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Kaithal News: सरस्वती नदी परियोजना को नई गति, हरियाणा-गुजरात में बनी सहमति

Sat, 23 May 2026 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 23 May 2026 12:56 AM IST
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Saraswati River Project gets new momentum, Haryana-Gujarat reach agreement
अहमदाबाद मेंं इसरो प्रतिनिधियों से बैठक करते हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड वाइस चेयरमैन धुम
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत (कैथल)। सरस्वती नदी परियोजना को नई गति देने की दिशा में हरियाणा और गुजरात के बीच सहमति बन गई है। गुजरात के अहमदाबाद स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के अधिकारियों के बीच दैव नदी के विकास को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के वाइस चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमच ने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री एवं सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के चेयरमैन नायब सिंह सैनी के निर्देश पर उनकी टीम गुजरात स्थित इसरो संस्थान पहुंची। बैठक में इसरो स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, अहमदाबाद की उप निदेशक रश्मि शर्मा, वैज्ञानिक डॉ. आर.बी. उपाध्याय, डॉ. जया प्रसाद सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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बैठक के दौरान सरस्वती रिवर प्रोजेक्ट को लेकर विस्तृत चर्चा की गई और गुजरात में परियोजना का कार्य शुरू करने पर सहमति बनी। सरस्वती नदी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व पर गहन मंथन करते हुए परियोजना को शीघ्र धरातल पर उतारने के लिए विशेष प्रस्ताव तैयार किया गया। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक संसाधनों की मदद से सरस्वती नदी के प्राचीन मार्ग, भूगर्भीय संरचना और जल स्रोतों का अध्ययन किया जाएगा।
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सैटेलाइट तकनीक से होगा अध्ययन

इसके लिए इसरो अंतरिक्ष उपयोग केंद्र द्वारा सैटेलाइट इमेजिंग, रिमोट सेंसिंग और भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, ताकि परियोजना को वैज्ञानिक आधार पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा सके। धुम्मन सिंह किरमच ने कहा कि सरस्वती नदी केवल ऐतिहासिक धरोहर ही नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति की पहचान भी है।


उन्होंने बताया कि परियोजना का उद्देश्य सरस्वती नदी के अस्तित्व से जुड़े तथ्यों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए इस धरोहर को संरक्षित करना है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी एजेंसियों का सहयोग भी लिया जाएगा, जिससे परियोजना को गति मिलेगी। बैठक के दौरान एक विशेष टीम का गठन भी किया गया, जो परियोजना के क्रियान्वयन, अनुसंधान और तकनीकी कार्यों की निगरानी करेगी।
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