{"_id":"6ab2cb785bc44f779d021614","slug":"threefold-increase-in-patients-at-ayurveda-opd-emphasis-on-improving-lifestyle-kaithal-news-c-245-1-kht1014-155473-2026-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: आयुर्वेद की ओपीडी में तीन गुना बढ़े मरीज, जीवनशैली सुधारने पर जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: आयुर्वेद की ओपीडी में तीन गुना बढ़े मरीज, जीवनशैली सुधारने पर जोर
विज्ञापन
आयुर्वेद विशेषज्ञ मरीज की नाड़ी देखते हुए। स्वयं
कैथल। बदलती जीवनशैली के बीच लोगों का रुझान अब आयुर्वेद की ओर बढ़ रहा है। इसका असर नागरिक अस्पताल की आयुर्वेदिक ओपीडी में भी दिखाई दे रहा है। कुछ साल पहले जहां आयुर्वेदिक ओपीडी में रोजाना करीब 40 से 50 मरीज उपचार के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 100 से 150 मरीज प्रतिदिन तक पहुंच गई है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नागरिक अस्पताल के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र गिल, सदस्य इंडियन मेडिकल काउंसिल हरियाणा, ने बताया कि आयुर्वेद केवल बीमारी होने के बाद उसका उपचार करने की पद्धति नहीं है बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और बीमारी से बचाव पर भी जोर देता है। आयुर्वेद में दिनचर्या और ऋतुचर्या का विशेष महत्व है। व्यक्ति अपनी दिनचर्या, खान-पान और जीवनशैली में सुधार करके कई स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकता है।
उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खान-पान में असंतुलन, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों में जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और योग व व्यायाम को जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। डॉ. गिल ने बताया कि आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन भी योग्य चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
किसी बीमारी के लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए। इस वर्ष आयुर्वेद दिवस का विषय स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद रखा गया है। इसमें स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ शोध, नवाचार, वैज्ञानिक प्रमाण और सामुदायिक स्वास्थ्य पर जोर दिया जा रहा है। आयुर्वेद दिवस का मुख्य आयोजन नागपुर में किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवन के लिए पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के साथ नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली को अपनाना भी जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खान-पान में असंतुलन, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों में जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और योग व व्यायाम को जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। डॉ. गिल ने बताया कि आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन भी योग्य चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
विज्ञापन
किसी बीमारी के लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए। इस वर्ष आयुर्वेद दिवस का विषय स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद रखा गया है। इसमें स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ शोध, नवाचार, वैज्ञानिक प्रमाण और सामुदायिक स्वास्थ्य पर जोर दिया जा रहा है। आयुर्वेद दिवस का मुख्य आयोजन नागपुर में किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवन के लिए पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के साथ नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली को अपनाना भी जरूरी है।

आयुर्वेद विशेषज्ञ मरीज की नाड़ी देखते हुए। स्वयं
विज्ञापन