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Kaithal News: महाभारत का युद्ध जिस 48 कोस की धरती पर हुआ, वह पहचान को महरूम
Fri, 22 Nov 2024 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 22 Nov 2024 01:23 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महाभारत का युद्ध जिस 48 कोस की धरती पर लड़ा गया था, वह धरती आज भी अपनी वास्तविक पहचान से महरूम है। कुरुक्षेत्र जहां 48 कोस की परिधि का एक कोना भर है, वहां सरकार लगभग 20 करोड़ रुपये की राशि से भव्य कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
दूसरी ओर इस परिधि में शामिल कैथल जिले की 90 प्रतिशत भूमि पुकार रही है कि इधर भी ध्यान दो सरकार। स्वयं केडीबी ने स्वीकार किया है कि कुरु भूमि के 65 तीर्थ कैथल जिले की सीमा में हैं। इसके बावजूद यहां गीता जयंती उत्सव तो क्या किसी भी अवसर पर सरकार की ओर से कार्यक्रम नहीं होता।
कैथल जिले में पंजाब सीमा पर स्थित गांव बैहर-साहब में 48 कोस की भूमि के रक्षकों में से एक अरंतुक यक्ष का तीर्थ। इसके अलावा कैथल शहर, कलायत, सीवन, पूंडरी क्षेत्र के गांवों में महाभारत युद्ध के प्रमाण आज भी गवाही दे रहे हैं कि युद्ध इसी क्षेत्र में हुआ था।
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गांव सेरहधा को महाभारत युद्ध की मध्य भूमि माना जाता है। जहां सेना के बीच में पहुंच कर भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का संदेश दिया था। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा पूर्व में 51 और अब किए गए सर्वे में अकेले कैथल जिले में 65 तीर्थों की पहचान की है। जो कुरु भूमि में महाभारत से संबंधित हैं।
कैथल के इतिहास और महाभारतकालीन तीर्थों पर किताब लिख चुके इतिहासकार प्रो. बीबी भारद्वाज ने बताया कि केडीबी तो कुरुक्षेत्र विशेष रूप से ब्रह्मसरोवर से बाहर ही नहीं निकलना चाहता। कैथल के क्षेत्रफल का 90 प्रतिशत इलाका कुरु की 48 कोस की परिधि में आता है।
जहां पूर्व में केडीबी द्वारा यह स्वीकार किया गया कि यहां 51 तीर्थ हैं जबकि इससे भी अधिक तीर्थ इस भूमि में हैं। जिन पर कम से कम गीता जयंती उत्सव पर तो कार्यक्रम होने चाहिए। बेशक सभी जिलों में गीता जयंती मनाई जाती हो, लेकिन कैथल में विशेष आयोजनों का हक बनता है।
कैथल के महत्वपूर्ण तीर्थों में ये हैं शामिल
1. कैथल स्थित श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर
2. वृद्धकेदार सरोवर कैथल
3. कुलोत्तरण तीर्थ कुल्तारण
4. कोटी कोटेश्वर तीर्थ क्योड़क
5. वेदवती तीर्थ बलवंती
6. नैमिष तीर्थ नौच
7. श्रीकुंज तीर्थ भानपुर-नौच के निकट
8. वरुण तीर्थ रसूलपुर
9. सप्त तीर्थ मांडी
10. इक्षुमति तीर्थ पोलड़
11. स्वर्गद्वार तीर्थ सीवन
12. सुतीर्थ सौथ
13. ब्रह्मवत तीर्थ गौहरां खेड़ी
14. यक्ष तीर्थ बहर-साहब
15. ऋंगी तीर्थ सांघन
16. गोभवन गुहणा
17. मानुष मानस
18. आपगा गदली
19. सरक शेरगढ़
20. देवी देवगढ़
21. अंबा ढयोडखेड़ी
22. कपिलमुनि कलायत
23. खटवांगेश्वर खडालवा
24. मुक्टेश्वर मटौर
25. श्री कसान
26. रसमंगल बालू, सौंगल व जाखौली के बीच
27. चक्र सेरहधा
28. कुकृत्यनाशन काकौत
29. काव्य करोड़ा
30. हव्य भाणा
31. पूंडरीक पूंडरी
32. सूर्य हाबड़ी
33. विष्णुवर बरसाना
34. कुजोमी हजवाना
35. मधुवटी मोहना
36. श्रीवृष्टक टयोंठा
37. ऋणमोचन रसीना
38. अलेपम साकरा
39. कु कुंड धेरड़ू
40. आज्ञाचक्र आंहू
41. पवनहृदय तीर्थ
पबनावा
42. फल्गू फरल
43. पानिखात फरल
44. यज्ञसन ग्योंग
45. ब्रहमोद्वार सिल्लाखेड़ा
46. गढऱथेश्वर कौल
47. लवकुश मूंदड़ी
48. कपिलमुनि कौल
छोटी काशी के नाम से है प्रसिद्ध है श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर
चंदाना गेट स्थित प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर आस्था का केंद्र है। यह छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर का इतिहास महाभारत के युद्ध से जुड़ा है। किंवदंती के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने यहां 11 रुद्रों की स्थापना कर पांडवों से पूजा करवाई थी। तभी से यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जा रही है।
ऐसी मान्यता है कि श्री ग्यारह रुद्री मंदिर की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण ने उस समय की थी, जब कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया था। युद्ध की समाप्ति के बाद भगवान श्री कृष्ण ने कौरव और पांडवों के बीच हुए युद्ध में मारे गए सैनिकों की आत्मिक शांति के लिए पूजा करवाई व ग्यारह रुद्रों की स्थापना की थी। ऐसा भी माना जाता है कि महाभारत के समय अर्जुन ने मिश्रा पाशुपत अस्त्र प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की आराधना की थी और भगवान शिव ने इसी स्थान पर प्रसन्न होकर अर्जुन को दर्शन दिए थे।
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कैथल। महाभारत का युद्ध जिस 48 कोस की धरती पर लड़ा गया था, वह धरती आज भी अपनी वास्तविक पहचान से महरूम है। कुरुक्षेत्र जहां 48 कोस की परिधि का एक कोना भर है, वहां सरकार लगभग 20 करोड़ रुपये की राशि से भव्य कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
दूसरी ओर इस परिधि में शामिल कैथल जिले की 90 प्रतिशत भूमि पुकार रही है कि इधर भी ध्यान दो सरकार। स्वयं केडीबी ने स्वीकार किया है कि कुरु भूमि के 65 तीर्थ कैथल जिले की सीमा में हैं। इसके बावजूद यहां गीता जयंती उत्सव तो क्या किसी भी अवसर पर सरकार की ओर से कार्यक्रम नहीं होता।
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कैथल जिले में पंजाब सीमा पर स्थित गांव बैहर-साहब में 48 कोस की भूमि के रक्षकों में से एक अरंतुक यक्ष का तीर्थ। इसके अलावा कैथल शहर, कलायत, सीवन, पूंडरी क्षेत्र के गांवों में महाभारत युद्ध के प्रमाण आज भी गवाही दे रहे हैं कि युद्ध इसी क्षेत्र में हुआ था।
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गांव सेरहधा को महाभारत युद्ध की मध्य भूमि माना जाता है। जहां सेना के बीच में पहुंच कर भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का संदेश दिया था। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा पूर्व में 51 और अब किए गए सर्वे में अकेले कैथल जिले में 65 तीर्थों की पहचान की है। जो कुरु भूमि में महाभारत से संबंधित हैं।
कैथल के इतिहास और महाभारतकालीन तीर्थों पर किताब लिख चुके इतिहासकार प्रो. बीबी भारद्वाज ने बताया कि केडीबी तो कुरुक्षेत्र विशेष रूप से ब्रह्मसरोवर से बाहर ही नहीं निकलना चाहता। कैथल के क्षेत्रफल का 90 प्रतिशत इलाका कुरु की 48 कोस की परिधि में आता है।
जहां पूर्व में केडीबी द्वारा यह स्वीकार किया गया कि यहां 51 तीर्थ हैं जबकि इससे भी अधिक तीर्थ इस भूमि में हैं। जिन पर कम से कम गीता जयंती उत्सव पर तो कार्यक्रम होने चाहिए। बेशक सभी जिलों में गीता जयंती मनाई जाती हो, लेकिन कैथल में विशेष आयोजनों का हक बनता है।
कैथल के महत्वपूर्ण तीर्थों में ये हैं शामिल
1. कैथल स्थित श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर
2. वृद्धकेदार सरोवर कैथल
3. कुलोत्तरण तीर्थ कुल्तारण
4. कोटी कोटेश्वर तीर्थ क्योड़क
5. वेदवती तीर्थ बलवंती
6. नैमिष तीर्थ नौच
7. श्रीकुंज तीर्थ भानपुर-नौच के निकट
8. वरुण तीर्थ रसूलपुर
9. सप्त तीर्थ मांडी
10. इक्षुमति तीर्थ पोलड़
11. स्वर्गद्वार तीर्थ सीवन
12. सुतीर्थ सौथ
13. ब्रह्मवत तीर्थ गौहरां खेड़ी
14. यक्ष तीर्थ बहर-साहब
15. ऋंगी तीर्थ सांघन
16. गोभवन गुहणा
17. मानुष मानस
18. आपगा गदली
19. सरक शेरगढ़
20. देवी देवगढ़
21. अंबा ढयोडखेड़ी
22. कपिलमुनि कलायत
23. खटवांगेश्वर खडालवा
24. मुक्टेश्वर मटौर
25. श्री कसान
26. रसमंगल बालू, सौंगल व जाखौली के बीच
27. चक्र सेरहधा
28. कुकृत्यनाशन काकौत
29. काव्य करोड़ा
30. हव्य भाणा
31. पूंडरीक पूंडरी
32. सूर्य हाबड़ी
33. विष्णुवर बरसाना
34. कुजोमी हजवाना
35. मधुवटी मोहना
36. श्रीवृष्टक टयोंठा
37. ऋणमोचन रसीना
38. अलेपम साकरा
39. कु कुंड धेरड़ू
40. आज्ञाचक्र आंहू
41. पवनहृदय तीर्थ
पबनावा
42. फल्गू फरल
43. पानिखात फरल
44. यज्ञसन ग्योंग
45. ब्रहमोद्वार सिल्लाखेड़ा
46. गढऱथेश्वर कौल
47. लवकुश मूंदड़ी
48. कपिलमुनि कौल
छोटी काशी के नाम से है प्रसिद्ध है श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर
चंदाना गेट स्थित प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर आस्था का केंद्र है। यह छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर का इतिहास महाभारत के युद्ध से जुड़ा है। किंवदंती के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने यहां 11 रुद्रों की स्थापना कर पांडवों से पूजा करवाई थी। तभी से यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जा रही है।
ऐसी मान्यता है कि श्री ग्यारह रुद्री मंदिर की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण ने उस समय की थी, जब कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया था। युद्ध की समाप्ति के बाद भगवान श्री कृष्ण ने कौरव और पांडवों के बीच हुए युद्ध में मारे गए सैनिकों की आत्मिक शांति के लिए पूजा करवाई व ग्यारह रुद्रों की स्थापना की थी। ऐसा भी माना जाता है कि महाभारत के समय अर्जुन ने मिश्रा पाशुपत अस्त्र प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की आराधना की थी और भगवान शिव ने इसी स्थान पर प्रसन्न होकर अर्जुन को दर्शन दिए थे।