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Kaithal News: फसल अवशेष प्रबंधन के बताए गुर
Sat, 14 Sep 2024 03:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 14 Sep 2024 03:30 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। फसल अवशेष प्रबंधन पर कृषि विभाग द्वारा गांव बाता बालू, कमालपुर व कुराड़ में एक दिवसीय किसान जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के साथ कृषि विभाग के अफसरों ने फसल अवशेष न जलाने की अपील भी की।
डाॅ. रमेश समध्यान ने कहा कि किसान फसल अवशेष को खेत में ही जला कर मित्र कीटों को भी नष्ट कर देते हैं। फसल अवशेष जो कि कृषि भूमि के लिए खाद का एक अच्छा साधन है उसको भी जला कर नष्ट कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों में लगभग 12 किलो यूरिया, डीएपी खाद की मात्रा मौजूद होती है। फसल अवशेष को जलाने से किसान को दोहरा नुकसान होता है। जहां किसान एक अच्छी खाद से वंचित रह जाता है। वहीं भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाले अनेकों जीवाणुओं को नष्ट भी कर देता है।
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उन्होंने कहा कि अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और धुएं के कारण से सड़क दुर्घटनाओं का भी अंदेशा बना रहता है। इस लिए किसान अपने खेत की मृदा को उन्नत बनाने के लिए फसल अवशेषों को न जलाएं। जोगिंद्र बिहान ने कहा की किसान धान की कटाई के बाद आधुनिक कृषि यंत्रो जैसे एसएम एस सिस्टम, सुपर सीडर, एमबी प्लो, हैपी सीडर, स्ट्रा चॉपर जैसे कृषि यंत्रो का प्रयोग करके फसल अवशेषों का प्रबंधन कर सकते हंै। इन कृषि यंत्रों से फसल अवशेष प्रबंधन करने पर किसान को एक हजार रुपए प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि सरकार द्वारा दी जा रही है।
फसल अवशेषों से जमीन को उपजाऊ बनाएं ः डाॅ. नारा
सीवन। फर्शमाजरा गांव में कृषि विभाग की ओर से फसल अवशेष प्रबधन योजना के तहत किसान प्रशिक्षण शिविर व जागरूकता रैली निकाली। इस मौके पर किसानों को सलाह दी गई कि धान की कटाई उपरांत धान के फसल के अवशेषों में बिल्कुल भी आग न लगाएं और विभिन्न यंत्रों जैसे सुपरसीडर, जीरोटीलेज मशीन, स्ट्रॉ चोपर, हैप्पी सीडर का प्रयोग करके धान के अवशेषों को खेतों में मिलाए और जमीन की उर्वरता शक्ति बढ़ाए।
इसके अतिरिक्त स्ट्राबेलर मशीन से पराली की गांठें बनाए। इन दोनों तकनीकों अपनाकर विभाग से एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि किसान प्राप्त कर सकते हैं। यह आयोजन उप कृषि निदेशक डॉ. बाबू लाल के निर्देशानुसार किसानों को जागरूक करने के लिए किया जा रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कैथल की टीम में एटीएम अनूप, कृषि पर्यवेक्षक विरेंद्र ने किसानों से अवशेष न जलाने का आह्वान किया।
उपमंडल कृषि अधिकारी कैथल डा. सतीश कुमार नारा ने किसानों को बताया कि जिला उपायुक्त के द्वारा धान की फसल के बचे हुए अवशेषों को जलाने पर प्रतिबंध लगाया है। इन आदेशों की अवहेलना में यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस मौके पर किसान संदीप सिंह, शीशपाल सिंह, मेहर सिंह, गुरविंदर सिंह व अन्य मौजूद रहे। संवाद
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कलायत। फसल अवशेष प्रबंधन पर कृषि विभाग द्वारा गांव बाता बालू, कमालपुर व कुराड़ में एक दिवसीय किसान जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के साथ कृषि विभाग के अफसरों ने फसल अवशेष न जलाने की अपील भी की।
डाॅ. रमेश समध्यान ने कहा कि किसान फसल अवशेष को खेत में ही जला कर मित्र कीटों को भी नष्ट कर देते हैं। फसल अवशेष जो कि कृषि भूमि के लिए खाद का एक अच्छा साधन है उसको भी जला कर नष्ट कर देते हैं।
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उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों में लगभग 12 किलो यूरिया, डीएपी खाद की मात्रा मौजूद होती है। फसल अवशेष को जलाने से किसान को दोहरा नुकसान होता है। जहां किसान एक अच्छी खाद से वंचित रह जाता है। वहीं भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाले अनेकों जीवाणुओं को नष्ट भी कर देता है।
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उन्होंने कहा कि अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और धुएं के कारण से सड़क दुर्घटनाओं का भी अंदेशा बना रहता है। इस लिए किसान अपने खेत की मृदा को उन्नत बनाने के लिए फसल अवशेषों को न जलाएं। जोगिंद्र बिहान ने कहा की किसान धान की कटाई के बाद आधुनिक कृषि यंत्रो जैसे एसएम एस सिस्टम, सुपर सीडर, एमबी प्लो, हैपी सीडर, स्ट्रा चॉपर जैसे कृषि यंत्रो का प्रयोग करके फसल अवशेषों का प्रबंधन कर सकते हंै। इन कृषि यंत्रों से फसल अवशेष प्रबंधन करने पर किसान को एक हजार रुपए प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि सरकार द्वारा दी जा रही है।
फसल अवशेषों से जमीन को उपजाऊ बनाएं ः डाॅ. नारा
सीवन। फर्शमाजरा गांव में कृषि विभाग की ओर से फसल अवशेष प्रबधन योजना के तहत किसान प्रशिक्षण शिविर व जागरूकता रैली निकाली। इस मौके पर किसानों को सलाह दी गई कि धान की कटाई उपरांत धान के फसल के अवशेषों में बिल्कुल भी आग न लगाएं और विभिन्न यंत्रों जैसे सुपरसीडर, जीरोटीलेज मशीन, स्ट्रॉ चोपर, हैप्पी सीडर का प्रयोग करके धान के अवशेषों को खेतों में मिलाए और जमीन की उर्वरता शक्ति बढ़ाए।
इसके अतिरिक्त स्ट्राबेलर मशीन से पराली की गांठें बनाए। इन दोनों तकनीकों अपनाकर विभाग से एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि किसान प्राप्त कर सकते हैं। यह आयोजन उप कृषि निदेशक डॉ. बाबू लाल के निर्देशानुसार किसानों को जागरूक करने के लिए किया जा रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कैथल की टीम में एटीएम अनूप, कृषि पर्यवेक्षक विरेंद्र ने किसानों से अवशेष न जलाने का आह्वान किया।
उपमंडल कृषि अधिकारी कैथल डा. सतीश कुमार नारा ने किसानों को बताया कि जिला उपायुक्त के द्वारा धान की फसल के बचे हुए अवशेषों को जलाने पर प्रतिबंध लगाया है। इन आदेशों की अवहेलना में यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस मौके पर किसान संदीप सिंह, शीशपाल सिंह, मेहर सिंह, गुरविंदर सिंह व अन्य मौजूद रहे। संवाद