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Kaithal News: डेढ़ साल में गलत इंजेक्शन से हरविंद्र की टांग की रुक गई थी ग्रोथ

Thu, 29 Aug 2024 05:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 29 Aug 2024 05:25 AM IST
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The growth of Harvindra's leg had stopped in one and a half years due to wrong injection.
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जिले के गांव अजीत नगर निवासी अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज हरविंद्र सिंह पेरिस पैरालिंपिक में निशाना लगाने के लिए 12 अगस्त को पेरिस पहुंच चुके हैं। इस बार वह रिकर्व मैन ओपन और रिकर्व मिक्स टीम दो इवेंट में भाग लेंगे। तीरंदाजी के मुकाबले 29 अगस्त से रैंकिंग शुरू होंगे। पिता ने बताया कि डेढ़ साल की आयु में गलत इंजेक्शन लगने से हरविंद्र की एक टांग की ग्रोथ रुक गई थी।

हरविंद्र सिंह पैरालिंपिक तीरंदाजी स्पर्धा में दूसरी बार भाग ले रहे हैं। इससे पहले हुए टोक्यो पैरालिंपिक में तीरंदाजी के रिकर्व इवेंट में देश को पहला कांस्य पदक दिलवाया था। इस बार भी उम्मीद है कि खिलाड़ी स्वर्ण पदक लेकर आएंगे। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए हरविंद्र को कड़ा संघर्ष करना पड़ा।
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साल 2012 में लंदन ओलिंपिक में टीवी पर तीरंदाजी का मैच देखा था। उसके कुछ दिन बाद ही पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला में में देश से छह खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।
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हरविंद्र सिंह ने काफी साल पहले ही तीरंदाजी का अभ्यास शुरू कर दिया था। उन्होंने साल 2018 में इंडोनेशिया में हुई तीसरी एशियन पैरा तीरंदाजी के रिकर्य इवेंट में स्वर्ण पदक हासिल किया था। एशियन पैरा चैंपियनशिप 2019 में कांस्य पदक और थाईलैंड में 2019 में हुई तीसरी एशियन पैरा तीरंदाजी के टीम इवेंट में कांस्य पदक जीता था। इनके अलावा भी हरविंद्र सिंह कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में पदक जीत चुके हैं।

हरविंद्र सिंह एक किसान परिवार से संबंध रखते हैं। पिता परमजीत सिंह खेती बाड़ी से घर का गुजारा करते हैं। जबकि उनकी मां की पहले ही मौत हो चुकी है। पिता परमजीत सिंह ने बताया कि 2010 में बीए करने के लिए पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला में दाखिला लिया। वहां हरिवंद्र कभी-कभी तीरंदाजी देखने के लिए मैदान पर चला जाता था।

साल 2012 के लंदन ओलिंपिक में तीरंदाजी का मैच टीवी पर देखा और वहीं से तीरंदाजी करने की प्रेरणा मिली। कुछ दिन बाद मैदान पर जाकर कोच से तीरंदाजी का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। लगातार चार साल अभ्यास करने के बाद भी उसका चयन भारतीय टीम में नहीं हुआ था।


चयन न होने से दुखी होकर उसने खेल छोड़ने का मन बना लिया था। तब कोच जीवनजोत ने तीरंदाजी न छोड़ने की सलाह दी। कोच की प्रेरणा से नए तरीके से खेल की शुरुआत की और पहले ही साल में नेशनल प्रतियोगिता में मेडल हासिल किया।
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