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26 बेसहारा बच्चों के जीवन में रंग भर रही है सनातन धर्म मंदिर सभा
ब्यूरो/अमर उजाला कैथल।
Updated Wed, 16 Mar 2016 11:51 PM IST
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कैथ्ाल
- फोटो : अमर उजाला
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श्री सनातन धर्म मंदिर में चल रहा बाल उपवन बे सहारा बच्चों के लिए सहारा बना हुआ है। बाल उपवन में 26 बेसहारा बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे है। इन बच्चों में अधिकतर बच्चे कुष्ट रोगियों के बच्चे है। कुछ के माता-पिता अपराध के कारण जेल में है तो कुछ के मा-बाप इस दुनियां छोड़ चुके है। वर्ष 2011 में फ्रांसवाला रोड पर अनाथ आश्रम बंद होने कारण बच्चे सड़कों पर आ गए थे। उस समय सनातन धर्म मंदिर समिति ने अनाथ बच्चों का सहारा बनकर मंदिर परिसर में बाल उपवन बनाया। सनातन धर्म मंदिर सभा के प्रधान रवि भूषण गर्ग ने बताया कि समिति ने सेवा भावना के कारण बाल उपवन चलाया था। बाल उपवन में रह रहे बच्चे आईटीआई, कक्षा बाहरवीं व दसवीं की परीक्षाएं दे रहे है।
2011 में बंद हो गया था अनाथ आश्रम
फ्रांसवाला रोड पर शहर चल रहा अनाथ आश्रम उनके संचालकों के विदेश चले जाने के कारण बंद हो गया था। जिस कारण करीब 22 बच्चे शहर की सड़कों पर आ गए। सनातन धर्म मंदिर समिति ने बच्चों को संभाला ओर उनके लिए बाल उपवन खोला। जिसे बड़े संघर्ष के बाद मान्यता मिली।
शहर के कई परिवार मनाते हैं बच्चों के साथ जन्मदिन
प्रधान रवि भूषण गर्ग ने बताया कि शहर के कई परिवार अपने बच्चों का जन्मदिन बाल उपवन के बच्चों के साथ मनाते है। बच्चों को इतना स्नेह मिल रहा है कि दो दिन पहले बाल उपवन में आकर जन्म दिन व मैरिज दिवस के लिए आना पड़ता है।
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मानवता की सेवा एक मात्र उद्देश्य
प्रधान रविभूषण गर्ग ने बताया कि बाल उपवन में बेसहारा बच्चों के जीवन में रंग भरकर मन का सुकून मिलता है। एकमात्र उद्देश्य मानवता की सेवा करना है। बच्चों के लिए मेडिकल सुविधाएं, शिक्षा, खाना, रहना के प्रति विशेष ध्यान रखा जा रहा है। समिति के 77 सदस्य हैं, वे सभी बच्चों से मिलने आते है।
प्रधान रविभूषण गर्ग ने बताया कि मेरे घर में जो मेरे बच्चे जो खाना खाते हैं। सुविधाएं प्राप्त करते है। उसने अच्छा खाना व सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।
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2011 में बंद हो गया था अनाथ आश्रम
फ्रांसवाला रोड पर शहर चल रहा अनाथ आश्रम उनके संचालकों के विदेश चले जाने के कारण बंद हो गया था। जिस कारण करीब 22 बच्चे शहर की सड़कों पर आ गए। सनातन धर्म मंदिर समिति ने बच्चों को संभाला ओर उनके लिए बाल उपवन खोला। जिसे बड़े संघर्ष के बाद मान्यता मिली।
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शहर के कई परिवार मनाते हैं बच्चों के साथ जन्मदिन
प्रधान रवि भूषण गर्ग ने बताया कि शहर के कई परिवार अपने बच्चों का जन्मदिन बाल उपवन के बच्चों के साथ मनाते है। बच्चों को इतना स्नेह मिल रहा है कि दो दिन पहले बाल उपवन में आकर जन्म दिन व मैरिज दिवस के लिए आना पड़ता है।
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मानवता की सेवा एक मात्र उद्देश्य
प्रधान रविभूषण गर्ग ने बताया कि बाल उपवन में बेसहारा बच्चों के जीवन में रंग भरकर मन का सुकून मिलता है। एकमात्र उद्देश्य मानवता की सेवा करना है। बच्चों के लिए मेडिकल सुविधाएं, शिक्षा, खाना, रहना के प्रति विशेष ध्यान रखा जा रहा है। समिति के 77 सदस्य हैं, वे सभी बच्चों से मिलने आते है।
प्रधान रविभूषण गर्ग ने बताया कि मेरे घर में जो मेरे बच्चे जो खाना खाते हैं। सुविधाएं प्राप्त करते है। उसने अच्छा खाना व सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।