{"_id":"635980eb9f56fe40275a00d0","slug":"there-is-machine-in-civil-hospital-but-platelets-are-not-made-kaithal-news-knl125561471","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिविल अस्पताल में मशीन है पर प्लेटलेट्स नहीं बनती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिविल अस्पताल में मशीन है पर प्लेटलेट्स नहीं बनती
विज्ञापन
14-कैथल। जिला नागरिक हस्पताल स्थित ब्लड बैंक।
- फोटो : Kaithal
कैथल। जिले में डेंगू के प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। इससे बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग के भी अधूरे प्रबंध है। इस समय डेंगू की बढ़ रही बीमारी के बीच डेंगू के अधिकतर मरीजों को प्लेटलेट्स की भी जरूरत पड़ती है, लेकिन जिला नागरिक अस्पताल में मशीन की सुविधा होने के बावजूद प्लेटलेट्स नहीं मिल पाती है। इस कारण से लोग परेशान हो रहे हैं।
गौरतलब है कि पहले अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट नहीं था। दो महीने पहले स्वास्थ्य विभाग को मिले डॉक्टरों में एक पैथोलॉजिस्ट तो मिला, लेकिन प्लेटलेट्स की मशीन का लाइसेंस न होने के कारण प्लेटलेट्स नहीं बनाई जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले वर्ष ही जिला नागरिक अस्पताल में मशीन लगाई है लेकिन यह शोपीस बनी हुई है। ऐसे स्थिति में जब जिला नागरिक अस्पताल में प्लेट्सलेस की सुविधा नहीं मिल पाती तो डेंगू के मरीजों को अधिक रुपये खर्च करके प्लेटलेट्स लेने के लिए करनाल पहुंचना पड़ता है। डेंगू के मरीजों को करनाल में 12 से 15 हजार रुपये खर्च करके प्लेट्सलेस खरीदनी पड़ रही है।
जिले में डेंगू के 40 संक्रमित केस
जिले में इस समय डेंगू के कुल 40 संक्रमित केस हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अब तक कुल 1445 सैंपल लिए गए हैं जबकि गत वर्ष 1212 मामले डेंगू के मामले मिले थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अब तक छह लाख से अधिक जगहों पर डेंगू के लारवे का सर्वे भी किया है। इस दौरान 1500 से अधिक जगहों पर लारवा मिलने पर मकान मालिकों को नोटिस दिया गया है।
विज्ञापन
लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया की शुरू-
जिला नागरिक अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेनू चावला ने कहा कि अस्पताल में पिछले वर्ष ही प्लेटलेट्स की मशीन गत वर्ष स्थापित की गई थी, लेकिन इस दौरान पैथोलॉजिस्ट नहीं था। अब पैथोलॉजिस्ट आया है तो लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। उम्मीद है कि जल्द जिले वासियों को सुविधा मिलने लगेगी।
विज्ञापन
गौरतलब है कि पहले अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट नहीं था। दो महीने पहले स्वास्थ्य विभाग को मिले डॉक्टरों में एक पैथोलॉजिस्ट तो मिला, लेकिन प्लेटलेट्स की मशीन का लाइसेंस न होने के कारण प्लेटलेट्स नहीं बनाई जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले वर्ष ही जिला नागरिक अस्पताल में मशीन लगाई है लेकिन यह शोपीस बनी हुई है। ऐसे स्थिति में जब जिला नागरिक अस्पताल में प्लेट्सलेस की सुविधा नहीं मिल पाती तो डेंगू के मरीजों को अधिक रुपये खर्च करके प्लेटलेट्स लेने के लिए करनाल पहुंचना पड़ता है। डेंगू के मरीजों को करनाल में 12 से 15 हजार रुपये खर्च करके प्लेट्सलेस खरीदनी पड़ रही है।
विज्ञापन
जिले में डेंगू के 40 संक्रमित केस
जिले में इस समय डेंगू के कुल 40 संक्रमित केस हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अब तक कुल 1445 सैंपल लिए गए हैं जबकि गत वर्ष 1212 मामले डेंगू के मामले मिले थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अब तक छह लाख से अधिक जगहों पर डेंगू के लारवे का सर्वे भी किया है। इस दौरान 1500 से अधिक जगहों पर लारवा मिलने पर मकान मालिकों को नोटिस दिया गया है।
विज्ञापन
लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया की शुरू-
जिला नागरिक अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेनू चावला ने कहा कि अस्पताल में पिछले वर्ष ही प्लेटलेट्स की मशीन गत वर्ष स्थापित की गई थी, लेकिन इस दौरान पैथोलॉजिस्ट नहीं था। अब पैथोलॉजिस्ट आया है तो लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। उम्मीद है कि जल्द जिले वासियों को सुविधा मिलने लगेगी।