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Kaithal News: सावन कल से, रक्षाबंधन पर होगा माह का समापन
Thu, 10 Jul 2025 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 10 Jul 2025 12:22 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका/कैथल। सावन माह इस बार 11 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त को रक्षाबंधन के पर्व के साथ समाप्त होगा। इस बार भक्तों को भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए केवल चार सोमवार मिलेंगे। साथ ही शिव योग, प्रीति योग और आयुष्मान योग जैसे विशेष संयोग सावन को और भी शुभ और फलदायक बनाएंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सभी दुखों और संकटों का नाश होता है और महादेव की कृपा प्राप्त होती है।
ऐसे करें शिव जी की पूजा ः चीका के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर शास्त्री ‘चोटी वाले’ ने बताया कि इस पावन माह में श्रद्धालु प्रतिदिन भगवान शिव का अभिषेक गंगाजल, शहद, जल, बेलपत्र, कच्चे दूध व सफेद फूलों से करें। पूजन के दौरान शिव मंत्रों का जाप और शिव चालीसा का पाठ अवश्य करें।
उन्होंने बताया कि भगवान शिव को आदि योगी कहा गया है, अतः सावन के पहले दिन योग व ध्यान करना अत्यंत लाभकारी होता है। शिव ध्यान और मंत्र जाप से व्यक्ति मानसिक रूप से संतुलित होता है और पारिवारिक जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
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शिव को प्रिय है सावन
सावन के पहले दिन शिवलिंग पर गाय के दूध से अभिषेक करना तथा दूध और चावल का दान करना शुभ माना जाता है। इससे न केवल भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि कुंडली में चंद्र की स्थिति भी मजबूत होती है।
महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन शर्मा के अनुसार, पंचांग ’दिवाकर’ के अनुसार सावन की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 जुलाई की अर्धरात्रि 2:07 बजे प्रारंभ होगी। उन्होंने कहा कि चूंकि धार्मिक दृष्टिकोण से सूर्योदय कालीन तिथि को ही मान्यता दी जाती है, इसलिए श्रावण मास की वास्तविक शुरुआत 11 जुलाई से मानी जाएगी।
उन्होंने बताया कि सावन में सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्त उमड़ते है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते हैं। दूध और जल से अभिषेक करते हैं। यह महीना पवित्र माना गया है। श्रद्धालु रोज शिव मंत्र का जाप करते हैं। दूध या उससे बनी चीजों का दान शुभ माना जाता है।
उन्होंने बताया कि सावन भगवान शिव का प्रिय महीना है। मां पार्वती ने भी शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन में विशेष पूजा की थी।
इसी कारण श्रद्धालु इस महीने में शिव की विशेष आराधना करते हैं।
प्रमुख व्रत एवं पर्व
11 जुलाई
श्रावण मास प्रारंभ
12 जुलाई
अशून्य शयन व्रत
14 जुलाई
पहला सोमवार /
गणेश चतुर्थी
15 जुलाई
मंगला गौरी व्रत
16 जुलाई
श्रावण संक्रांति
17 जुलाई
शीतला सप्तमी
21 जुलाई
दूसरा सोमवार /
कामिका एकादशी
22 जुलाई
भौम प्रदोष
23 जुलाई
श्रावणी शिवरात्रि
24 जुलाई
अमावस्या
28 जुलाई
तीसरा सोमवार /
विनायक चतुर्थी
29 जुलाई
नागपंचमी
30 जुलाई
कल्कि जयंती
31 जुलाई
गोस्वामी तुलसीदास
जयंती / शीतला
सप्तमी
04 अगस्त
चौथा सोमवार
05 अगस्त
पवित्रा एकादशी
06 अगस्त
प्रदोष व्रत
08 अगस्त
पूर्णिमा व्रत
09 अगस्त
श्रावणी पूर्णिमा /
रक्षाबंधन (श्रावण का
अंतिम दिन)
नोट: सावन मास में भगवान शिव की आराधना से मानसिक, पारिवारिक और आध्यात्मिक जीवन में विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। चारों सोमवार का व्रत और शिवलिंग पर जलाभिषेक विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।
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गुहला-चीका/कैथल। सावन माह इस बार 11 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त को रक्षाबंधन के पर्व के साथ समाप्त होगा। इस बार भक्तों को भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए केवल चार सोमवार मिलेंगे। साथ ही शिव योग, प्रीति योग और आयुष्मान योग जैसे विशेष संयोग सावन को और भी शुभ और फलदायक बनाएंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सभी दुखों और संकटों का नाश होता है और महादेव की कृपा प्राप्त होती है।
ऐसे करें शिव जी की पूजा ः चीका के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर शास्त्री ‘चोटी वाले’ ने बताया कि इस पावन माह में श्रद्धालु प्रतिदिन भगवान शिव का अभिषेक गंगाजल, शहद, जल, बेलपत्र, कच्चे दूध व सफेद फूलों से करें। पूजन के दौरान शिव मंत्रों का जाप और शिव चालीसा का पाठ अवश्य करें।
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उन्होंने बताया कि भगवान शिव को आदि योगी कहा गया है, अतः सावन के पहले दिन योग व ध्यान करना अत्यंत लाभकारी होता है। शिव ध्यान और मंत्र जाप से व्यक्ति मानसिक रूप से संतुलित होता है और पारिवारिक जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
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शिव को प्रिय है सावन
सावन के पहले दिन शिवलिंग पर गाय के दूध से अभिषेक करना तथा दूध और चावल का दान करना शुभ माना जाता है। इससे न केवल भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि कुंडली में चंद्र की स्थिति भी मजबूत होती है।
महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन शर्मा के अनुसार, पंचांग ’दिवाकर’ के अनुसार सावन की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 जुलाई की अर्धरात्रि 2:07 बजे प्रारंभ होगी। उन्होंने कहा कि चूंकि धार्मिक दृष्टिकोण से सूर्योदय कालीन तिथि को ही मान्यता दी जाती है, इसलिए श्रावण मास की वास्तविक शुरुआत 11 जुलाई से मानी जाएगी।
उन्होंने बताया कि सावन में सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्त उमड़ते है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते हैं। दूध और जल से अभिषेक करते हैं। यह महीना पवित्र माना गया है। श्रद्धालु रोज शिव मंत्र का जाप करते हैं। दूध या उससे बनी चीजों का दान शुभ माना जाता है।
उन्होंने बताया कि सावन भगवान शिव का प्रिय महीना है। मां पार्वती ने भी शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन में विशेष पूजा की थी।
इसी कारण श्रद्धालु इस महीने में शिव की विशेष आराधना करते हैं।
प्रमुख व्रत एवं पर्व
11 जुलाई
श्रावण मास प्रारंभ
12 जुलाई
अशून्य शयन व्रत
14 जुलाई
पहला सोमवार /
गणेश चतुर्थी
15 जुलाई
मंगला गौरी व्रत
16 जुलाई
श्रावण संक्रांति
17 जुलाई
शीतला सप्तमी
21 जुलाई
दूसरा सोमवार /
कामिका एकादशी
22 जुलाई
भौम प्रदोष
23 जुलाई
श्रावणी शिवरात्रि
24 जुलाई
अमावस्या
28 जुलाई
तीसरा सोमवार /
विनायक चतुर्थी
29 जुलाई
नागपंचमी
30 जुलाई
कल्कि जयंती
31 जुलाई
गोस्वामी तुलसीदास
जयंती / शीतला
सप्तमी
04 अगस्त
चौथा सोमवार
05 अगस्त
पवित्रा एकादशी
06 अगस्त
प्रदोष व्रत
08 अगस्त
पूर्णिमा व्रत
09 अगस्त
श्रावणी पूर्णिमा /
रक्षाबंधन (श्रावण का
अंतिम दिन)
नोट: सावन मास में भगवान शिव की आराधना से मानसिक, पारिवारिक और आध्यात्मिक जीवन में विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। चारों सोमवार का व्रत और शिवलिंग पर जलाभिषेक विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।