{"_id":"68d1b2b6370877f21d0e81a0","slug":"skills-of-artisans-and-craftsmen-are-getting-recognition-dc-kaithal-news-c-18-1-knl1004-744667-2025-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: कारीगरों-शिल्पकारों के हुनर को मिल रही पहचान ः डीसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: कारीगरों-शिल्पकारों के हुनर को मिल रही पहचान ः डीसी
Tue, 23 Sep 2025 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 23 Sep 2025 02:03 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। लघु सचिवालय में सोमवार को बैठक में उपायुक्त प्रीति ने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना भारत की पारंपरिक कला व शिल्पकला को जीवित रखने के लिए कारीगरों व शिल्पकारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में सहायक है। पीएम विश्वकर्मा योजना का मुख्य बिंदु कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की पहुंच के साथ-साथ गुणवत्ता में सुधार करना है।
यह योजना पूरे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता प्रदान करती है। शिल्पकार व कारीगर समाज के नवनिर्माण में अपना बहुमूल्य सहयोग देते हैं। शिल्पकारों व कारीगरों के हुनर को सम्मान देते हुए केंद्र सरकार की ओर से पीएम विश्वकर्मा योजना चलाई जा रही है, जिससे उनके हुनर को पहचान मिल रही है।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत 18 विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है, जिनमें नाव बनाना, शस्त्राकार, लुहार, हथौड़ा व लोहे के औजार बनाना, ताला बनाना, सुनार, कुंभकार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी, सुथार, चटाई बनाना, गुडि़या व खिलौने बनाना, बारबर, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने के लिए जाल बनाने का काम आदि शामिल है।
विज्ञापन
उन्होंने आह्वान किया कि कारीगर और शिल्पी रजिस्ट्रेशन करें और लाभ उठाएं। योजना के तहत आवेदन फार्म को गांव के सरपंच तथा शहरी स्थानीय निकाय के पार्षद द्वारा सत्यापित किया जाएगा कि आवेदनकर्ता द्वारा दर्शाया गया कारीगरी का कार्य वह करता है या नहीं।
विज्ञापन
कैथल। लघु सचिवालय में सोमवार को बैठक में उपायुक्त प्रीति ने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना भारत की पारंपरिक कला व शिल्पकला को जीवित रखने के लिए कारीगरों व शिल्पकारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में सहायक है। पीएम विश्वकर्मा योजना का मुख्य बिंदु कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की पहुंच के साथ-साथ गुणवत्ता में सुधार करना है।
यह योजना पूरे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता प्रदान करती है। शिल्पकार व कारीगर समाज के नवनिर्माण में अपना बहुमूल्य सहयोग देते हैं। शिल्पकारों व कारीगरों के हुनर को सम्मान देते हुए केंद्र सरकार की ओर से पीएम विश्वकर्मा योजना चलाई जा रही है, जिससे उनके हुनर को पहचान मिल रही है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि योजना के तहत 18 विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है, जिनमें नाव बनाना, शस्त्राकार, लुहार, हथौड़ा व लोहे के औजार बनाना, ताला बनाना, सुनार, कुंभकार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी, सुथार, चटाई बनाना, गुडि़या व खिलौने बनाना, बारबर, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने के लिए जाल बनाने का काम आदि शामिल है।
विज्ञापन
उन्होंने आह्वान किया कि कारीगर और शिल्पी रजिस्ट्रेशन करें और लाभ उठाएं। योजना के तहत आवेदन फार्म को गांव के सरपंच तथा शहरी स्थानीय निकाय के पार्षद द्वारा सत्यापित किया जाएगा कि आवेदनकर्ता द्वारा दर्शाया गया कारीगरी का कार्य वह करता है या नहीं।