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Kaithal News: ऑनलाइन जुटे विद्वान, 31 को दिवाली मनाना बताया शास्त्रसम्मत

Sun, 20 Oct 2024 03:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sun, 20 Oct 2024 03:51 AM IST
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Scholars gathered online, said celebrating Diwali on 31 is as per scriptures

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संवाद न्यूज एजेंसी



कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग की ओर से वर्ष 2024 में दीपावली पर्व तिथि निर्धारण के लिए एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें देशभर से 13 राज्यों के 14 संस्कृत विश्वविद्यालयों से ज्योतिष के प्राध्यापकों, ज्योतिषियों, पंचाग निर्माताओं व धर्मशास्त्रियों को आमंत्रित किया। इस मौके पर दिवाली की तिथि के संबंध में विचार-विमर्श के बाद तय किया गया कि अबकी 31 अक्तूबर को पर्व मनाना शास्त्रसम्मत होगा।

कार्यक्रम का संयोजन ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा ने किया। कार्यक्रम की विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने की। कुलपति प्रो. भारद्वाज ने कहा कि इस वर्ष कुछ पंचांगों में दीपावली को 31 अक्तूबर और कुछ में एक नवंबर को मनाए जाने के लिए जो निर्णय हुए हैं, उससे भ्रम की स्थिति बनी है। अतः लोगों में सटीक ज्योतिषीय गणना व धर्मशास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर दीपावली का मुहूर्त जानने की इच्छा है।
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सभी आमंत्रित विद्वानों ने विचार-विमर्श के बाद 31 अक्तूबर को दीपावली मनाए जाने को शास्त्रसम्मत बताया। कहा गया कि अमावस्या का समय 31 अक्तूबर को अपराह्न 3:12 से एक नवंबर की संध्या 5:13 बजे तक है। 31 अक्तूबर की मध्य रात्रि में अमावस्या रहने की वजह से इसी दिन दिवाली मनाने का निर्णय लिया गया। यह भी कहा गया कि 29 अक्तूबर को धनतेरस मानना उचित रहेगा।
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सभी के मत को स्वीकार करते हुए ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा ने आधिकारिक रूप से बताया कि 31 अक्तूबर को ही पूरे देश में दीपावली मनाई जानी चाहिए। ऑनलाइन हिस्सा लेने वालों में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर से प्रो. भारत भूषण मिश्र, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से प्रो. विनय कुमार पांडेय, लाल बहादुर शास्त्री केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली से प्रो. प्रेम कुमार शर्मा, प्रो. अशोक थपलियाल, जगद्गुरु रामभद्राचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर से प्रो. विनोद कुमार शर्मा, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से डॉ. नंदन कुमार तिवारी, सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय शामिल रहे।




इनके साथ गुजरात से डॉ. नित्यानन्द ओझा, राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, तिरुपति से डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव, माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड गुरुकुल, जम्मू से डॉ. धनंजय मिश्र, मद्रास संस्कृत कॉलेज, चेन्नई से डॉ. अखिलेश्वर मिश्र, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से प्रो. अमित कुमार शुक्ल, कुल्लू हिमाचल प्रदेश से डॉ. रिपुदमन चंद्र, बाबा लदाना से ज्योतिषाचार्य आचार्य रामफल शर्मा, कैथल से वशिष्ठ पंचाग निर्माता पं. सुरेश शास्त्री, वाराणसी से पंचांगकर्ता अमित कुमार मिश्र, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के लखनऊ परिसर से डॉ. हरिनारायणधर द्विवेदी सहित विश्वविद्यालय के वेद विभाग से डॉ. अखिलेश मिश्र, डॉ. मदनमोहन तिवारी, डॉ. रमाशंकर मिश्र धर्मशास्त्र विभाग से डॉ. सत्येंद्र गौतम, डॉ. शारदा, हिंदू अध्ययन विभाग से डॉ. हरीश कुमार, ज्योतिष विभाग से डॉ. नवीन शर्मा, डॉ. चंद्रकांत, डॉ. गोविंद आदि मौजूद रहे।
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