{"_id":"6adcf936355f7362e00acb82","slug":"sensors-installed-at-six-locations-including-near-a-drain-will-provide-alerts-as-soon-as-pollution-levels-rise-kaithal-news-c-245-1-kht1012-157010-2026-10-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: सीवन सहित छह स्थानों पर लगाए सेंसर, प्रदूषण बढ़ते ही मिलेगी जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: सीवन सहित छह स्थानों पर लगाए सेंसर, प्रदूषण बढ़ते ही मिलेगी जानकारी
विज्ञापन
सीवन में लगाया गया सेंसर। संवाद
कैथल। जिले में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने इस बार तकनीक के माध्यम से निगरानी शुरू की है। पिछले तीन वर्षों के दौरान पराली जलाने की अधिक घटनाओं के कारण रेड जोन में शामिल रहे भागल, सीवन, कुराड़, धनौरी, हरनौली और कैलरम में प्रदूषण मापने के सेंसर लगाए गए हैं।
इनसे हवा में प्रदूषण के स्तर में होने वाले बदलाव की जानकारी मिलेगी। अचानक प्रदूषण बढ़ने पर संबंधित क्षेत्र में जांच करवाई जाएगी। यदि जांच में किसी किसान के खेत में पराली जलाने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार उसका चालान किया जाएगा। इन सेंसरों को लगाने का मुख्य उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं का समय रहते पता लगाना और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण करना है।
जिले में धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाले अवशेषों को आग लगाने से रोकना प्रशासन के लिए चुनौती रहता है। पिछले वर्ष जिले में पराली जलाने की 72 घटनाएं सामने आई थीं।
विज्ञापन
इसको देखते हुए इस बार निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है। जिले के गांवों में 630 अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इस सीजन में अब तक पराली जलाने की एक भी घटना सामने नहीं आई है।
प्रदूषण बढ़ने का जल्द मिलेगा संकेत, जांच में मिलेगी मदद : अधिकारियों के अनुसार सेंसर लगाने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि संबंधित गांवों में वायु प्रदूषण के स्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव की जानकारी मिल सकेगी। पराली जलाने से हवा में सूक्ष्म कणों और धुएं की मात्रा बढ़ती है।
सेंसर से प्राप्त आंकड़े अधिकारियों को प्रदूषण बढ़ने का संकेत दे सकते हैं। इससे प्रभावित क्षेत्र की पहचान करने और जांच की प्रक्रिया तेज करने में मदद मिलेगी।
तीन वर्षों से रेड जोन में रहे सीवन कस्बे सहित छह स्थानों पर विशेष नजर : कृषि विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2023 में सीवन कस्बा और भागल, कुराड़ व धनौरी गांव रेड जोन में शामिल थे। इसके बाद वर्ष 2024 में हरनौली और 2025 में कैलरम गांव को रेड जोन में रखा गया था।
विज्ञापन
इनसे हवा में प्रदूषण के स्तर में होने वाले बदलाव की जानकारी मिलेगी। अचानक प्रदूषण बढ़ने पर संबंधित क्षेत्र में जांच करवाई जाएगी। यदि जांच में किसी किसान के खेत में पराली जलाने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार उसका चालान किया जाएगा। इन सेंसरों को लगाने का मुख्य उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं का समय रहते पता लगाना और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण करना है।
विज्ञापन
जिले में धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाले अवशेषों को आग लगाने से रोकना प्रशासन के लिए चुनौती रहता है। पिछले वर्ष जिले में पराली जलाने की 72 घटनाएं सामने आई थीं।
विज्ञापन
इसको देखते हुए इस बार निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है। जिले के गांवों में 630 अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इस सीजन में अब तक पराली जलाने की एक भी घटना सामने नहीं आई है।
प्रदूषण बढ़ने का जल्द मिलेगा संकेत, जांच में मिलेगी मदद : अधिकारियों के अनुसार सेंसर लगाने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि संबंधित गांवों में वायु प्रदूषण के स्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव की जानकारी मिल सकेगी। पराली जलाने से हवा में सूक्ष्म कणों और धुएं की मात्रा बढ़ती है।
सेंसर से प्राप्त आंकड़े अधिकारियों को प्रदूषण बढ़ने का संकेत दे सकते हैं। इससे प्रभावित क्षेत्र की पहचान करने और जांच की प्रक्रिया तेज करने में मदद मिलेगी।
तीन वर्षों से रेड जोन में रहे सीवन कस्बे सहित छह स्थानों पर विशेष नजर : कृषि विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2023 में सीवन कस्बा और भागल, कुराड़ व धनौरी गांव रेड जोन में शामिल थे। इसके बाद वर्ष 2024 में हरनौली और 2025 में कैलरम गांव को रेड जोन में रखा गया था।

सीवन में लगाया गया सेंसर। संवाद

सीवन में लगाया गया सेंसर। संवाद

सीवन में लगाया गया सेंसर। संवाद