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Kaithal News: आज बांधेंगी बहनें प्रेम, विश्वास व रक्षा की डोर अपने भाइयों की कलाई पर

Sat, 09 Aug 2025 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 09 Aug 2025 01:35 AM IST
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Today sisters will tie the thread of love, trust and protection on the wrists of their brothers
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल/कलायत। श्रावण की पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का महापर्व रक्षाबंधन इस वर्ष शुभ योगों के कारण और भी विशेष बन गया है। शनिवार को रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर प्रेम, विश्वास और सुरक्षा की डोर राखी बांधेंगी और भाइयों से जीवन भर रक्षा का वचन लेंगी।

रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर स्थानीय बाजार में रौनक चरम पर रही। बहनों ने भाइयों के लिए आकर्षक राखियां खरीदीं, जिनमें स्वदेशी राखियों की मांग सर्वाधिक रही। खासतौर पर भाई-भाभी की जोड़ी राखियां आकर्षण का केंद्र बनीं। इनकी कीमतें 100 से 400 रुपये तक रही।
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पंचांग और ज्योतिष के अनुसार रक्षाबंधन का शुभ संयोग

पंडित विशाल शांडिल्य के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन पर शनि, श्रवण नक्षत्र और शनिवार का त्रियोग बन रहा है, जो पर्व को अत्यंत लाभकारी बनाता है। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग, द्वि-पुष्कर योग, धनिष्ठा नक्षत्र, सौभाग्य व शोभन योग भी इस पर्व को और शुभ बना रहे हैं।
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पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि सबसे विशेष बात यह है कि इस बार भद्रा काल नहीं होने के कारण कोई विघ्न नहीं है। पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त दोपहर 2:12 बजे से प्रारंभ होकर 9 अगस्त को

दोपहर 1:24 बजे तक है, इस कारण राखी बांधने का पर्व 9 अगस्त (शनिवार) को मनाया जाएगा।
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त



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सुबह 5:47 से दोपहर 1:24 बजे तक राखी बांधने का है श्रेष्ठ समय।

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अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:00 से 12:53 बजे तक।
अबकी रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्रा का साया ः पं. रविदत्त

पूंडरी। पंडित रविदत्त शास्त्री ने कहा कि रक्षाबंधन पर्व प्रेम, सौहार्द और आपसी विश्वास को मजबूत करने वाला है। विशेष बात यह है कि इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि बहनें इस दिन पूजन की थाली में केसर, चंदन, चावल और मिठाई रखकर भाई की आरती करती हैं, तिलक लगाकर उसकी कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। पंडित शास्त्री ने कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब देवताओं पर संकट आता था, तो वे रक्षा के लिए बहनों से रक्षा सूत्र बंधवाते थे।


ऐसे सजाएं थाली ः राखी की थाली सजाते समय उसमें केसर, चंदन, अक्षत (चावल), दुर्वा रखें। थाली को रेशमी वस्त्र पर सजाएं। रक्षा सूत्र को सबसे पहले भगवान शिव या शिवलिंग पर अर्पित करें, इसके बाद भाई को राखी बांधें। संवाद
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