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Kaithal News: डोंकी की भेंट चढ़े मटौर के युवक का शव चार माह बाद पहुंचा गांव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 11 Jul 2023 12:27 AM IST
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The dead body of the youth reached Matour after four months
कलायत (कैथल)। डोंकी के रास्ते से अमेरिका जा रहे मटौर के युवक मलकीत का शव करीब चार माह बाद गांव पहुंचा। परिजनों की कड़ी मशक्कत के बाद उसका शव गांव पहुंचने के बाद सोमवार सुबह उसका अंतिम संस्कार किया गया। घर वालों ने बताया कि अमेरिका भिजवाने के लिए 40 लाख और मृतक शरीर को वापस मंगवाने पर करीब 19.5 लाख रुपये खर्च हुए। आंखों में आंसू लिए परिजनों ने कहा कि पुत्र और पैसा दोनों समाप्त हो जाने का गम पहाड़ बनकर उन पर टूट पड़ा है।
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मृतक के भाई राजीव ने बताया कि उसका 33 वर्षीय भाई मलकीत विदेश जाने की इच्छा रखता था। इस संबंध में वे लोग कैथल तलाई बाजार में मनी ट्रांसफर व विदेश भेजने का कार्य करने वाले एजेंट ईश्वर सिंह से मिले। उसने उन्हें बताया कि वह मलकीत को अमेरिका भेज देगा, जिसके 40 लाख रुपये लगेंगे। 20 लाख रुपये पहले, पांच लाख रुपये मलकीत को जाते समय और 15 लाख रुपये मलकीत के अमेरिका पहुंचने पर देने होंगे। उन्होंने वादे के अनुसार राशि एजेंट ईश्वर को दे दी। उन्होंने बताया कि 17 फरवरी को वे लोग एजेंट द्वारा दिए गए शेड्यूल के हिसाब से मलकीत को पांच लाख रुपये देकर इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर छोड़ आए। राजीव के मुताबिक, मलकीत से होते रहे संवाद के तहत पहली मार्च को उसे कजाकिस्तान के अलमाठी से इस्तांबुल भेजा गया। दो मार्च को उसे पनामा सिटी फिर सेल्वाडोर भेजा गया। उस ग्रुप में हरियाणा के 12 व पंजाब के आठ युवक शामिल थे। ग्रुप को ग्वाटेमाला से अमेरिका के लिए रवाना होना था। ग्वाटेमाला में ही उन पर पीछे से फायरिंग हुई। इसमें उसका भाई मारा गया। परिवार को एक वीडियो क्लिप में माध्यम से यह जानकारी मिली थी।
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मलकीत के भाई राजीव व भतीजे नन्हू राम ने बताया कि मृतक शरीर हासिल करने के लिए उन्होंने चार माह तक कड़ी मशक्कत की। ग्वाटेमाला में भारतीय दूतावास ने इस मामले में उन लोगों की बहुत मदद की। ग्वाटेमाला में अन आईडेंटिफाई शव का पोस्टमार्टम करके शव का दफना दिया था। एंबेसी में कार्यरत देवेंद्र कुमार ने उन लोगों की बहुत मदद की। पिछले तीन माह में पांच बार वीडियो कॉल के माध्यम से पेशी लगी। मृतक के माता-पिता का डीएनए मंगवाया गया और पूर्ण संतुष्टि होने के बाद शव को बाहर निकाल कर उनके गांव में पहुंचाया गया। नन्हू राम ने बताया कि एंबेसी द्वारा बार-बार एक ही बात कही गई कि इस तरह से अवैध रूप से डोंकी के माध्यम से अपने बच्चों को विदेश न भेजें। रास्ते में केवल खतरे ही खतरे हैं। उन्होंने कहा कि उन लोगों ने अपने परिवार का बेटा खो दिया, लेकिन इस बात की संतुष्टि है कि उसके पार्थिव शरीर का गांव की देवभूमि में अंतिम संस्कार किया।
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