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Kaithal News: महाभारतकालीन आस्था का केंद्र है सूर्यकुंड डेरा का मनकामेश्वर मंदिर
Sat, 19 Jul 2025 12:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 19 Jul 2025 12:06 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर के माता गेट पर स्थित सूर्यकुंड डेरे में स्थापित मनकामेश्वर मंदिर को महाभारतकालीन माना जाता है। सावन के पावन महीने में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। न सिर्फ शहर से बल्कि आसपास के गांवों और दूर-दराज़ के इलाकों से भी श्रद्धालु भोलेनाथ का जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं।
मान्यता है कि महाभारत काल में जब महाराजा युधिष्ठिर ने नवग्रहों की स्थापना कैथल में की थी, तब उन्होंने इस मंदिर का भी निर्माण कराया था। यह मंदिर लगभग 5100 वर्ष पुराना बताया जाता है।
शिवलिंग है प्राचीन, सावन में उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब : मंदिर में स्थापित शिवलिंग प्राचीन है और श्रद्धालु इसे विशेष रूप से मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला मानते हैं।
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सावन के पावन अवसर पर यहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण बना
हुआ है।
48 कोस परिक्रमा में शामिल है यह स्थान
सूर्यकुंड डेरे के महंत रमनपुरी के अनुसार, यह स्थान कुरुक्षेत्र की 48 कोस परिक्रमा का हिस्सा है। प्राचीन मान्यता के अनुसार, युधिष्ठिर ने कैथल में नवग्रह कुंडों की स्थापना की थी, जिसमें सबसे बड़ा सूर्यकुंड माता गेट पर बनाया गया। इसी के समीप उन्होंने शिव मंदिर की स्थापना की, जिसे आज मनकामेश्वर मंदिर के रूप में जाना जाता है। महंत के अनुसार, महाभारत के युद्ध के दौरान हुए भारी रक्तपात के कारण भूमि की पवित्रता के लिए इन कुंडों की स्थापना की गई थी। सूर्यकुंड के अलावा कैथल में शनि कुंड, शुक्र कुंड, गुरु कुंड, बुध कुंड, मंगल कुंड, राहु-केतु व चंद्र कुंड भी स्थापित किए गए थे।
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कैथल। शहर के माता गेट पर स्थित सूर्यकुंड डेरे में स्थापित मनकामेश्वर मंदिर को महाभारतकालीन माना जाता है। सावन के पावन महीने में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। न सिर्फ शहर से बल्कि आसपास के गांवों और दूर-दराज़ के इलाकों से भी श्रद्धालु भोलेनाथ का जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं।
मान्यता है कि महाभारत काल में जब महाराजा युधिष्ठिर ने नवग्रहों की स्थापना कैथल में की थी, तब उन्होंने इस मंदिर का भी निर्माण कराया था। यह मंदिर लगभग 5100 वर्ष पुराना बताया जाता है।
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शिवलिंग है प्राचीन, सावन में उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब : मंदिर में स्थापित शिवलिंग प्राचीन है और श्रद्धालु इसे विशेष रूप से मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला मानते हैं।
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सावन के पावन अवसर पर यहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण बना
हुआ है।
48 कोस परिक्रमा में शामिल है यह स्थान
सूर्यकुंड डेरे के महंत रमनपुरी के अनुसार, यह स्थान कुरुक्षेत्र की 48 कोस परिक्रमा का हिस्सा है। प्राचीन मान्यता के अनुसार, युधिष्ठिर ने कैथल में नवग्रह कुंडों की स्थापना की थी, जिसमें सबसे बड़ा सूर्यकुंड माता गेट पर बनाया गया। इसी के समीप उन्होंने शिव मंदिर की स्थापना की, जिसे आज मनकामेश्वर मंदिर के रूप में जाना जाता है। महंत के अनुसार, महाभारत के युद्ध के दौरान हुए भारी रक्तपात के कारण भूमि की पवित्रता के लिए इन कुंडों की स्थापना की गई थी। सूर्यकुंड के अलावा कैथल में शनि कुंड, शुक्र कुंड, गुरु कुंड, बुध कुंड, मंगल कुंड, राहु-केतु व चंद्र कुंड भी स्थापित किए गए थे।