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Kaithal News: खतरे से खाली नहीं कंडम वाहनों की सवारी

Sun, 21 Apr 2024 04:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sun, 21 Apr 2024 04:06 AM IST
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Riding condom vehicles is not free from danger
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। कंडम वाहनों की सवारी खतरे से खाली नहीं है। जिले के लगभग 300 स्कूलों की लगभग तीन हजार स्कूल बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। ये सुबह और शाम बच्चों को ले जाने और छुट्टी के बाद अपने गंतव्य पर छोड़ने का काम कर रही है लेकिन इनमें से लगभग 1500 बसें ही पंजीकृत हैं।

सड़कों पर दौड़ने वाली बसों में तमाम ऐसी हैं, जो सुरक्षा पॉलिसी के मानक भी पूरे नहीं करती। इसी वजह से प्रदेश में आए दिन हादसों की खबरें आती रहती हैं। दूसरी ओर पंजीकृत वाहनों के लगभग 50 बच्चे बस में सफर कर सकते हैं, लेकिन निजी स्कूल बसों प्रत्येक बस में 70 से 80 बच्चों को बैठाकर लेकर जाती है। यह सरकार केे नियमों की अवहेलना है और हादसों को न्योता देने का काम किया जा रहा है।
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गौरतलब है कि आरटीए ने अब तक 53 बसों की ही फिटनेस जांच की है, जिनमें प्रत्येक बसों में खामियां मिली हैं। इसके अलावा पंजीकृत 1450 बसों की फिटनेस जांच करनी शेष है, उनमें कितनी खामियां होगी। यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। आरटीए विभाग ने सभी स्कूलों को 28 अप्रैल तक सभी स्कूलों को बसों में खामियों को सुधारने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद जांच के दौरान खामी पाई गई तो संबंध स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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इसके बाद ऑटो सहित अन्य वाहनों में स्कूल जाने वाले वाहनों की भी जांच होगी। जिसमें बच्चों की सुरक्षा दृष्टि के नियमों का लागू करवाने का प्रयास किया जाएगा। विदित रहे कि ऑटो, ई रिक्शा, जुगाड़ रिक्शा, कैब चालक भी अधिक से अधिक संख्या में भरकर बच्चों को लेकर जाते हैं। कई ऑटो चालक तो बच्चों को आगे वाली सीट पर निर्धारित संख्या से अधिक बैठकर ले जाते हैं। जिससे बच्चों के ऑटो से बाहर पैर रहते हैं। बच्चों को भी परेशान होकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है।


स्कूल बसों के साथ इतने हादसे होने के बावजूद भी स्कूल संचालक गंभीर नहीं दिख रहे। खामियां दुरुस्त करने की चेतावनी के बावजूद कमियां मिल रही हैं। दूसरी ओर ऑटो, ई रिक्शा व अन्य निजी वाहन जो बच्चों को अपने गंतव्य तक छोड़ते हैं उनको किसी प्रकार का कोई सुधार नहीं है। ऑटो चालक तो क्षमता से अधिक बसों को ऑटो में बैठाकर ले जाते हैं। विभाग ने इन वाहनों पर अब तक किसी प्रकार की जांच नहीं की है।
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