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Kaithal News: स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने भगवत गीता के गूढ़ संदेशों का महत्व समझाया

Fri, 19 Sep 2025 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 19 Sep 2025 01:00 AM IST
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Swami Gyananand Maharaj explained the significance of the profound messages of the Bhagavad Gita.
34... कार्यक्रम में प्रवचन करते ज्ञानानंद महाराज। प्रवक्ता 
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। श्री गीता भवन मंदिर में एक विशेष संकीर्तन कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मेडिकल जीओ गीता और श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति द्वारा भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव का अनूठा अवसर प्रदान किया गया। इस मौके पर विशेष रूप से पधारे गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने न केवल भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद दिए, बल्कि भगवत गीता के गूढ़ संदेशों का महत्व समझाया।
संकीर्तन में भक्ति संगीत और भगवान श्रीकृष्ण के नाम का गुणगान किया गया। संकल्प, ध्यान और आरती के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। पूरे वातावरण में भक्ति की अनूठी सुगंध फैल गई और श्रद्धालु भावविभोर होकर श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन हो गए। स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि कैथल एक ऐतिहासिक नगर है, जिसका संबंध रामायण काल से भी जुड़ा हुआ है। यह भूमि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से सदैव समृद्ध रही है। उन्होंने कहा कि भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि यह जीवन के हर पहलू में मार्गदर्शन देने वाला प्रेरणास्रोत है। विशेषकर उन्होंने गीता के युद्धभूमि में अर्जुन को दिए गए उपदेशों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह भ्रामक धारणा रखते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता सुनाकर अर्जुन को युद्ध के लिए उकसाया। स्वामी ने स्पष्ट किया कि यह विचार अविवेकपूर्ण है। युद्ध होना ही था, परिस्थिति ऐसी थी कि कौरवों ने पांडवों पर युद्ध थोप दिया था। उस समय अर्जुन एक सैनिक की भूमिका में था और उसका कर्तव्य बनता था कि वह युद्ध के लिए तैयार हो। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उसके धर्म और कर्तव्य की याद दिलाई।
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भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के माध्यम से यह सिखाया कि जब अन्याय और अधर्म का विस्तार हो रहा हो, तब धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष करना भी आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि यदि मन सकारात्मक है तो वह अपने लिए रास्ता खुद बना लेता है। हर परिस्थिति में भगवान का धन्यवाद करना चाहिए। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कैलाश भगत की धर्मपत्नी रानी भगत एवं चेयरपर्सन सुरभी गर्ग ने स्वामी ज्ञानानंद का स्वागत किया। कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण के साथ हुआ। इस अवसर पर संजय गर्ग, अश्वनी खुराना, सुजीत कपूर, सुषम कपूर, रजत थरेजा, अजय भंजाना, गुलशन पपरेजा, सुनील खुराना, शरद, डॉ. विकास गुप्ता (चेयरमैन, मेडिकल जीओ गीता), डॉ. पंकज आदि मौजूद रहे।
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शिक्षा के क्षेत्र में भी गीता का अद्वितीय योगदान :

स्वामी ज्ञानानंद जी ने कहा कि गीता सिर्फ युद्ध या धर्म की बात नहीं करती, यह एक शिक्षण पद्धति है। इसमें शिक्षक और शिष्य के संबंधों की सर्वोत्तम व्याख्या की गई है। भगवान श्रीकृष्ण एक आदर्श शिक्षक की तरह अर्जुन के मन के संदेहों को शांत करते हैं और उसे आत्मज्ञान की ओर प्रेरित करते हैं। अर्जुन एक जिज्ञासु शिष्य की भूमिका में है, जो अपने गुरु से दिशा पाने के लिए प्रस्तुत है। आज के शिक्षकों और छात्रों के लिए गीता मूल्य आधारित शिक्षा का मार्गदर्शन करती है। शिक्षा का उद्देश्य चिंतन और सकारात्मक सोच को विकसित करना होना चाहिए।

34... कार्यक्रम में प्रवचन करते ज्ञानानंद महाराज। प्रवक्ता 

34... कार्यक्रम में प्रवचन करते ज्ञानानंद महाराज। प्रवक्ता 

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