहीन करार दिया है। हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष व प्रमुख चावल निर्यातक अमरजीत छाबड़ा ने स्पष्ट कहा कि इस कदम का भारतीय चावल निर्यात पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय बासमती की वैश्विक पहचान और स्थिर मांग आने वाले समय में भी बरकरार रहेगी। छाबड़ा ने बताया कि भारत हर वर्ष लगभग 60 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल निर्यात करता है। इसमें से करीब 45 लाख मीट्रिक टन मध्य-पूर्व और खाड़ी देशों को भेजा जाता है, जबकि लगभग 15 लाख मीट्रिक टन यूरोप, अफ्रीका और अन्य देशों में जाता है।
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उन्होंने कहा कि अमेरिका को सिर्फ 1.5 लाख मीट्रिक टन चावल ही भेजा जाता है, जो कुल निर्यात का मात्र 3 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि इतनी कम मात्रा पर टैरिफ़ वृद्धि भारतीय बाज़ार को प्रभावित नहीं करेगी, बल्कि इसका प्रत्यक्ष भार अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, क्योंकि चावल दैनिक उपभोग का उत्पाद है—विलासिता का नहीं। छाबड़ा ने कहा कि यदि सीधा आयात महंगा होता है तो अमेरिकी बाज़ार में भारतीय बासमती कनाडा या अन्य देशों के माध्यम से पहुँच जाएगा। उन्होंने बताया कि भारतीय बासमती की गुणवत्ता, सुगंध और उसकी वैश्विक ब्रांड वैल्यू ऐसी है कि इसके विकल्प सीमित हैं। इसलिए टैरिफ़ में बढ़ोतरी से नुकसान की संभावना नगण्य है।भारत पर नहीं होगा असर अमेरिका खुद भरेगा कीमत
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अमरजीत छाबड़ा ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की धमकियों से भारतीय चावल निर्यात प्रभावित होने वाला नहीं है। उल्टा, अमेरिका को ही ऐसे ‘टैरिफ़ के तुगलकी फरमान’ का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।