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फाग देख हरियाणे के म्है मस्ती छाई, भाज्या जावा ताऊ भरथू, जद ताई कोरड़ा ल्याई
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कैथल। साहित्य सभा की मासिक काव्य-गोष्ठी एवं पुस्तक-लोकार्पण कार्यक्रम आरकेएस कॉलेज के अध्यापक-कक्ष में किया गया। इस मौके पर कवियों ने फाग देख हरियाणे के म्है मस्ती छाई..., समेत कई रचनाएं प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। गोष्ठी में अशोक बैरागी की साक्षात्कार विधा पर आधारित पुस्तक साहित्य के पथ प्रदर्शक और प्राचार्य शमशेर सिंह कैंदल की अंग्रेजी भाषा में नव प्रकाशित पुस्तक लिब्रेटिंग ए बटरफ्लाई का लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम में करनाल से वरिष्ठ लघु कथाकार एवं कवि अशोक भाटिया ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। साहित्यकार राधेश्याम भारतीय ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल रहे। लेखक अशोक बैरागी ने अपनी पुस्तक ‘साहित्य के पथ प्रदर्शक’ के बारे में बताया कि इसमें देश के 11 जाने-माने साहित्यकारों के साक्षात्कार हैं। यह पुस्तक उनकी ग्यारह वर्ष की साधना का परिणाम है। वरिष्ठ साहित्यकार राधेश्याम भारतीय ने पुस्तक साहित्य के पथ प्रदर्शक की जानकारी दी। प्रो. अमृत लाल मदान ने लोकार्पित पुस्तकों के रचनाकारों को बधाई दी। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध की विभीषिका को उजागर करती कविता भी पढ़ी। दिनेश बंसल ने कहा कि मृगतृष्णा का पिंजरा तोड़के इंसां बाहर आए तो। कस्तूरी भी हासिल होगी, खुद के भीतर जाए तो। सतबीर जागलान ने फाग देख हरियाणे के म्है मस्ती छाई। भाज्या जावा ताऊ भरथू, जद ताई कोरड़ा ल्याई..., रवींद्र रवि ने कोई खामोश मंजर बोलता है। सुनो आंखों से अक्सर बोलता है..., सतपाल पराशर शास्त्री आनंद ने उधम मचा कै के काढैगा। धुम्मे ठाकै के काढैगा... रचना प्रस्तुत की।
इसके अलावा डॉ. अशोक अत्रि ने बिन बात के मार रहे हो। सबको कर लाचार रहे हो.., होली को निमंत्रण देते हुए मधु गोयल मधुल ने आजा आजा होली आजा। गालों पर तू गुलाल लगा जा..रचना सुनाई। ईश्वर चंद गर्ग ने जब होता संघर्ष तिमिर से, दीपक तब जलते हैं ..., रिसाल जांगड़ा ने मनाएं कैसे खुशियों के मजमून की होली। जल रही अमन और सुकून की होली.., कर्मचंद केसर ने हौसल्यां नै इस तरयां आजमा कै देख। दीवा किसी पड़ोसी का जला कै देख..रचना प्रस्तुत की। गोष्ठी में रवींद्र मित्तल , श्याम सुंदर गौड़, डॉ. चतरभुज बंसल सौथा, यशवीर आर्य, अनिल कौशिक, सोहन लाल सोनी, प्रदीप वैरागी, दिलबाग अकेला, महेंद्र पाल सारस्वत व कमलेश शर्मा ने भी अपनी रचनाएं सुनाई। संचालन डॉ. तेजिंद्र ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. तेजिंद्र ने किया।
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कार्यक्रम में करनाल से वरिष्ठ लघु कथाकार एवं कवि अशोक भाटिया ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। साहित्यकार राधेश्याम भारतीय ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल रहे। लेखक अशोक बैरागी ने अपनी पुस्तक ‘साहित्य के पथ प्रदर्शक’ के बारे में बताया कि इसमें देश के 11 जाने-माने साहित्यकारों के साक्षात्कार हैं। यह पुस्तक उनकी ग्यारह वर्ष की साधना का परिणाम है। वरिष्ठ साहित्यकार राधेश्याम भारतीय ने पुस्तक साहित्य के पथ प्रदर्शक की जानकारी दी। प्रो. अमृत लाल मदान ने लोकार्पित पुस्तकों के रचनाकारों को बधाई दी। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध की विभीषिका को उजागर करती कविता भी पढ़ी। दिनेश बंसल ने कहा कि मृगतृष्णा का पिंजरा तोड़के इंसां बाहर आए तो। कस्तूरी भी हासिल होगी, खुद के भीतर जाए तो। सतबीर जागलान ने फाग देख हरियाणे के म्है मस्ती छाई। भाज्या जावा ताऊ भरथू, जद ताई कोरड़ा ल्याई..., रवींद्र रवि ने कोई खामोश मंजर बोलता है। सुनो आंखों से अक्सर बोलता है..., सतपाल पराशर शास्त्री आनंद ने उधम मचा कै के काढैगा। धुम्मे ठाकै के काढैगा... रचना प्रस्तुत की।
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इसके अलावा डॉ. अशोक अत्रि ने बिन बात के मार रहे हो। सबको कर लाचार रहे हो.., होली को निमंत्रण देते हुए मधु गोयल मधुल ने आजा आजा होली आजा। गालों पर तू गुलाल लगा जा..रचना सुनाई। ईश्वर चंद गर्ग ने जब होता संघर्ष तिमिर से, दीपक तब जलते हैं ..., रिसाल जांगड़ा ने मनाएं कैसे खुशियों के मजमून की होली। जल रही अमन और सुकून की होली.., कर्मचंद केसर ने हौसल्यां नै इस तरयां आजमा कै देख। दीवा किसी पड़ोसी का जला कै देख..रचना प्रस्तुत की। गोष्ठी में रवींद्र मित्तल , श्याम सुंदर गौड़, डॉ. चतरभुज बंसल सौथा, यशवीर आर्य, अनिल कौशिक, सोहन लाल सोनी, प्रदीप वैरागी, दिलबाग अकेला, महेंद्र पाल सारस्वत व कमलेश शर्मा ने भी अपनी रचनाएं सुनाई। संचालन डॉ. तेजिंद्र ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. तेजिंद्र ने किया।
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