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Kaithal News: हैपेटाइटिस-बी, सी के सैंपल लेने हुए शुरू
Sat, 24 Aug 2024 04:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 24 Aug 2024 04:46 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में हैपेटाइटिस-बी व सी के मरीजों काे राहत देते हुए जिला स्तर पर सैंपल की जांच का कार्य शुरू कर दिया है। ऐसे में अब मरीजों की रिपोर्ट में हो रही देरी की समस्या से निजात मिलेगी।
गौरतलब है कि पिछले करीब एक साल से रिपोर्ट आने में देरी हो रही थी। ऐसे में अब कलायत की कोरोना जांच लैब से सैंपल लेने का कार्य शुरू किया गया है। एक बार पहले भी कलायत की लैब में सैंपल की जांच शुरू की थी, लेकिन दो महीने के बाद सैंपल की किट खत्म हो गई थी। करीब डेढ़ साल से इस लैब में जांच सुविधा बंद होने से मरीजों को दिल्ली और पंचकूला जाकर सैंपल कराना पड़ रहा था।
उल्लेखनीय है प्रदेश में फतेहाबाद इस बीमारी के मरीजों के संदर्भ में अव्वल नंबर पर है। वहीं, जिले का दूसरा स्थान है। जिले में काला पीलिया के सबसे अधिक मामले में राजौंद व गुहला क्षेत्र में है। ऐसे में जिले में हर सप्ताह 30 से 40 सैंपल होते हैं। इसके अनुसार प्रति महीने में करीब 150 सैंपल लिए जाते हैं।
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अब स्थानीय स्तर पर ही सैंपल लेने की प्रकिया शुरू होने के बाद मरीजों को इसकी रिपोर्ट जल्द मिल सकेगी। सैंपल लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला नागरिक अस्पताल में सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, वीरवार और शुक्रवार तय किए हैं। हालांकि पहले दिल्ली और पंचकूला में सैंपलों को भेजा जाता था। इस दौरान करनाल स्थित कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में सैंपल भेजे जाते थे।
जिले में हैं 200 एक्टिव मरीज, कई हो चुके हैं ठीक
इस समय पूरे जिले में काला पीलिया के पंजीकृत मरीजों की संख्या करीब 13 हजार से अधिक है। दिल्ली और पंचकूला सहित करनाल में सैंपल भेजने के चलते देरी से रिपोर्ट आने पर मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। इस समय जिले में करीब 200 सक्रिय मरीज हैं, जिनका इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बीमारी के संदर्भ में लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है, लेकिन मशक्कत के बावजूद इसके केस लगातार बढ़ रहे हैं।
बता दें कि काला पीलिया के मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जांच से लेकर दवाएं निशुल्क दी जाती हैं। ओपीडी में रोजाना सात से आठ नए मरीज सामने आ रहे हैं। लक्षण नजर आने के बाद कूपन देकर सैंपल लिया जाता है। रिपोर्ट में काला पीलिया की पुष्टि होने के बाद इलाज शुरू किया जाता है।
सैंपल किट न मिलने के कारण पहले दिल्ली और पंचकूला व करनाल से ही काला पीलिया के मरीजों की जांच करवाई जाती थी। अब सरकार ने कैथल में भी सैंपल किट दे दी है। इसके बाद अब कलायत स्थित लैब से काला पीलिया की जांच शुरू करवा दी गई है। - डॉ. सचिन मांडले, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल
ये बरतें सावधानी
यदि किसी परिवार का सदस्य हेपेटाइटिस संक्रमित है तो उन्हें सावधान रहने की आवश्यकता है। संक्रमित व्यक्ति के सामान का इस्तेमाल करने से परहेज करें। साथ ही उसका झूठा खाना भी नहीं खाना चाहिए।
ये हैं काला पीलिया के लक्षण
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लगातार बुखार होना।
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लगातार त्वचा, आंखों में पीलापन रहना।
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थकान रहना और भूख नहीं लगना।
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ज्यादा उल्टी आना।
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वजन कम होना और पेट में दर्द रहना।
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कैथल। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में हैपेटाइटिस-बी व सी के मरीजों काे राहत देते हुए जिला स्तर पर सैंपल की जांच का कार्य शुरू कर दिया है। ऐसे में अब मरीजों की रिपोर्ट में हो रही देरी की समस्या से निजात मिलेगी।
गौरतलब है कि पिछले करीब एक साल से रिपोर्ट आने में देरी हो रही थी। ऐसे में अब कलायत की कोरोना जांच लैब से सैंपल लेने का कार्य शुरू किया गया है। एक बार पहले भी कलायत की लैब में सैंपल की जांच शुरू की थी, लेकिन दो महीने के बाद सैंपल की किट खत्म हो गई थी। करीब डेढ़ साल से इस लैब में जांच सुविधा बंद होने से मरीजों को दिल्ली और पंचकूला जाकर सैंपल कराना पड़ रहा था।
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उल्लेखनीय है प्रदेश में फतेहाबाद इस बीमारी के मरीजों के संदर्भ में अव्वल नंबर पर है। वहीं, जिले का दूसरा स्थान है। जिले में काला पीलिया के सबसे अधिक मामले में राजौंद व गुहला क्षेत्र में है। ऐसे में जिले में हर सप्ताह 30 से 40 सैंपल होते हैं। इसके अनुसार प्रति महीने में करीब 150 सैंपल लिए जाते हैं।
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अब स्थानीय स्तर पर ही सैंपल लेने की प्रकिया शुरू होने के बाद मरीजों को इसकी रिपोर्ट जल्द मिल सकेगी। सैंपल लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला नागरिक अस्पताल में सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, वीरवार और शुक्रवार तय किए हैं। हालांकि पहले दिल्ली और पंचकूला में सैंपलों को भेजा जाता था। इस दौरान करनाल स्थित कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में सैंपल भेजे जाते थे।
जिले में हैं 200 एक्टिव मरीज, कई हो चुके हैं ठीक
इस समय पूरे जिले में काला पीलिया के पंजीकृत मरीजों की संख्या करीब 13 हजार से अधिक है। दिल्ली और पंचकूला सहित करनाल में सैंपल भेजने के चलते देरी से रिपोर्ट आने पर मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। इस समय जिले में करीब 200 सक्रिय मरीज हैं, जिनका इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बीमारी के संदर्भ में लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है, लेकिन मशक्कत के बावजूद इसके केस लगातार बढ़ रहे हैं।
बता दें कि काला पीलिया के मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जांच से लेकर दवाएं निशुल्क दी जाती हैं। ओपीडी में रोजाना सात से आठ नए मरीज सामने आ रहे हैं। लक्षण नजर आने के बाद कूपन देकर सैंपल लिया जाता है। रिपोर्ट में काला पीलिया की पुष्टि होने के बाद इलाज शुरू किया जाता है।
सैंपल किट न मिलने के कारण पहले दिल्ली और पंचकूला व करनाल से ही काला पीलिया के मरीजों की जांच करवाई जाती थी। अब सरकार ने कैथल में भी सैंपल किट दे दी है। इसके बाद अब कलायत स्थित लैब से काला पीलिया की जांच शुरू करवा दी गई है। - डॉ. सचिन मांडले, प्रधान चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल
ये बरतें सावधानी
यदि किसी परिवार का सदस्य हेपेटाइटिस संक्रमित है तो उन्हें सावधान रहने की आवश्यकता है। संक्रमित व्यक्ति के सामान का इस्तेमाल करने से परहेज करें। साथ ही उसका झूठा खाना भी नहीं खाना चाहिए।
ये हैं काला पीलिया के लक्षण
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लगातार बुखार होना।
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लगातार त्वचा, आंखों में पीलापन रहना।
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थकान रहना और भूख नहीं लगना।
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ज्यादा उल्टी आना।
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वजन कम होना और पेट में दर्द रहना।