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फोन की घंटी ने बचा लिया पूरा परिवार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Apr 2016 11:35 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
गुहला-चीका। चीका गांव के वार्ड नंबर दो में एक पूरे परिवार मौत के मुंह में जाने से एक फोन की घंटी ने बचा लिया। बल्बेहड़ा रोड़ पर एक घर की छत ढह जाने से परिवार के सदस्य बाल बाल बच गए। मकान मालिक महिंदर शर्मा ने बताया कि वह मजदूरी के सिलसिले में घर से बाहर गया हुआ था और उसने शाम को देर से घर आना की सूचना फोन पर देनी चाही। महिंद्र शर्मा ने बताया कि घर पर मोबाइल बाहर आंगन में रखा हुआ था और बच्चे कमरे के अंदर टीवी देख रहे थे।
उन्होंने बताया कि मोबाइल की घंटी सुनकर जैसे ही बच्चेे फोन सुनने कमरे से बाहर आये तो उसी वक्त कमरे की कच्ची छत का शहतीर टूट गया और छत भरभरा कर ढह गयी। महिंदर शर्मा ने बताया की कमरे में रखा सारा सामान टीवी, मंजे, अलमारी, पंखा और अन्य कीमती सामान छत के नीचे दबकर टूट गया लेकिन भगवान की कृपा से उसका पूरा परिवार सुरक्षित बच गया। महिंद्र शर्मा ने कहा कि अगर वह कुछ देर और अपने घर फोन नहीं करता तो उसके परिवार के कोई भी बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि वह गरीब व्यक्ति है और मेहनत मजदूरी करके अपना परिवार चला रहा था। अब मकान की छत ढह जाने से उसके सामने सिर छुपाने की समस्या आन खड़ी है। उसने सरकार से मांग की है कि उसे मुआवजा दिया जाए ताकि वह फिर से अपने मकान की छत बना सके।
गुहला-चीका। चीका गांव के वार्ड नंबर दो में एक पूरे परिवार मौत के मुंह में जाने से एक फोन की घंटी ने बचा लिया। बल्बेहड़ा रोड़ पर एक घर की छत ढह जाने से परिवार के सदस्य बाल बाल बच गए। मकान मालिक महिंदर शर्मा ने बताया कि वह मजदूरी के सिलसिले में घर से बाहर गया हुआ था और उसने शाम को देर से घर आना की सूचना फोन पर देनी चाही। महिंद्र शर्मा ने बताया कि घर पर मोबाइल बाहर आंगन में रखा हुआ था और बच्चे कमरे के अंदर टीवी देख रहे थे।
उन्होंने बताया कि मोबाइल की घंटी सुनकर जैसे ही बच्चेे फोन सुनने कमरे से बाहर आये तो उसी वक्त कमरे की कच्ची छत का शहतीर टूट गया और छत भरभरा कर ढह गयी। महिंदर शर्मा ने बताया की कमरे में रखा सारा सामान टीवी, मंजे, अलमारी, पंखा और अन्य कीमती सामान छत के नीचे दबकर टूट गया लेकिन भगवान की कृपा से उसका पूरा परिवार सुरक्षित बच गया। महिंद्र शर्मा ने कहा कि अगर वह कुछ देर और अपने घर फोन नहीं करता तो उसके परिवार के कोई भी बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
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उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि वह गरीब व्यक्ति है और मेहनत मजदूरी करके अपना परिवार चला रहा था। अब मकान की छत ढह जाने से उसके सामने सिर छुपाने की समस्या आन खड़ी है। उसने सरकार से मांग की है कि उसे मुआवजा दिया जाए ताकि वह फिर से अपने मकान की छत बना सके।
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