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Kaithal News: साहित्य, दर्शन और संस्कृत की महत्ता पर डाला प्रकाश
Thu, 23 Jan 2025 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 23 Jan 2025 01:21 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में विवि एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के सीपीडीएचई केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। इसमें भारतीय साहित्य, दर्शन और संस्कृत को शिक्षा में शामिल करने की महत्ता पर प्रकाश डाला।
गौरतलब है कि यह कार्यक्रम आगामी 30 जनवरी तक चलना है और इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा के विषयों को शिक्षा प्रणाली में समाहित करना है।
बुधवार को उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर जोर दिया और इसे आधुनिक शिक्षा प्रणाली में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।
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उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान को अपनी कक्षाओं में लागू करें और छात्रों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराएं। कार्यक्रम के दौरान महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विषयों पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया।
अपने संबोधन में प्रो. भारद्वाज ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों को समझाया और बताया कि कैसे यह परंपरा भारतीय शिक्षा व्यवस्था में निहित गहरी समझ और दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करती है।
उन्होंने बताया कि यह भारतीय संस्कृति को सशक्त करने का एक प्रभावी माध्यम हो सकता है। सीपीडीएचई की निदेशक प्रो. गीता सिंह भी उद्घाटन समारोह में उपस्थित रहीं और उन्होंने कार्यक्रम के महत्व को समझाते हुए कार्यक्रम की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
उद्घाटन समारोह की समाप्ति पर डॉ. नरेश शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज का महत्वपूर्ण व्याख्यान हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वार संचालित भारतीय ज्ञान परंपरा शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र के संयोजक डॉ. नवीन शर्मा ने पिछले एक वर्ष में केंद्र की ओर से किए गए कार्यों पर आधारित पीपीटी की प्रस्तुति की।
द्वितीय सत्र में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कृष्ण चंद्र पांडे ने दिया। कार्यक्रम का संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. सचिन वशिष्ठ ने किया। उल्लेखनीय है कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हरियाणा एवं देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 100 से अधिक प्राध्यापक भारतीय ज्ञान परंपरा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को शिक्षा में लागू करने का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
बताया गया कि यह कार्यक्रम शिक्षकों को भारतीय संस्कृति, साहित्य, दर्शन, संस्कृत और अन्य पारंपरिक विषयों पर गहरे ज्ञान से पूर्ण करेगा, ताकि वे इन विषयों को प्रभावी ढंग से शिक्षा में शामिल कर सकें। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों की ओर से विभिन्न सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपराओं, शिक्षण विधियों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों पर चर्चा की जाएगी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भारतीय शिक्षा व्यवस्था में भारतीय परंपराओं को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और यह शिक्षकों को उनके व्यावसायिक कौशल को और भी सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करेगा।
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कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में विवि एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के सीपीडीएचई केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। इसमें भारतीय साहित्य, दर्शन और संस्कृत को शिक्षा में शामिल करने की महत्ता पर प्रकाश डाला।
गौरतलब है कि यह कार्यक्रम आगामी 30 जनवरी तक चलना है और इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा के विषयों को शिक्षा प्रणाली में समाहित करना है।
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बुधवार को उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर जोर दिया और इसे आधुनिक शिक्षा प्रणाली में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।
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उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान को अपनी कक्षाओं में लागू करें और छात्रों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराएं। कार्यक्रम के दौरान महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विषयों पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया।
अपने संबोधन में प्रो. भारद्वाज ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों को समझाया और बताया कि कैसे यह परंपरा भारतीय शिक्षा व्यवस्था में निहित गहरी समझ और दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करती है।
उन्होंने बताया कि यह भारतीय संस्कृति को सशक्त करने का एक प्रभावी माध्यम हो सकता है। सीपीडीएचई की निदेशक प्रो. गीता सिंह भी उद्घाटन समारोह में उपस्थित रहीं और उन्होंने कार्यक्रम के महत्व को समझाते हुए कार्यक्रम की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
उद्घाटन समारोह की समाप्ति पर डॉ. नरेश शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज का महत्वपूर्ण व्याख्यान हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वार संचालित भारतीय ज्ञान परंपरा शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र के संयोजक डॉ. नवीन शर्मा ने पिछले एक वर्ष में केंद्र की ओर से किए गए कार्यों पर आधारित पीपीटी की प्रस्तुति की।
द्वितीय सत्र में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कृष्ण चंद्र पांडे ने दिया। कार्यक्रम का संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. सचिन वशिष्ठ ने किया। उल्लेखनीय है कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हरियाणा एवं देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 100 से अधिक प्राध्यापक भारतीय ज्ञान परंपरा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को शिक्षा में लागू करने का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
बताया गया कि यह कार्यक्रम शिक्षकों को भारतीय संस्कृति, साहित्य, दर्शन, संस्कृत और अन्य पारंपरिक विषयों पर गहरे ज्ञान से पूर्ण करेगा, ताकि वे इन विषयों को प्रभावी ढंग से शिक्षा में शामिल कर सकें। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों की ओर से विभिन्न सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपराओं, शिक्षण विधियों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों पर चर्चा की जाएगी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भारतीय शिक्षा व्यवस्था में भारतीय परंपराओं को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और यह शिक्षकों को उनके व्यावसायिक कौशल को और भी सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करेगा।