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Kaithal News: परिस्थितियों को नहीं बनने दिया सपनों के रास्ते का रोड़ा, सुपर 100 के 7 बच्चों ने पास की जेईई एडवांस की परीक्षा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jun 2026 12:07 AM IST
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Seven students from the Super 100 cleared the JEE Advanced exam, refusing to let circumstances stand in the way of their dreams.
प्रतिष्ठा पांचाल। स्वयं - फोटो : मिशन श​क्ति चौपाल में महिलाओं व बालिकाओं को जानकारी देती महिला सिपाही।
कैथल। जेईई एडवांस का परिणाम आया तो कई ऐसे बच्चों के चेहरे भी खिल उठे जिनके लिए परिस्थितियां सामान्य नहीं थी। इस बार सुपर 100 के 91 विद्यार्थियों ने भी इस परीक्षा को पास किया है जिनमें सात कैथल जिले के हैं। इनमें गांव देवबन की प्रतिष्ठा पांचाल, गांव सीवन के रवि कुमार, गांव बात्ता के हर्षदीप, गांव दयौरा के नवीन कुमार, गांव बालू के राहुल, गांव टीक के हिमांशु और गांव सेरधा के अमन शामिल हैं।
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प्रदेश में भी कैथल जिला इन्हीं विद्यार्थियों के दम पर सुपर 100 के 22 जिलों में चौथे स्थान पर रहा। खास बात यह रही कि परीक्षा पास करने वाले ये सभी विद्यार्थी साधारण परिवारों से हैं। इन्होंने गरीबी और विपरीत परिस्थितियों को अपने सपनों का रोड़ा नहीं बनने दिया। जिन गांव से ये विद्यार्थी आते हैं उनमें से ज्यादातर सरकारी स्कूलों में नॉन मेडिकल संकाय तक नहीं था। विद्यार्थियों ने कहा कि सुपर 100 नहीं होता तो शायद न तो नॉन मेडिकल की पढ़ाई कर पाते और न ही जेईई एडवांस की परीक्षा दे पाते।
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पिता राज मिस्त्री हैं : प्रतिष्ठा
गांव के स्कूल में नॉन मेडिकल संकाय नहीं है। मेरे पिता राज मिस्त्री का काम करते हैं और उनके लिए जेईई एडवांस जैसी परीक्षा की कोचिंग दिलाना संभव ही नहीं था। नॉन मेडिकल की पढ़ाई के लिए कैथल आना पड़ता जोकि मुश्किल होने वाला था। सुपर 100 नहीं होता तो शायद ही मैं जेईई एडवांस की परीक्षा दे पाती।
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- प्रतिष्ठा पांचाल, गांव देवबन।
परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं : रवि
जब मैं पढ़ाई कर रहा था तो जेईई एडवांस परीक्षा के बारे में ही नहीं पता था। पढ़ाई में अच्छा था तो इंचार्ज ने सुपर 100 परीक्षा के बारे में बताया। अगर ये परीक्षा नहीं देता या चयन नहीं होता तो शायद आज जेईई एडवांस जैसी परीक्षा पास करना तो दूर इसको दे भी नहीं पाते। मेरे पिता प्राइवेट नौकरी करते हैं और परिवार की आर्थिक हालत भी बहुत अच्छी नहीं है।
- रवि कुमार, गांव सीवन।
सपनों को कर पाएंगे पूरा : हर्षदीप
परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं है। सुपर 100 में चयन से न सिर्फ अपने सपनों को पूरा करने का मौका मिला है बल्कि जीवन को एक नई दिशा भी मिली है। मेरे लिए संभव नहीं था कि लाखों खर्च कर इस परीक्षा की कोचिंग लेते और न ही इतना समय था कि कुछ साल घर बैठकर इसकी तैयारी को दे पाते। पढ़ाई के दौरान ही कोचिंग भी मिली और पढ़ाई भी चलती रही जिससे मुकाम हासिल करना आसान रहा।
- हर्षदीप, गांव बात्ता।
ये है सुपर 100 परीक्षा के लिए चयन प्रक्रिया
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी ही सुपर 100 की परीक्षा दे सकते हैं। हर साल नवंबर व दिसंबर में इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। परीक्षा की जानकारी बीईओ और स्कूल प्रिंसिपल के माध्यम से समय रहते दी जाती है। फिर फरवरी में इसके लिए पहली परीक्षा होती है और इसको पास करने वाले विद्यार्थियों को कुरुक्षेत्र बारना में बुलाया जाता है और वहां तीन दिन कोचिंग के बाद फिर से परीक्षा ली जाती है और यहां प्रदेशभर से मेरिट में आने वाले टॉप 400 विद्यार्थियों का चयन अगले दो साल के लिए कोचिंग व पढ़ाई के लिए किया जाता है।
सभी विद्यार्थियों का चयन दो साल पहले सुपर 100 में हुआ था। कुरुक्षेत्र जिले के बारना में सेंटर बनाया गया है, जहां चयनित विद्यार्थियों को न सिर्फ पढ़ाई करवाई जाती है बल्कि इनको नीट और जेईई एडवांस जैसी परीक्षाओं की तैयारी भी करवाई जाती है। कैथल जिले के 7 विद्यार्थियों ने परीक्षा को पास कर कैथल का नाम रोशन किया है।

- सुशील कुमार, जिला विज्ञान विशेषज्ञ, शिक्षा विभाग, कैथल।

प्रतिष्ठा पांचाल।  स्वयं

प्रतिष्ठा पांचाल। स्वयं- फोटो : मिशन शक्ति चौपाल में महिलाओं व बालिकाओं को जानकारी देती महिला सिपाही।

प्रतिष्ठा पांचाल।  स्वयं

प्रतिष्ठा पांचाल। स्वयं- फोटो : मिशन शक्ति चौपाल में महिलाओं व बालिकाओं को जानकारी देती महिला सिपाही।

प्रतिष्ठा पांचाल।  स्वयं

प्रतिष्ठा पांचाल। स्वयं- फोटो : मिशन शक्ति चौपाल में महिलाओं व बालिकाओं को जानकारी देती महिला सिपाही।

प्रतिष्ठा पांचाल।  स्वयं

प्रतिष्ठा पांचाल। स्वयं- फोटो : मिशन शक्ति चौपाल में महिलाओं व बालिकाओं को जानकारी देती महिला सिपाही।

प्रतिष्ठा पांचाल।  स्वयं

प्रतिष्ठा पांचाल। स्वयं- फोटो : मिशन शक्ति चौपाल में महिलाओं व बालिकाओं को जानकारी देती महिला सिपाही।

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