{"_id":"68ec15d98ed1da845f0e70c3","slug":"smart-machines-spread-crop-residue-in-the-fields-kaithal-news-c-18-1-knl1004-758093-2025-10-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: स्मार्ट मशीन से खेतों में ही बिछे फसल अवशेष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: स्मार्ट मशीन से खेतों में ही बिछे फसल अवशेष
Mon, 13 Oct 2025 02:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 13 Oct 2025 02:25 AM IST
विज्ञापन
नई तकनीक के जरिए पराली प्रबंधन।
कपिल तंवर
कैथल। गांव चौशाला के किसान साहिल ने फसल अवशेष प्रबंधन की दिशा में एक प्रेरक कदम उठाया है। उन्होंने अपनी कंबाइन मशीन के पीछे एसएमएल कटर लगवाया है, जो धान की कटाई के समय फसल के अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में फैला देता है।
इस तकनीक से किसान बिना पराली जलाए अगली फसल की बिजाई आसानी से कर सकता है। इससे न केवल जमीन की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है, बल्कि कटे हुए अवशेष खेत में ही प्राकृतिक खाद के रूप में मिल जाते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता भी और बेहतर होती है। साहिल ने बताया कि उन्हें इस तकनीक की प्रेरणा अपने पंजाब के एक मित्र किसान से मिली। इसके बाद उन्होंने अपने खुद के खर्च पर कंबाइन में एसएमएस कटर लगवाया। अब आसपास के गांवों और गोहांड क्षेत्र के किसान भी साहिल की इस पहल से प्रेरित होकर अपनी धान की फसल इसी तकनीक से कटवा रहे हैं।
वहीं, कैथल की उपायुक्त ने कहा कि पराली जलाने से प्रकृति, भूमि और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति घटती है और वायु प्रदूषण बढ़ने से लोग अनेक जानलेवा बीमारियों की चपेट में आते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली न जलाएं, बल्कि फसल अवशेष का वैज्ञानिक प्रबंधन कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखें। संवाद
विज्ञापन
प्रशासन को करनी पड़ती है अपील
हर साल जिले में प्रशासन को किसानों से फसल अवशेष यानी पराली न जलाने की अपील करनी पड़ती है, लेकिन हकीकत यह है कि गांवों के रकबे के हिसाब से फसल अवशेष प्रबंधन की पर्याप्त मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। यही वजह है कि जरूरत पड़ने पर संसाधन न मिलने से किसान मजबूरी में पराली जलाने को विवश हो जाते हैं। मगर अब किसान भी धीरे-धीरे तकनीक के साथ कदम मिलाकर चलने लगे हैं।
विज्ञापन
कैथल। गांव चौशाला के किसान साहिल ने फसल अवशेष प्रबंधन की दिशा में एक प्रेरक कदम उठाया है। उन्होंने अपनी कंबाइन मशीन के पीछे एसएमएल कटर लगवाया है, जो धान की कटाई के समय फसल के अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में फैला देता है।
इस तकनीक से किसान बिना पराली जलाए अगली फसल की बिजाई आसानी से कर सकता है। इससे न केवल जमीन की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है, बल्कि कटे हुए अवशेष खेत में ही प्राकृतिक खाद के रूप में मिल जाते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता भी और बेहतर होती है। साहिल ने बताया कि उन्हें इस तकनीक की प्रेरणा अपने पंजाब के एक मित्र किसान से मिली। इसके बाद उन्होंने अपने खुद के खर्च पर कंबाइन में एसएमएस कटर लगवाया। अब आसपास के गांवों और गोहांड क्षेत्र के किसान भी साहिल की इस पहल से प्रेरित होकर अपनी धान की फसल इसी तकनीक से कटवा रहे हैं।
विज्ञापन
वहीं, कैथल की उपायुक्त ने कहा कि पराली जलाने से प्रकृति, भूमि और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति घटती है और वायु प्रदूषण बढ़ने से लोग अनेक जानलेवा बीमारियों की चपेट में आते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली न जलाएं, बल्कि फसल अवशेष का वैज्ञानिक प्रबंधन कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखें। संवाद
विज्ञापन
प्रशासन को करनी पड़ती है अपील
हर साल जिले में प्रशासन को किसानों से फसल अवशेष यानी पराली न जलाने की अपील करनी पड़ती है, लेकिन हकीकत यह है कि गांवों के रकबे के हिसाब से फसल अवशेष प्रबंधन की पर्याप्त मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। यही वजह है कि जरूरत पड़ने पर संसाधन न मिलने से किसान मजबूरी में पराली जलाने को विवश हो जाते हैं। मगर अब किसान भी धीरे-धीरे तकनीक के साथ कदम मिलाकर चलने लगे हैं।