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बेरोजगारी भत्ते में गबड़बड़ी की जांच के लिए टीम गठित
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जिला रोजगार कार्यालय में बेरोजगारों को दिए जाने वाले भत्ते में गड़बड़ी के मामले की जांच के लिए विभाग मुख्यालय ने चार सदस्यीय टीम का गठन किया है। इसमें तीन सदस्य रोजगार विभाग से तो एक सदस्य डीसी कैथल का प्रतिनिधि होगा। इस कमेटी को एक सप्ताह में रिपोर्ट देनी होगी। जल्द ही कमेटी सदस्यों के नाम जिलास्तर पर भेजे जाएंगे। इस मामले में विभाग का अधिकारी एक बार कैथल का दौरा कर चुका है।
विदित रहे कि जिला रोजगार कार्यालय के माध्यम से दिया जाने वाला बेरोजगारी भत्ता, सक्षम युवाओं को दिए जाने वाले भुगतान में लाखों रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई थी। विभागीय अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में जो गड़बड़ी पकड़ी थी, उसके बाद अनुमानित तीन से चार लाख रुपये की राशि तो जमा करवा ली गई है। यह राशि किस व्यक्ति से जमा करवाई है, ये जानकारी नहीं दी जा रही। लेकिन विभाग अपनी रिकवरी कर चुका है। इसके बाद जिला रोजगार अधिकारी ने इस मामले की सूचना डीसी प्रदीप दहिया को देते हुए विभाग को भी सूचित किया है।
मामले में जिला प्रशासन के साथ ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से काम कर रही कॉमन सर्विस सेंटर कंपनी के जिला स्तरीय कर्मचारी की सेवाएं इसी घोटाले में संदेह के आधार पर समाप्त हो चुकी हैं। अधिकारियों के चौतरफा दबाव के कारण यह कर्मचारी खुद ही इस्तीफा देकर नौकरी छोड़कर चला गया।
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बताया जा रहा है कि नौकरी में रहते हुए इस व्यक्ति ने खुद भी सक्षम योजना का लाभ लिया है। साथ ही उसके कई रिश्तेदारों और जानकारों के भी कॉमन सर्विस सेंटर खुले हैं। इन्हीं में से किसी में बेरोजगारों के विभाग में भत्ते के लिए खाते खोलते समय कागजों में हेराफेरी हुई और लाखों रुपये की राशि पात्र बेरोजगारों को न मिलकर कथित रूप से ठगी के जाल में खोले गए खातों में जा रही थी। जिसे विभागी अधिकारियों ने सामने आने पर जांच की तो लाखों रुपये का घोटाला सामने आया। लेकिन विभाग इस बारे में कुछ भी जानकारी देने को तैयार नहीं है। यहां कार्यरत जिला रोजगार अधिकारी रीतू चहल ने बस इतना बताया था कि डीसी और विभाग मुख्यालय के अधिकारियों को इस बारे में अवगत करवा दिया गया है।
रोजगार विभाग की निदेशक शरणजीत कौर बराड़ ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि इस मामले की जांच अब चार अधिकारियों की कमेटी करेगी। इसमें एक सदस्य डीसी कैथल का भी प्रतिनिधि होगा। कितने लाख की गड़बड़ी है, यह जांच के बाद पता चलेगा। विभाग द्वारा अब तक हुई कार्रवाई भी आवश्यक लोगों के साथ साझा की जाएगी।
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विदित रहे कि जिला रोजगार कार्यालय के माध्यम से दिया जाने वाला बेरोजगारी भत्ता, सक्षम युवाओं को दिए जाने वाले भुगतान में लाखों रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई थी। विभागीय अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में जो गड़बड़ी पकड़ी थी, उसके बाद अनुमानित तीन से चार लाख रुपये की राशि तो जमा करवा ली गई है। यह राशि किस व्यक्ति से जमा करवाई है, ये जानकारी नहीं दी जा रही। लेकिन विभाग अपनी रिकवरी कर चुका है। इसके बाद जिला रोजगार अधिकारी ने इस मामले की सूचना डीसी प्रदीप दहिया को देते हुए विभाग को भी सूचित किया है।
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मामले में जिला प्रशासन के साथ ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से काम कर रही कॉमन सर्विस सेंटर कंपनी के जिला स्तरीय कर्मचारी की सेवाएं इसी घोटाले में संदेह के आधार पर समाप्त हो चुकी हैं। अधिकारियों के चौतरफा दबाव के कारण यह कर्मचारी खुद ही इस्तीफा देकर नौकरी छोड़कर चला गया।
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बताया जा रहा है कि नौकरी में रहते हुए इस व्यक्ति ने खुद भी सक्षम योजना का लाभ लिया है। साथ ही उसके कई रिश्तेदारों और जानकारों के भी कॉमन सर्विस सेंटर खुले हैं। इन्हीं में से किसी में बेरोजगारों के विभाग में भत्ते के लिए खाते खोलते समय कागजों में हेराफेरी हुई और लाखों रुपये की राशि पात्र बेरोजगारों को न मिलकर कथित रूप से ठगी के जाल में खोले गए खातों में जा रही थी। जिसे विभागी अधिकारियों ने सामने आने पर जांच की तो लाखों रुपये का घोटाला सामने आया। लेकिन विभाग इस बारे में कुछ भी जानकारी देने को तैयार नहीं है। यहां कार्यरत जिला रोजगार अधिकारी रीतू चहल ने बस इतना बताया था कि डीसी और विभाग मुख्यालय के अधिकारियों को इस बारे में अवगत करवा दिया गया है।
रोजगार विभाग की निदेशक शरणजीत कौर बराड़ ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि इस मामले की जांच अब चार अधिकारियों की कमेटी करेगी। इसमें एक सदस्य डीसी कैथल का भी प्रतिनिधि होगा। कितने लाख की गड़बड़ी है, यह जांच के बाद पता चलेगा। विभाग द्वारा अब तक हुई कार्रवाई भी आवश्यक लोगों के साथ साझा की जाएगी।