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मजदूरों ने अधिकारियों पर लगाए धांधली के आरोप
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सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना की आड़ में फर्जीवाड़ा करने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इसकी पोल वीरवार को कलायत के गांव चौशाला के मजदूरों ने एसडीएम कार्यालय में खोली। वे रोष मार्च करते हुए उप मंडल कार्यालय पहुंचे। इनमें बड़ी संख्या में महिला मजदूर शामिल रही। गुस्साए मजदूरों ने एसडीएम कार्यालय में धरना-प्रदर्शन करते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि जब काम की मांग की जाती है तो रोजगार नहीं दिया जाता। जबकि निजी हितों की पूर्ति के लिए कुछ मनरेगा अधिकारी-कर्मचारी सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। कागजों में उनके नामों को फर्जी रूप से प्रयोग कर मजदूरी डकारी जा रही है। हकीकत में वे काम के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। इस धांधली की खबर उन्होंने अन्य मजदूरों के माध्यम से मिली। पड़ताल करने पर जो हकीकत सामने आई उससे वे आश्चर्यचकित रह गए। बगैर उनकी जानकारी मस्ट्रोल में नामों का फायदा उठाया जा रहा था। इस गंभीर विषय को लेकर मजदूरों की बैठक हुई। बाद में कलायत में रोष मार्च का निर्णय लिया गया। इसके तहत मजदूरों ने कलायत नायब तहसीलदार हरदेव सिंह को ज्ञापन सौंपा गया। सोना, गीता, कविता, सुशीला, ममता, रीना, पिंकी, शीला, कमला और अन्य महिला मजदूरों ने मनरेगा योजना में उनके नामों व मजदूर आईडी का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इनका कहना था कि वर्ष में उन्हें मुश्किल से सात दिन भी काम नहीं मिला। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार बेरोजगारी के संकट को झेल रहे हैं। उधर मनरेगा मजदूरों ने अधिकारियों पर काम का भुगतान करने की बजाय कार्यालय के चक्कर कटवाने के आरोप लगाए।
कलायत नायब तहसीलदार हरदेव सिंह ने कहा कि जो ज्ञापन उन्हें सौंपा गया है उससे प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई के लिए प्रेषित किया जाएगा। उन्होंने संजीदगी से मनरेगा मजदूरों के पक्ष को सुनना और ज्ञापन लिया। इस दौरान मजदूरों ने उनके समक्ष आ रही गंभीर समस्या से अधिकारी को अवगत करवाते हुए इस संबंध में प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
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उन्होंने कहा कि जब काम की मांग की जाती है तो रोजगार नहीं दिया जाता। जबकि निजी हितों की पूर्ति के लिए कुछ मनरेगा अधिकारी-कर्मचारी सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। कागजों में उनके नामों को फर्जी रूप से प्रयोग कर मजदूरी डकारी जा रही है। हकीकत में वे काम के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। इस धांधली की खबर उन्होंने अन्य मजदूरों के माध्यम से मिली। पड़ताल करने पर जो हकीकत सामने आई उससे वे आश्चर्यचकित रह गए। बगैर उनकी जानकारी मस्ट्रोल में नामों का फायदा उठाया जा रहा था। इस गंभीर विषय को लेकर मजदूरों की बैठक हुई। बाद में कलायत में रोष मार्च का निर्णय लिया गया। इसके तहत मजदूरों ने कलायत नायब तहसीलदार हरदेव सिंह को ज्ञापन सौंपा गया। सोना, गीता, कविता, सुशीला, ममता, रीना, पिंकी, शीला, कमला और अन्य महिला मजदूरों ने मनरेगा योजना में उनके नामों व मजदूर आईडी का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इनका कहना था कि वर्ष में उन्हें मुश्किल से सात दिन भी काम नहीं मिला। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार बेरोजगारी के संकट को झेल रहे हैं। उधर मनरेगा मजदूरों ने अधिकारियों पर काम का भुगतान करने की बजाय कार्यालय के चक्कर कटवाने के आरोप लगाए।
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कलायत नायब तहसीलदार हरदेव सिंह ने कहा कि जो ज्ञापन उन्हें सौंपा गया है उससे प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई के लिए प्रेषित किया जाएगा। उन्होंने संजीदगी से मनरेगा मजदूरों के पक्ष को सुनना और ज्ञापन लिया। इस दौरान मजदूरों ने उनके समक्ष आ रही गंभीर समस्या से अधिकारी को अवगत करवाते हुए इस संबंध में प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
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