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Kaithal News: घग्गर का जलस्तर बढ़ा रहा ग्रामीणों की चिंता
Wed, 10 Sep 2025 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 10 Sep 2025 01:43 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। गुहला-चीका से गुजर रही घग्गर नदी में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। सोमवार दोपहर दो बजे तक जलस्तर 24.8 फीट तक पहुंच गया, हालांकि शाम चार बजे यह घटकर 24.7 फीट पर आ गया।
घग्गर का जलस्तर 25 फीट के करीब पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। तटबंध कमजोर होने के कारण लोग पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और कई गांवों के लोग चैन की नींद नहीं सो पा रहे।
फिलहाल रत्ताखेड़ा, सिहाली, मोहनपुर, मंझेड़ी, मैंगड़ा, भूंसला व पपराला समेत कई गांवों की फसलें पानी में डूबी हुई हैं। अब तक करीब 35 गांवों में 10 हजार एकड़ के आसपास की फसल बर्बाद हो चुकी है।
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लोगों का कहना है कि बारिश अच्छी होने से इस बार बाढ़ का खतरा और अधिक है। सिहाली, मैंगड़ा, मंझेड़ी, मोहनपुर, ढंयोता, टटियाना, खुशहाल माजरा, सरोला, दाबा-चाबा,
रत्ताखेड़ा, लुकमान व भाटिया सहित दर्जनभर गांव नदी के किनारे बसे हैं। यहां बाढ़ आने पर सबसे अधिक नुकसान की आशंका रहती है।
घग्गर नदी में क्षेत्र की सीमा में कई ऐसे प्वाइंट हैं, जहां पर घग्गर नदी में कई जगह पर तटबंध पर कटाव है। वहीं, जगह-जगह पर चूहों ने बिल खोद हुए है और यही से पानी का रिसाव होने से तबाही मचती है। घग्गर नदी के किनारे के आसपास कुछ किसानों ने ट्यूबवेल लगा कर दूर के खेतों में पाइप लाइन अवैध रूप से डाली हुई हैं। जिससे तटबंध कमजोर हो गए है।
क्षेत्र में पुराने जख्म अभी भी ताजा
क्षेत्र में 1988, 1989, 1993, 1996, 2010 और 2023 में भीषण बाढ़ आ चुकी है। 1993 में 10 हजार एकड़ और 2023 में 33 हजार एकड़ से अधिक फसल तबाह हो गई थी। 2023 की बाढ़ में 70 से अधिक गांव प्रभावित हुए थे और कुछ ग्रामीणों को पलायन करना पड़ा था।ग्रामीण बताते हैं कि करीब 30 वर्ष पहले बनाए गए बांध अब कमजोर हो चुके हैं। हर साल केवल मरम्मत कर काम चलाया जा रहा है। घग्गर के साथ लगते गांव को बाढ़ से बचाने के लिए तटबंध व रिंग बांध बनाए गए हैं ताकि अधिक पानी आने से गांव में पानी प्रवेश नहीं हो पाए, लेकिन अब यही तटबंध बांध भी धीरे-धीरे कमजोर हो गए है।
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गुहला-चीका। गुहला-चीका से गुजर रही घग्गर नदी में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। सोमवार दोपहर दो बजे तक जलस्तर 24.8 फीट तक पहुंच गया, हालांकि शाम चार बजे यह घटकर 24.7 फीट पर आ गया।
घग्गर का जलस्तर 25 फीट के करीब पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। तटबंध कमजोर होने के कारण लोग पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और कई गांवों के लोग चैन की नींद नहीं सो पा रहे।
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फिलहाल रत्ताखेड़ा, सिहाली, मोहनपुर, मंझेड़ी, मैंगड़ा, भूंसला व पपराला समेत कई गांवों की फसलें पानी में डूबी हुई हैं। अब तक करीब 35 गांवों में 10 हजार एकड़ के आसपास की फसल बर्बाद हो चुकी है।
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लोगों का कहना है कि बारिश अच्छी होने से इस बार बाढ़ का खतरा और अधिक है। सिहाली, मैंगड़ा, मंझेड़ी, मोहनपुर, ढंयोता, टटियाना, खुशहाल माजरा, सरोला, दाबा-चाबा,
रत्ताखेड़ा, लुकमान व भाटिया सहित दर्जनभर गांव नदी के किनारे बसे हैं। यहां बाढ़ आने पर सबसे अधिक नुकसान की आशंका रहती है।
घग्गर नदी में क्षेत्र की सीमा में कई ऐसे प्वाइंट हैं, जहां पर घग्गर नदी में कई जगह पर तटबंध पर कटाव है। वहीं, जगह-जगह पर चूहों ने बिल खोद हुए है और यही से पानी का रिसाव होने से तबाही मचती है। घग्गर नदी के किनारे के आसपास कुछ किसानों ने ट्यूबवेल लगा कर दूर के खेतों में पाइप लाइन अवैध रूप से डाली हुई हैं। जिससे तटबंध कमजोर हो गए है।
क्षेत्र में पुराने जख्म अभी भी ताजा
क्षेत्र में 1988, 1989, 1993, 1996, 2010 और 2023 में भीषण बाढ़ आ चुकी है। 1993 में 10 हजार एकड़ और 2023 में 33 हजार एकड़ से अधिक फसल तबाह हो गई थी। 2023 की बाढ़ में 70 से अधिक गांव प्रभावित हुए थे और कुछ ग्रामीणों को पलायन करना पड़ा था।ग्रामीण बताते हैं कि करीब 30 वर्ष पहले बनाए गए बांध अब कमजोर हो चुके हैं। हर साल केवल मरम्मत कर काम चलाया जा रहा है। घग्गर के साथ लगते गांव को बाढ़ से बचाने के लिए तटबंध व रिंग बांध बनाए गए हैं ताकि अधिक पानी आने से गांव में पानी प्रवेश नहीं हो पाए, लेकिन अब यही तटबंध बांध भी धीरे-धीरे कमजोर हो गए है।