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यह काल पुनर्जागरण का : प्रो.भारद्वाज
Sun, 21 Jan 2024 02:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 21 Jan 2024 02:59 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। राम मंदिर के निर्माण यह काल पुनर्जागरण का है। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना करके भारत के जनमानस तक राम के चरित्र को पहुंचाया। रामायण में वर्णित श्री राम का चरित्र पूरे भारत देश में मानवीय आदर्श के रूप में माना जाता है। यह बात कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर अध्ययन केंद्र के सह-निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह ने कही।
महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में बौद्धिक संवाद में बतौर मुख्य वक्ता वह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राम और रामायण के विषय में बौद्धिक वर्ग की चर्चाओं में राम को भारत की आत्मा और रामायण को भारतीय संस्कृति का महाकाव्य कहा जाता है। अकादमिक जगत में महर्षि वाल्मीकि के ग्रंथों पर सेमिनार, कार्यशालाएं, संवाद और अनुसंधान करने के लिए महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल में महर्षि वाल्मीकि शोध पीठ स्थापित किया गया है।
पीठ की ओर से शनिवार को भारतीय संस्कृति के आधार महर्षि वाल्मीकि के राम विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी में डॉ. प्रीतम सिंह ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय ने जिस प्रकार का संवाद बौद्धिक जनों के बीच आयोजित किया है, इसी प्रकार की लाखों छोटी-बड़ी संगोष्ठियों और अनेक जन-जागृति के कार्यक्रमों के आयोजन का परिणाम है कि भारत का जनमानस श्री राम को उनके जन्म स्थान पर स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हुआ।
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कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघचालक श्याम बंसल, वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं समाजसेवी रविभूषण गर्ग भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने कहा कि राम के बिना हम भारत की कल्पना नहीं कर सकते। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण हमारी संस्कृति के आधार रूप हैं। भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण इकाई परिवार है, राम ने आदर्श रूप में परिवार के संबंधों को जिया है। पारिवारिक मर्यादाएं, सामाजिक संबंध, आदर्श जीवन और रामराज्य का आधार वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण ही है। कार्यक्रम में चन्द्रभान, योगेंद्र ढुल, राजू डोहर, महिपाल सिंह, विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. भाग सिंह बोदला, सभी आचार्य आदि की सहभागिता रही।
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कैथल। राम मंदिर के निर्माण यह काल पुनर्जागरण का है। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना करके भारत के जनमानस तक राम के चरित्र को पहुंचाया। रामायण में वर्णित श्री राम का चरित्र पूरे भारत देश में मानवीय आदर्श के रूप में माना जाता है। यह बात कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर अध्ययन केंद्र के सह-निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह ने कही।
महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में बौद्धिक संवाद में बतौर मुख्य वक्ता वह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राम और रामायण के विषय में बौद्धिक वर्ग की चर्चाओं में राम को भारत की आत्मा और रामायण को भारतीय संस्कृति का महाकाव्य कहा जाता है। अकादमिक जगत में महर्षि वाल्मीकि के ग्रंथों पर सेमिनार, कार्यशालाएं, संवाद और अनुसंधान करने के लिए महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल में महर्षि वाल्मीकि शोध पीठ स्थापित किया गया है।
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पीठ की ओर से शनिवार को भारतीय संस्कृति के आधार महर्षि वाल्मीकि के राम विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी में डॉ. प्रीतम सिंह ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय ने जिस प्रकार का संवाद बौद्धिक जनों के बीच आयोजित किया है, इसी प्रकार की लाखों छोटी-बड़ी संगोष्ठियों और अनेक जन-जागृति के कार्यक्रमों के आयोजन का परिणाम है कि भारत का जनमानस श्री राम को उनके जन्म स्थान पर स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हुआ।
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कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघचालक श्याम बंसल, वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं समाजसेवी रविभूषण गर्ग भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने कहा कि राम के बिना हम भारत की कल्पना नहीं कर सकते। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण हमारी संस्कृति के आधार रूप हैं। भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण इकाई परिवार है, राम ने आदर्श रूप में परिवार के संबंधों को जिया है। पारिवारिक मर्यादाएं, सामाजिक संबंध, आदर्श जीवन और रामराज्य का आधार वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण ही है। कार्यक्रम में चन्द्रभान, योगेंद्र ढुल, राजू डोहर, महिपाल सिंह, विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. भाग सिंह बोदला, सभी आचार्य आदि की सहभागिता रही।