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Kaithal News: डंकी रूट से गए नवीन का शव दो साल पहुंचा गांव
Sun, 25 May 2025 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 25 May 2025 12:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। पूंडरी कस्बे के साकरा गांव से डंकी रूट से अमेरिका जाने वाले नवीन का शव दो साल बाद गांव पहुंचा है। नवीन की मौत बेलारूस में हुई थी। शव के पहुंचने के बाद परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार किया।
परिजनों के अनुसार नवीन अपने परिवार में तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा था। वह एक छोटे किसान परिवार से था। साल 2023 में उसके पिता सुभाष चंद ने उसे डंकी रूट से अमेरिका भेजने का फैसला किया। नवीन ने आखिरी बार 22 अक्तूबर 2023 को परिवार से बात की थी। इसके बाद वह लापता हो गया। परिवार लगातार एजेंट के संपर्क में था। एजेंट हर बार यही कहता रहा कि नवीन रास्ते में है।
वर्ष 2024 तक परिवार को नवीन का कोई पता नहीं चल सका। फिर एक दिन नवीन के फोन से उसके एक दोस्त को कॉल आया। कॉल करने वाले ने बताया कि बेलारूस में एक युवक का शव मिला है। गांव के वीरेंद्र और राहुल ने बताया कि बेलारूस से भेजी गई वीडियो से नवीन की पहचान की गई। इसके बाद परिवार ने शव को गांव लाने की प्रक्रिया शुरू की।
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करीब दो साल तक परिवार नवीन के शव को भारत लाने की कोशिश करता रहा, लेकिन दो साल बाद ही वह अपने बेटे का शव भारत लाने में कामयाब रहे। आखिर शनिवार देर शाम नवीन का शव साकरा गांव पहुंचा। उसका अंतिम संस्कार किया।
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कैथल। पूंडरी कस्बे के साकरा गांव से डंकी रूट से अमेरिका जाने वाले नवीन का शव दो साल बाद गांव पहुंचा है। नवीन की मौत बेलारूस में हुई थी। शव के पहुंचने के बाद परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार किया।
परिजनों के अनुसार नवीन अपने परिवार में तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा था। वह एक छोटे किसान परिवार से था। साल 2023 में उसके पिता सुभाष चंद ने उसे डंकी रूट से अमेरिका भेजने का फैसला किया। नवीन ने आखिरी बार 22 अक्तूबर 2023 को परिवार से बात की थी। इसके बाद वह लापता हो गया। परिवार लगातार एजेंट के संपर्क में था। एजेंट हर बार यही कहता रहा कि नवीन रास्ते में है।
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वर्ष 2024 तक परिवार को नवीन का कोई पता नहीं चल सका। फिर एक दिन नवीन के फोन से उसके एक दोस्त को कॉल आया। कॉल करने वाले ने बताया कि बेलारूस में एक युवक का शव मिला है। गांव के वीरेंद्र और राहुल ने बताया कि बेलारूस से भेजी गई वीडियो से नवीन की पहचान की गई। इसके बाद परिवार ने शव को गांव लाने की प्रक्रिया शुरू की।
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करीब दो साल तक परिवार नवीन के शव को भारत लाने की कोशिश करता रहा, लेकिन दो साल बाद ही वह अपने बेटे का शव भारत लाने में कामयाब रहे। आखिर शनिवार देर शाम नवीन का शव साकरा गांव पहुंचा। उसका अंतिम संस्कार किया।