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Kaithal News: शाम के बाद कैथल-करनाल रूट पर बस नहीं, यात्री परेशान
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विक्रम सिंह
कैथल। शाम के समय कैथल से करनाल रूट पर बसों की संख्या कम होने की वजह से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सात बजे के बाद इस रूट पर पर्याप्त बसें नहीं हैं। जिसके बाद बस स्टैंड परिसर में सन्नाटा पसरा रहता है। रात के समय तो कोई बस नहीं मिलता, जिसके चलते इस रूट के यात्रियों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
कैथल से करनाल व करनाल से कैथल आने-जाने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक रहती है। इस रूट पर कई कस्बे पड़ते हैं, जहां से भी लोग कैथल व करनाल आते-जाते हैं। कई लोग रोजगार के लिए तो कई प्रशासनिक व अन्य कार्याें के लिए दोनों जिलों में जाते हैं। इनमें अधिकतर लोग रोडवेज की बस सेवा का ही इस्तेमाल करते हैं मगर इस रूट पर यात्रियों की संख्या के मद्देनजर रोडवेज की बस सेवा पर्याप्त नहीं है। जिस वजह से यात्री भटकते रहते हैं और अंतत: निजी वाहनों से लिफ्ट लेने पर आश्रित हो जाते हैं।
उधर इस रूट पर पूंडरी, रसीना, निसिंग व करनाल में औद्योगिक क्षेत्र होने के चलते देर शाम तक बड़ी संख्या में कैथल व करनाल दोनों ओर से यात्रियों आवागमन होता है लेकिन सार्वजनिक परिवहन की सुविधा पर्याप्त न होने से इन श्रमिकों को भी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
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कैथल डिपो से करनाल रूट पर अंतिम बस शाम सात बजकर 40 मिनट पर चलती है, जोकि दिल्ली तक जाती है। इसके बाद इस रूट पर रोडवेज की बस सेवा नहीं है। ऐसे में लोग या तो सड़कों पर भटकते हैं या फिर प्राइवेट वाहनों पर लिफ्ट मांगने पर मजबूर हो जाते हैं।
इस रूट पर शाम के बाद निजी वाहनों की संख्या भी कम हो जाती है। स्थानीय निवासी सतीश, रोहित, साहिल इत्यादि ने बताया कि इस वजह से नौकरीपेशा व श्रमिक लोगों को ज्यादा परेशानियां झेलनी पड़ती हैं, क्योंकि उन्हें रोजाना इन शहरों में जाना पड़ता है और देरशाम ही उनकी छुट्टी होती है। शाम की बस छूट गई तो उसके बाद उन्हें कैथल से दूसरी कोई सरकारी बस नहीं मिलती। ऐसे में उनके लिए अपने गंतव्यों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। संवाद
रात के समय सवारियां कम रहती हैं, इसलिए विभाग बस का संचालन नहीं करता। कम यात्रियों के साथ बस चलाने से नुकसान होता है। अगर रात के समय बस संचालन के संदर्भ में कोई मांग आती है तो रूट पर जांच के बाद बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। - शमशेर सिंह मान, ड्यूटी प्रभारी, कैथल।
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कैथल। शाम के समय कैथल से करनाल रूट पर बसों की संख्या कम होने की वजह से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सात बजे के बाद इस रूट पर पर्याप्त बसें नहीं हैं। जिसके बाद बस स्टैंड परिसर में सन्नाटा पसरा रहता है। रात के समय तो कोई बस नहीं मिलता, जिसके चलते इस रूट के यात्रियों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
कैथल से करनाल व करनाल से कैथल आने-जाने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक रहती है। इस रूट पर कई कस्बे पड़ते हैं, जहां से भी लोग कैथल व करनाल आते-जाते हैं। कई लोग रोजगार के लिए तो कई प्रशासनिक व अन्य कार्याें के लिए दोनों जिलों में जाते हैं। इनमें अधिकतर लोग रोडवेज की बस सेवा का ही इस्तेमाल करते हैं मगर इस रूट पर यात्रियों की संख्या के मद्देनजर रोडवेज की बस सेवा पर्याप्त नहीं है। जिस वजह से यात्री भटकते रहते हैं और अंतत: निजी वाहनों से लिफ्ट लेने पर आश्रित हो जाते हैं।
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उधर इस रूट पर पूंडरी, रसीना, निसिंग व करनाल में औद्योगिक क्षेत्र होने के चलते देर शाम तक बड़ी संख्या में कैथल व करनाल दोनों ओर से यात्रियों आवागमन होता है लेकिन सार्वजनिक परिवहन की सुविधा पर्याप्त न होने से इन श्रमिकों को भी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
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कैथल डिपो से करनाल रूट पर अंतिम बस शाम सात बजकर 40 मिनट पर चलती है, जोकि दिल्ली तक जाती है। इसके बाद इस रूट पर रोडवेज की बस सेवा नहीं है। ऐसे में लोग या तो सड़कों पर भटकते हैं या फिर प्राइवेट वाहनों पर लिफ्ट मांगने पर मजबूर हो जाते हैं।
इस रूट पर शाम के बाद निजी वाहनों की संख्या भी कम हो जाती है। स्थानीय निवासी सतीश, रोहित, साहिल इत्यादि ने बताया कि इस वजह से नौकरीपेशा व श्रमिक लोगों को ज्यादा परेशानियां झेलनी पड़ती हैं, क्योंकि उन्हें रोजाना इन शहरों में जाना पड़ता है और देरशाम ही उनकी छुट्टी होती है। शाम की बस छूट गई तो उसके बाद उन्हें कैथल से दूसरी कोई सरकारी बस नहीं मिलती। ऐसे में उनके लिए अपने गंतव्यों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। संवाद
रात के समय सवारियां कम रहती हैं, इसलिए विभाग बस का संचालन नहीं करता। कम यात्रियों के साथ बस चलाने से नुकसान होता है। अगर रात के समय बस संचालन के संदर्भ में कोई मांग आती है तो रूट पर जांच के बाद बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। - शमशेर सिंह मान, ड्यूटी प्रभारी, कैथल।