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Kaithal News: तेरे आंगन की सोन चिरैया, ऊंची उड़ान भरने दो...

Mon, 07 Oct 2024 06:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 07 Oct 2024 06:05 AM IST
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Son of your courtyard, let it fly high...
कैथल। राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था शब्दाक्षर की ओर से रविवार को साहित्य सभा के सदस्यों के सहयोग से गांव काकौत में काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस काव्य-गोष्ठी में बलवान कुंडू ने मुख्य अतिथि के रूप में और नीरु मेहता ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। गोष्ठी की अध्यक्षता साहित्य सभा की महिला प्रतिनिधि मधु गोयल मधुल ने की। सतबीर जागलान ने कहा, ‘तेरे आंगन की सोन चिरैया, ऊंची उड़ान भरने दो। इस जहान में आएगी लाडो, उसे सपने पूरे करने दो। काश कि हमने अपना बचपन जिंदा रखा होता’ से बेटियों की आकांक्षाओं को रखा। गोष्ठी का संचालन डाॅ. तेजिंद्र ने किया।
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दिनेश बंसल दानिश ने गजलों से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ‘उनका खूबसूरत कहन देखिये, जीने से हसरतों के उतरने लगा हूं। महसूस हो रहा है कि मरने लगा हूं’। अनिल गर्ग धनौरी ने कहा, ‘काश हम बच्चे होते तो बहुत अच्छे होते। बोलते हुए झूठ भी सच्चे होते’। राजेश भारती ने कहा, ‘काश तुम सीख पाते, खिलौने बनाना। काश तुम सीख पाते कागज की नाव बनाना, उसे पानी में तैराना। दिलबाग अकेला ने बेटियों का महत्व बताते हुए कहा, ‘कौन कहता है कि बेटियां नादान होती हैं। कभी ज़मीन तो कभी आसमान होती हैं’। नीरु मेहता ने कहा, ‘रातभर देखती रही कविता के ख़्वाब। चलने लगी तो याद आया जनाब। कविता तो घर रह गई’। डाॅ. तेजिंद्र ने कहा, ‘बेटी पिता का ध्यान रखती है। बेटी पिता का मान रखती हो। बेटी, मन में समाई होती है। किसने कहा, बेटी पराई होती है’। बलवान कुंडू सावी ने कहा, ‘बिटिया होती हैं, वल्लरी सी मुलायम। उन्हें चाहिए स्नेह-जल, थोड़ी सी मिट्टी। थोड़ा सा आकाश। अपने दरख़्त का विश्वास’। मधु गोयल मधुल ने कहा, ‘मांग रही हूं तोहफा तुम से, जन्म दिवस का हे भगवन। आज के दिन यह वर दो मुझको, न हो किसी से अनबन’। उन्होंने कहा कि बेटियों के जन्म दिन को साहित्य उत्सव के रूप में मनाना एक प्रेरणादायक पहल है। ऐसी गोष्ठियां गांव-गांव और शहर होती रहनी चाहिए। गोष्ठी में गांव पाई से वीरेंद्र ढुल और कैथल से हिमांशु की गरिमामयी उपस्थिति रही। गोष्ठी में एक नन्हीं सी बालिका राखी ने भी कविता पढ़ी।
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