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छह किलोमीटर पैदल चलकर कॉलेज पहुंच रहे विद्यार्थी, छूट रही हैं कक्षाएं
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Students reaching the college by walking six kilometers, are missing classes
- फोटो : Kaithal
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अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर स्थित महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय व डा. भीमराव आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय के विद्यार्थियों को इन संस्थानों में पहुंचने व वापस घर पहुंचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उनका आने-जाने में ही दो से तीन घंटे का समय व पैसा खराब हो रहा है। जिस कारण कक्षाएं नहीं लगा पा रहे हैं। न केवल विद्यार्थियों बल्कि दोनों संस्थानों से अधिकारियों ने भी प्रशासन से यातायात सुविधा की मांग की है। अमर उजाला टीम ने वीरवार को विद्यार्थियों व संबंधित अधिकारियों से सीधी बातचीत कर पड़ताल की।
दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों ने बताया कि जिले भर से भारी संख्या में विद्यार्थी इन संस्थानों में पढऩे आते हैं। कई विद्यार्थियों को कक्षाएं लगाने के बाद शहर में कोचिंग सेंटरों में कोचिंग के लिए जाना होता है। लेकिन बस अड्डे से कॉलेज व विश्वविद्यालय तक पहुंचने में ही उनका समय खराब हो जाता है। बीच में कैथल ड्रेन पर बन रहे पुल के कारण परेशानियां बढ़ गई हैं। इस पुल के कारण आवाजाही बंद की गई है। जो विद्यार्थी निजी वाहनों से जाना चाहते हैं, उन्हें छह किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करके नए बाईपास से होकर डीपीएस स्कूल के निकट से होकर वापस कॉलेज की ओर आना पड़ता है। जिस कारण समय व पैसा दोनों खराब हो रहे हैं। कई विद्यार्थी ड्रेन पुल से कॉलेज तक पैदल ही जाने को मजबूर हैं। विद्यार्थियों ने इस समस्या के समाधान की मांग की है।
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तृतीय वर्ष के छात्र अमन का कहना है कि बस अड्डे से विवि तक बस की सुविधा न होने से विद्यार्थियों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यहां बसों की सुविधा हो जाए तो विद्यार्थी समय पर संस्थान पहुंचेंगे। बस लगाकर विद्यार्थियों की समस्या का समाधान किया जाए।
पैदल ड्रेन की ओर आ रहे छात्र अंकित का कहना है कि बसों की सुविधा न होने विद्यार्थियों को लगभग छह किलोमीटर दूर बस अड्डे पर पैदल पहुंचना पड़ता है। विवि के गेट के बाहर कई घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। इससे छात्रों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
आचार्य वेद की छात्रा सोनिया का कहना है कि बसों की सुविधा न होने से विद्यार्थी छह किलोमीटर तक पैदल जाने को मजबूर हो रहे हैं। बीच रास्ते में ड्रेन का पुल निर्माणाधीन होने से समस्या हो भी हो रही है। महाविद्यालय व विवि के लिए बसों का संचालन शुरू किया जाए।
छात्रा सुमन दोपहर को पैदल संस्थान में पहुंचना पड़ता है। इससे कई बार कक्षाएं भी मिस हो जाती हैं। ऑटो में 40-50 किराये का भुगतान करना पड़ता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ रहा है। उन्होंने शिक्षण संस्थान स्पेशल बसें चलाए जाने की मांग की।
महाविद्यालय प्राचार्या सुनीता आरोड़ा ने कहा कि एक अक्तूबर से ऑफलाइन कक्षाएं आरंभ हुई थीं। तभी रोडवेज जीएम को बसें के संचालन को लेकर पत्र लिखा गया था। उसके बाद बसें चलाई गई। उसके बाद सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ और बसें भी बंद हो गई। इस बारे में जिला प्रशासन व परिवहन विभाग को भी पत्र लिखा गया है, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों है। इससे विद्यार्थियों को काफी समस्या हो रही है।
डिपो महाप्रबंधक अजय गर्ग ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। डिपो में बसों की काफी कमी है। पिहोवा व अंबाला-चंडीगढ़ की ओर जाने वाली बसों को सड़क निर्माण के चलते डायवर्ट किया गया है। स्पेशल बसें चलाने में समस्या हो रही है।
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उनका आने-जाने में ही दो से तीन घंटे का समय व पैसा खराब हो रहा है। जिस कारण कक्षाएं नहीं लगा पा रहे हैं। न केवल विद्यार्थियों बल्कि दोनों संस्थानों से अधिकारियों ने भी प्रशासन से यातायात सुविधा की मांग की है। अमर उजाला टीम ने वीरवार को विद्यार्थियों व संबंधित अधिकारियों से सीधी बातचीत कर पड़ताल की।
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दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों ने बताया कि जिले भर से भारी संख्या में विद्यार्थी इन संस्थानों में पढऩे आते हैं। कई विद्यार्थियों को कक्षाएं लगाने के बाद शहर में कोचिंग सेंटरों में कोचिंग के लिए जाना होता है। लेकिन बस अड्डे से कॉलेज व विश्वविद्यालय तक पहुंचने में ही उनका समय खराब हो जाता है। बीच में कैथल ड्रेन पर बन रहे पुल के कारण परेशानियां बढ़ गई हैं। इस पुल के कारण आवाजाही बंद की गई है। जो विद्यार्थी निजी वाहनों से जाना चाहते हैं, उन्हें छह किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करके नए बाईपास से होकर डीपीएस स्कूल के निकट से होकर वापस कॉलेज की ओर आना पड़ता है। जिस कारण समय व पैसा दोनों खराब हो रहे हैं। कई विद्यार्थी ड्रेन पुल से कॉलेज तक पैदल ही जाने को मजबूर हैं। विद्यार्थियों ने इस समस्या के समाधान की मांग की है।
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तृतीय वर्ष के छात्र अमन का कहना है कि बस अड्डे से विवि तक बस की सुविधा न होने से विद्यार्थियों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यहां बसों की सुविधा हो जाए तो विद्यार्थी समय पर संस्थान पहुंचेंगे। बस लगाकर विद्यार्थियों की समस्या का समाधान किया जाए।
पैदल ड्रेन की ओर आ रहे छात्र अंकित का कहना है कि बसों की सुविधा न होने विद्यार्थियों को लगभग छह किलोमीटर दूर बस अड्डे पर पैदल पहुंचना पड़ता है। विवि के गेट के बाहर कई घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। इससे छात्रों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
आचार्य वेद की छात्रा सोनिया का कहना है कि बसों की सुविधा न होने से विद्यार्थी छह किलोमीटर तक पैदल जाने को मजबूर हो रहे हैं। बीच रास्ते में ड्रेन का पुल निर्माणाधीन होने से समस्या हो भी हो रही है। महाविद्यालय व विवि के लिए बसों का संचालन शुरू किया जाए।
छात्रा सुमन दोपहर को पैदल संस्थान में पहुंचना पड़ता है। इससे कई बार कक्षाएं भी मिस हो जाती हैं। ऑटो में 40-50 किराये का भुगतान करना पड़ता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ रहा है। उन्होंने शिक्षण संस्थान स्पेशल बसें चलाए जाने की मांग की।
महाविद्यालय प्राचार्या सुनीता आरोड़ा ने कहा कि एक अक्तूबर से ऑफलाइन कक्षाएं आरंभ हुई थीं। तभी रोडवेज जीएम को बसें के संचालन को लेकर पत्र लिखा गया था। उसके बाद बसें चलाई गई। उसके बाद सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ और बसें भी बंद हो गई। इस बारे में जिला प्रशासन व परिवहन विभाग को भी पत्र लिखा गया है, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों है। इससे विद्यार्थियों को काफी समस्या हो रही है।
डिपो महाप्रबंधक अजय गर्ग ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। डिपो में बसों की काफी कमी है। पिहोवा व अंबाला-चंडीगढ़ की ओर जाने वाली बसों को सड़क निर्माण के चलते डायवर्ट किया गया है। स्पेशल बसें चलाने में समस्या हो रही है।